इस देश के पास 10 गुना ज्यादा संवर्धित यूरेनियम, दुनिया के लिए बन सकता है खतरा!

संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़ी एक संस्था ने दावा किया है कि ईरान तेजी से परमाणु संवर्धन के काम में जुटा हुआ है और बड़े पैमाने पर वो परमाणु संवर्धन कर भी रहा है.

इस देश के पास 10 गुना ज्यादा संवर्धित यूरेनियम, दुनिया के लिए बन सकता है खतरा!
ईरान का परमाणु संयत्र (फाइल फोटो)

वॉशिंगटन: संयुक्त राष्ट्र संघ से जुड़ी एक संस्था ने दावा किया है कि ईरान तेजी से परमाणु संवर्धन के काम में जुटा हुआ है और बड़े पैमाने पर वो परमाणु संवर्धन कर भी रहा है. ये संस्था यूरेनियम और परमाणु हथियारों (Nuclear Weapons) से जुड़े मामलों पर नजर रखती है और संयुक्त राष्ट्र संघ को रिपोर्ट देती है. संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (International Atomic Energy Agency- IAEA) ने कहा है कि ईरान के पास एनरिच किये गए यूरेनियम का भंडार अब 2,105 किलो हो गया है, जबकि 2015 के समझौते के तहत यह 300 किलोग्राम से अधिक नहीं हो सकता था.

हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा ईरान
ईरान ने बीते साल जुलाई में कहा था कि उसने यूरेनियम संवर्धन के लिए नए और उन्नत तकनीक वाले सेंट्रीफ्यूज उपकरणों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. ईरान में दो जगहों- नतांज और फोर्दो में यूरेनियम का संवर्धन किया जाता है. ईरान 2000 के दशक से ही परमाणु शक्ति हासिल करने की कोशिश कर रहा है. ईरान ने आईएईए के पर्यवेक्षकों को अपने दो पूर्व संदिग्ध परमाणु ठिकानों में से एक की जाँच करने की इजाज़त दी थी. खुद आईएईए के डायरेक्टर जनरल रफाएल ग्रॉसी ने इस जगह का दौरा किया था.

अगली रिपोर्ट के आने में तीन महीनों का लगेगा समय!
एजेंसी ने कहा है कि वह इसी महीने दूसरे ठिकाने से भी सैंपल लेगी. हालांकि एक राजनयिक सूत्र का कहना है कि दूसरे ठिकाने से लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट आने में तीन महीनों का वक्त लग सकता है. साल 2015 में हुए परमाणु समझौते को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मई 2018 में रद्द कर दिया था और ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे. जिसके बाद ईरान ने अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया.

बाकी देश नहीं तोड़ेंगे समझौता
गौरतलब है कि पिछले साल से ईरान ने परमाणु समझौते के वादों का उल्लंघन शुरू कर दिया था. इस परमाणु समझौते पर ईरान के साथ अमरीका, ब्रिटेन, रूस, जर्मनी, फ्रांस और चीन ने भी दस्तख़त किये थे. हालांकि पिछले सप्ताह विएना में हुई एक बैठक के बाद ब्रिटेन, रूस, जर्मनी और चीन ने कहा है कि वो 2015 के समझौते को नहीं तोड़ेंगे.

ये भी देखें-