मालदीव में संसद बंद, राजनीतिक बंदियों को अब तक नहीं किया गया रिहा

मुख्य विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) ने कहा है कि यामीन ने अब तक किसी राजनीतिक बंदी को रिहा नहीं किया है.

मालदीव में संसद बंद, राजनीतिक बंदियों को अब तक नहीं किया गया रिहा
मालदीव के निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद. (फाइल फोटो)

माले (मालदीव): मालदीव में संसद की कार्यवाही शनिवार (3 फरवरी) को अनिश्चितकाल तक के लिए टाल दी गयी. राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन प्रशासन ने राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश का अब तक पालन नहीं किया है. पीपुल्स मजलिस या संसद ने स्थानीय संवाददाताओं को संक्षिप्त संदेश में बताया कि सुरक्षा कारणों से सोमवार (5 फरवरी) से होने वाली कार्यवाही नहीं होगी. सत्र के लिए नयी तारीख की घोषणा नहीं की गयी है. नौ राजनीतिक बंदियों को रिहा करने के उच्चतम न्यायालय के गुरुवार (1 फरवरी) के आदेश के बाद यह घटनाक्रम सामने आया है. इसके साथ ही 12 सांसदों के पद को भी बहाल किया गया, जिन्हें उनके पदों से बेदखल कर दिया गया था.

इन सांसदों का पद बहाल होने से 85 सदस्यीय एसेंबली में विपक्ष का बहुमत हो गया है और यामीन तथा उनके मंत्रिमंडल पर महाभियोग का रास्ता साफ हो गया है. संकट का सामना कर रहे राष्ट्रपति ने 3 फरवरी को घोषणा की कि उन्होंने पुलिस प्रमुख अहमद सौघी को हटा दिया, जिनकी नियुक्ति दो दिन पहले हुयी थी. मुख्य विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) ने कहा है कि यामीन ने अब तक किसी राजनीतिक बंदी को रिहा नहीं किया है. कोलंबो स्थित एमडीपी के प्रवक्ता हामिद अब्दुल गफूर ने 3 फरवरी को कहा, ‘‘यामीन ने कहा है कि वह आदेश का पालन करेंगे लेकिन 36 घंटे बीतने के बावजूद उन्होंने आदेश का पालन नहीं किया है.’’

मालदीव के निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि वह फिर चुनाव लड़ेंगे
इससे पहले मालदीव के निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने बीते 2 फरवरी को कहा था कि वह फिर से चुनाव लड़ेंगे. इससे कुछ घंटे पहले उच्चतम न्यायालय ने राजनीतिक बंदियों के एक समूह को मुक्त करने का फैसला सुनाया, जिससे देश की राजधानी में उथल-पुथल मच गयी. अपने सभी प्रतिद्धंद्वियों के जेल में या निर्वासित होने के कारण मौजूदा राष्ट्रपति यामीन अब्दुल गयूम फिर से चुनाव में निर्विरोध चुने जाने वाले थे. लेकिन, पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने कहा है कि वह यामीन को चुनौती देंगे, जिन्होंने पांच साल पहले सत्ता में आने के बाद कई लोकतांत्रिक सुधारों के फैसले को पलट दिया. जिन कैदियों को मुक्त करने का आदेश दिया गया है उसमें नशीद भी हैं. 

पड़ोस के श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में नशीद ने एपी से कहा, ‘मैं लड़ सकता हूं और मैं मुकाबला करूंगा और उम्मीद है कि हम एक बार फिर जीत हासिल करेंगे.’ नशीद 2016 में जेल में थे, लेकिन जेल से चिकित्सा आवेदन पर वह ब्रिटेन जाने के बाद निर्वासन में थे. नशीद ने देश की सुरक्षा सेवा में सुधार का भी आह्वान करते हुए कहा कि सेना और पुलिस के भीतर कुछ तत्व तानाशाही का समर्थन करना चाहते हैं.