कोरोना पर बच्चों से जुड़ी दक्षिण कोरिया से आई चौंकाने वाली रिपोर्ट, वैज्ञानिक भी हैरान!

कोरोना महामारी के चलते पूरी दुनिया बेहाल है.

कोरोना पर बच्चों से जुड़ी दक्षिण कोरिया से आई चौंकाने वाली रिपोर्ट, वैज्ञानिक भी हैरान!
प्रतीकात्मक तस्वीर

न्यूयॉर्क: कोरोना महामारी के चलते पूरी दुनिया बेहाल है. अमेरिका, ब्राजील के बाद भारत में कोरोना से सबसे ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों पर तमाम नहीं लगाया जा सकता है  इस बीच दक्षिण कोरिया से आई एक रिपोर्ट ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है, जिसमें बताया जा रहा है कि जिन बच्चों में कोरोना (SARS-CoV-2) संक्रमण के लक्षण नहीं दिखते, वो कोरोना के सबसे खतरनाक वाहक हो सकते हैं. क्योंकि ऐसे बच्चों के शरीर में कोरोना का वायरल लंबे समय सक्रिय रहता है और बिना किसी लक्षण के जाहिर हुए दूसरों में फैलता रहता है.

जामा पेडियाट्रिक्स की रिपोर्ट में खुलासा
दक्षिण कोरिया से सामने आई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना संक्रमित बच्चों को भले ही कम नुकसान पहुंचे, लेकिन वो इस वायरस के प्रसार में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. जामा पेडियाट्रिक्स नाम के शोध जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट ने दुनिया भर के विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है.

कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के बाद पकड़ में आए थे मामले
अमेरिका के चिल्ड्रेन्स नेशनल हॉस्पिटल की शोधकर्ता रॉबर्टा एल डेबिआसी ने कहा, 'दक्षिण कोरिया के 22 अस्पतालों में 91 बच्चों पर नजर रखी गई, जो कोरोना से संक्रमित थे. अमेरिका से उलट दक्षिण कोरिया में मरीजों को तबतक अस्पताल में रखा जाता है, जबकि कि वो पूरी तरह से संक्रमण मुक्त न हो जाएं. भले ही उनमें कोई लक्षण नहीं दिख रहे हों.' उन्होंने आगे कहा, 'ये सभी मामले कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के बाद पकड़ में आए थे, जिसमें से 22 फीसदी में कभी कोई लक्षण दिखा ही नहीं. वहीं 20 फीसदी बच्चों में शुरुआत में भले ही लक्षण नहीं दिखे, लेकिन बाद में उनमें लक्षण सामने आ गए. जबकि 58 फीसदी बच्चों में शुरूआती लक्षण साफ दिख गए थे'

हर तीन दिन में की गई टेस्टिंग
इस शोध के मुताबिक इन सभी संक्रमितों को अस्पताल में रखा गया और हर तीन दिन में उनका परीक्षण किया गया. ऐसा इसलिए किया गया, ताकि पता चल सके कि बच्चों में कोरोना वायरस कबतक छिपकर रह सकता है.

बिना लक्षणों वाले बच्चे बड़ी आबादी को कर सकते हैं संक्रमित
इस शोध में चौंकाने वाले खुलासे हुए,जिसमें कई बच्चों में तीन सप्ताह तक कोरोना वायरस की मौजूदगी रही और वो संक्रमण फैलाने की स्थिति में थे. ये ऐसे बच्चे थे, जिनमें कोरोना संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिखे थे. वहीं, कुछ बच्चों में दो से ढाई सप्ताह में कोरोना का असर खत्म हो गया था. अभी तक माना जा रहा था कि बच्चों में कोरोना का असर कम होता है, लेकिन इस नई शोध के मुताबिक भले ही बच्चों पर कोरोना का असर कम हो, लेकिन वो कोरोना के वाहक बनकर एक बड़ी आबादी को कोरोना का शिकार बना सकते हैं.

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