कोरोना से निपटने में भारत की तैयारी का यह देश भी हुआ मुरीद

कोरोना महामारी से निपटने के भारतीय इंतजामों की तारीफ करने वालों में अब वियतनाम भी शामिल हो गया है. चीन के इस पड़ोसी देश ने भारत सरकार द्वारा लागू किये गए लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपायों को सराहा है.

कोरोना से निपटने में भारत की तैयारी का यह देश भी हुआ मुरीद
फाइल फोटो

नई दिल्ली : कोरोना महामारी से निपटने के भारतीय इंतजामों की तारीफ करने वालों में अब वियतनाम भी शामिल हो गया है. चीन के इस पड़ोसी देश ने भारत सरकार द्वारा लागू किये गए लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपायों को सराहा है. वियतनाम में भारतीय राजदूत प्रणय वर्मा (Pranay Verma) ने कहा कि दोनों देशों ने संकट से निपटने के लिए समान दृष्टिकोण अपनाया है और वर्तमान में दोनों देशों में संक्रमण दर दूसरों के मुकाबले कम है. उन्होंने यह भी बताया कि वियतनाम में फंसे भारतीयों को किस तरह से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. 

सिद्धांत सिब्बल: वियतनाम में फंसे भारतीयों के लिए क्या किया जा रहा है?
प्रणय वर्मा: COVID-19 ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है. हो ची मिन्ह सिटी (Ho Chi Minh City) में हमारा दूतावास और कॉन्सलेट जनरल सक्रिय रूप से उन भारतीय नागरिकों तक पहुंच रहे हैं, जो वियतनाम में यात्रा प्रतिबंधों के चलते फंसे हुए हैं. वियतनाम में फंसे ज्यादातर लोग पर्यटक और बिजनेस ट्रेवलर या अल्पकालिक आगंतुक हैं, जो महामारी के मद्देनजर लगाये गए यात्रा संबंधी प्रतिबंध की वजह से भारत नहीं लौट सकते. 

हमने वियतनाम के अपने सभी भारतीय नागरिकों को सूचित करने के लिए बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया टूल का इस्तेमाल किया है. साथ ही हमने भारतीयों को पंजीकृत करने के लिए एक ऑनलाइन अभियान भी शुरू किया है. हम उन्हें वीजा अवधि बढ़ाने या वियतनाम प्रवास को आसान बनाने के लिए आवश्यक सामान के लिए हमसे संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. अच्छी बात यह है कि वियतनाम का भारतीय समुदाय और भारतीय व्यापार मंडल जैसे संगठन फंसे हुए लोगों से संपर्क स्थापित करने में हमारी मदद कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जरूरतमंद व्यक्ति तक तुरंत सहायता पहुंचे.  

वियतनाम में भारतीय राजदूत प्रणय वर्मा

भारत और वियतनाम COVID महामारी पर कैसे सहयोग कर रहे हैं? हम HCQ भेज रहे हैं या किट आदि आयात कर रहे हैं?
प्रणय वर्मा: भारत और वियतनाम COVID-19 से लड़ाई के दौरान एक-दूसरे के लगातार संपर्क में रहे हैं. पीएम मोदी ने 13 अप्रैल को वियतनामी पीएम से टेलीफोन पर महामारी से उत्पन्न स्थिति के साथ ही इस विषय पर भी बात की कि दोनों देश इससे निपटने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं. हम कूटनीतिक चैनलों द्वारा भी जुड़े हुए हैं और महत्वपूर्ण जानकारी का आदान-प्रदान कर रहे हैं. भारत पारंपरिक रूप से वियतनाम की फार्मास्यूटिकल्स ज़रूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता आया है और COVID-19 के दौर भी यह रिश्ता कायम है. यदि आप कोरोना से लड़ाई में भारत और वियतनाम के दृष्टिकोण को देखें तो पाएंगे कि दोनों ने शुरुआत में लगभग एक जैसी रणनीति पर काम किया. जैसे कि यात्रा प्रतिबंध, कन्टेन्मेंट रणनीतियां – क्वारंटाइन और सोशल डिस्टेंसिंग उपाय, संक्रमित व्यक्तियों की पहचान, बड़े पैमाने पर चिकित्सा तैयारियां आदि. सही समय पर लिए गए इन फैसलों के चलते ही दोनों देशों में स्थिति बाकी देशों की तुलना में काफी अच्छी है. 

क्या हमने कोई भारतीय कंटेनमेंट मॉडल साझा किया है या वियतनाम के मॉडल से कुछ सीखा है?
प्रणय वर्मा: जैसा कि मैंने कहा, हम सूचनाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं और और रोकथाम रणनीतियों का आदान-प्रदान करके वियतनाम के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं. हम भारत की कार्रवाईयों के विषय में वियतनाम को विस्तृत जानकारी दे रहे हैं. वियतनाम सरकार ने कोरोना संकट से निपटने में भारत की कार्यप्रणाली की सराहना की है. खासतौर पर लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग ने जिस तरह से कोरोना की रफ्तार को भारत में कम किया है, वियतनाम उससे काफी प्रभावित है. इसी प्रकार, हम भारतीय अधिकारियों को वियतनाम में उठाये जा रहे कदमों से लगातार अवगत करा रहे हैं. उदाहरण के तौर पर अपर बेस्ट प्रैक्टिस, टेस्ट किट के स्वदेशी विकास, प्रौद्योगिकी का उपयोग और कांटेक्ट ट्रेसिंग, सोशल डिस्टेंसिंग लागू करने और महामारी के प्रबंधन में समग्र सफलता.  

वियतनाम में जमीनी हालात कैसे बदल गए हैं, भारतीय राजनयिक कैसे काम कर रहे हैं?
प्रणय वर्मा: मौजूदा स्थिति के अनुसार, वियतनाम ने कोरोना को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है. जनवरी के अंत में सामने आये पहले मामले के बाद से संक्रमितों की कुल संख्या यहां 271 है. अप्रैल के मध्य से वियतनाम में कम्युनिटी ट्रांसमिशन का कोई मामला देखने को नहीं मिला है. इसकी एक वजह सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपायों को लागू करना है. हमारे दूतावास और कॉन्सलेट जनरल लगातार खुले हुए हैं, हालांकि कर्मचारियों की संख्या सीमित की गई है. हम विशेष रूप से सतर्क रहे हैं कि हमारी कॉन्सलेट सेवाएं बाधित न हों और हम भारतीय नागरिकों को सक्रिय रूप से सहायता प्रदान कर सकें. 22 अप्रैल के बाद से सोशल डिस्टेंसिंग मानदंड में ढील के साथ, जीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, इस सप्ताह से स्कूल फिर से खुल गए हैं और हम भी पूरी ताकत से काम कर रहे हैं और हमारे सभी राजनयिक, अधिकारी और स्थानीय कर्मचारी सकुशल हैं.