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ईरानी संसद ने अमेरिका को दिया मुंहतोड़ जवाब, अमेरिकी फौज को घोषित किया 'आतंकवादी'

ईरान के सांसदों ने पिछले हफ्ते एक विधेयक को मंजूरी दी थी जिसमें मध्य-पूर्व में अमेरिकी फौज को आतंकवादी बताया गया था जिसके बाद यह विधेयक पेश किया गया है. इससे पहले अमेरिका ने ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी बताया था. 

ईरानी संसद ने अमेरिका को दिया मुंहतोड़ जवाब, अमेरिकी फौज को घोषित किया 'आतंकवादी'
.(फाइल फोटो)

तेहरान: ईरान की मीडिया ने बताया कि संसद ने एक विधेयक को मंजूरी दी है जिसमें अमेरिका की पूरी फौज को आतंकवादी बताया गया है. ईरान के सांसदों ने पिछले हफ्ते एक विधेयक को मंजूरी दी थी जिसमें मध्य-पूर्व में अमेरिकी फौज को आतंकवादी बताया गया था जिसके बाद यह विधेयक पेश किया गया है. इससे पहले अमेरिका ने ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी बताया था. अर्द्ध सरकारी इसना संवाद समिति ने खबर दी कि मंगलवार को सत्र में 215 सांसदों में से 173 ने मतदान किया.

विधेयक में यह भी मांग की गई है कि ईरान की सरकार उन अन्य सरकारों के खिलाफ भी अनिर्दिष्ट कार्रवाई करे जो औपचारिक रूप से अमेरिका के उस पदनाम का समर्थन करते हैं जो उसने ईरान की सेना के लिए दिया है. सऊदी अरब, बहरीन और इस्राइल ने ट्रम्प प्रशासन के पदनाम का समर्थन किया है.

रिवॉल्यूशनरी गार्ड में करीब सवा लाख सैनिक हैं
ईरान में ‘रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर’ की स्थापना 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद हुई थी. फिलहाल रिवॉल्यूशनरी गार्ड में करीब सवा लाख सैनिक हैं. शुरुआत में यह सैन्य इकाई ईरान में केवल आंतरिक बल के तौर पर ही काम करती थी. लेकिन 1980 में जब इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया तो इस रिवॉल्यूशनरी गार्ड की ताकत को बढ़ा दिया गया. तब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह खोमेनी ने इस सैन्य बल को खुद की जमीन, नौसेना और वायु सेनाएं दे दीं. 

रिवॉल्यूशनरी गार्ड की निगरानी में ही ईरान का बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम चलता है
रिवॉल्यूशनरी गार्ड की निगरानी में ही ईरान का बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम चलता है. पिछले दिनों अमेरिका की तमाम चेतावनियों के बाद भी उसने कई मिसाइल परीक्षण किए थे. ईरान के संविधान के मुताबिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड की जवाबदेही सिर्फ ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रति होती है.

इस समय अयातोल्लाह अली खमेनेई देश के सर्वोच्च नेता हैं. इसका काम ईरान को आंतरिक और बाहरी खतरों से बचाना है. इस्लामी क्रांति के बाद इस सुरक्षा बल को उस समय की ईरानी सेना के समांतर एक संगठन के तौर पर खड़ा किया गया था क्योंकि उस वक्त सेना में बहुत से लोग सत्ता से बेदखल किए गए ईरानी शाह के वफादार माने जाते थे.

इनपुट भाषा से भी