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सिंगापुर: पुलिस को फर्जी फोन कॉल करने पर भारतीय मूल के व्यक्ति को 3 साल की सजा

सिंगापुर पुलिस को बार-बार शरारती फोन कॉल करने के मामले में भारतीय मूल के एक व्यक्ति को तीन साल जेल की सजा सुनाई गई है. 

सिंगापुर: पुलिस को फर्जी फोन कॉल करने पर भारतीय मूल के व्यक्ति को 3 साल की सजा
गौरतलब है कि इसी तरह के एक अन्य मामले में सिंगापुर के इस नागरिक को पहले भी जेल की सजा हुई थी.(प्रतीकात्मक तस्वीर)

सिंगापुर: सिंगापुर पुलिस को बार-बार शरारती फोन कॉल करने के मामले में भारतीय मूल के एक व्यक्ति को तीन साल जेल की सजा सुनाई गई है. गौरतलब है कि इसी तरह के एक अन्य मामले में सिंगापुर के इस नागरिक को पहले भी जेल की सजा हुई थी. अदालत को बताया गया कि सफाई कर्मी 61 वर्षीय गुरचरण सिंह शराब पीने के बाद आपात नंबर ‘999’ पर फोन करता था. जून में ऐसी घटना दो दिन हुई.  सिंह ने पहले दिन दो बार और दूसरे दिन 15 बार फोन किया. सिंह ने 10 जून को एक सार्वजनिक फोन से पुलिस को फोन किया. 

उसने फोन कर ऑपरेटर से कहा, ‘‘क्या आप बेवकूफ हैं. ’’ उसने यह भी कहा, ‘‘मैने आव्रजन भवन में एक डायनामाइट रख दिया है. ’’ उप लोक अभियोजक डफने लीम ने बताया कि वह जानता था कि ये संदेश फर्जी है. 

सिंगापुर: हमला करने के आरोप में 5 भारतीयों को बनाया गया आरोपी
आपको बता दें कि इससे पहले भी सिंगापुर में भारतीय मूल के पांच लोगों को लिटिल इंडिया में दंगों और भारतीय मूल के एक व्यक्ति पर घातक हथियारों से हमला करने को लेकर आरोपित किया गया. विक्टर एलेक्जेंडर अरूमुगम , अर्जुन रत्नावेलु , हरीश शनमुगनाथन , दिनेश कुमार रूवी और शरवीन राज सूरज को बुधवार को हुई इस घटना को लेकर आरोपित किया गया है. सभी आरोपियो की उम्र 17 से 28 वर्ष के बीच है. चैनल न्यूज एशिया की खबर के मुताबिक दोष साबित होने पर इन्हें 10 साल तक की कैद और बेंत से पीटने की सजा दी जा सकती है.

सिंगापुर: हमला करने के आरोप में 5 भारतीयों को बनाया गया आरोपी

सिंगापुरवासी दो अन्य लोगों के खिलाफ अभी जांच जारी है. इन लोगों पर भारतीय मूल के दिनेश सेलवाराज (26) पर हमला करने का आरोप है. सभी सातों आरोपियों को पुलिस ने कल गिरफ्तार कर लिया. खबर के मुताबिक व्यक्तिगत विवाद के चलते यह घटना हुई. सिंगापुर के गृह मंत्री के.

शानमुगम ने इस हमले को भयावह बताया है. गौरतलब है कि दिसंबर 2013 की हिंसा के बाद लिटिल इंडिया में यह पहली घटना है. उस हिंसा में करीब 300 प्रवासी कामगार शामिल थे, जिनमें से ज्यादातर भारत से थे.  

इनपुट भाषा से भी