कश्मीरी हिंदू अब वापस अपने घर लौट सकेंगे : भारतीय राजनयिक

सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में चक्रवर्ती ने सभा में मौजूद लोगों को बताया कि भारत ने अगस्त में कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द करने के कदम के बाद कश्मीर पर अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक हमले को सफलतापूर्वक रोक दिया है.

कश्मीरी हिंदू अब वापस अपने घर लौट सकेंगे : भारतीय राजनयिक

न्यूयॉर्क/नई दिल्ली: न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत संदीप चक्रवर्ती ने कश्मीरी हिंदुओं की एक सभा से कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश में बदलने के बाद वहां की सुरक्षा स्थिति में सुधार होगा, जिससे कश्मीरी पंडित वापस लौट सकेंगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को इजरायल के मॉडल का पालन करना चाहिए. सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में चक्रवर्ती ने सभा में मौजूद लोगों को बताया कि भारत ने अगस्त में कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द करने के कदम के बाद कश्मीर पर अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक हमले को सफलतापूर्वक रोक दिया है.

उन्होंने कहा, 'हमें तर्क के साथ यह समझना होगा कि यह (अनुच्छेद-370 को रद्द करना) क्यों किया गया. मुझे लगता है कि किसी ने यहूदी मुद्दे के बारे में बात की है. उन्होंने (यहूदियों ने) अपनी मातृभूमि के बाहर अपनी संस्कृति को 2,000 वर्षों तक जीवित रखा और वे वहां वापस गए. मुझे लगता है कि हम सभी को कश्मीरी संस्कृति को जीवित रखना होगा. कश्मीरी संस्कृति भारतीय संस्कृति है, यह हिंदू संस्कृति है.'

उन्होंने कहा कि एक कश्मीरी हिंदू सुनंदा वशिष्ठ ने कहा है कि 'कश्मीर भारत है और भारत कश्मीर है. हममें से कोई भी कश्मीर के बिना भारत की कल्पना नहीं कर सकता है.'

उन्होंने कहा, 'अनुपम जी ने कहा कि भारत में हम हर किसी के बारे में सोचते हैं. दूसरे धर्मों के बारे में भी सोचते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से हर कोई इस तरह से नहीं सोचता. मुझे लगता है कि हमने रणनीतिक गड़बड़ी की, जिससे हमें लगा कि हर कोई हमारी तरह सोच रहा है, लेकिन हर कोई हमारी तरह नहीं सोच रहा है.'

उन्होंने कहा, 'हमें दूसरों की तरह सोचना शुरू करना चाहिए और उसके बाद ही हम उन्हें उनके खेल में हरा पाएंगे. मुझे लगता है कि हमें ऐसा करना होगा और यह सोच अब आ रही है.'

उन्होंने कहा कि 'कश्मीरी पंडित फिर से कश्मीर लौटने में सक्षम होंगे और उन्हें वहां सुरक्षा मिलेगी. हमारे पास दुनिया में पहले से ही एक मॉडल मौजूद है. मैं नहीं जानता कि हम इसे क्यों नहीं अपनाते. ऐसा मध्यपूर्व में हुआ है. अगर इजरायली लोग ऐसा कर सकते हैं तो हम भी कर सकते हैं.'

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