बीजिंग पर वार: अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा ‘यह दुनिया को चीन से मुक्ति दिलाने का समय है’

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो (Mike Pompeo) ने एक बार फिर से चीन (China) पर निशाना साधा है. उन्होंने गुरुवार को कहा कि यह चीन की निरंकुशता और अत्याचारों से मुक्ति का समय है और हमें ‘चीन मुक्त’ दुनिया के लिए प्रयास करने चाहिए.

बीजिंग पर वार: अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा ‘यह दुनिया को चीन से मुक्ति दिलाने का समय है’
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो (फाइल फोटो)

कैलिफोर्निया: अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो (Mike Pompeo) ने एक बार फिर से चीन (China) पर निशाना साधा है. उन्होंने गुरुवार को कहा कि यह चीन की निरंकुशता और अत्याचारों से मुक्ति का समय है और हमें ‘चीन मुक्त’ दुनिया के लिए प्रयास करने चाहिए.

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ‘चीन अपनी विस्तारवादी नीति पर कायम है और दूसरों की स्वतंत्रता को बंधक बना रहा है. यदि दुनिया कम्युनिस्ट चीन को नहीं बदलती है, तो कम्युनिस्ट चीन हमें बदल देगा’. कैलिफोर्निया स्थित रिचर्ड निक्सन प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में बोलते हुए पोम्पियो ने आगे कहा कि बीजिंग ने अमेरिका और पश्चिमी उदारता का सिर्फ लाभ उठाया है, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा. आपको बता दें कि यह लाइब्रेरी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के नाम पर है, जिन्होंने लगभग 50 साल पहले चीन के साथ अमेरिकी कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत की थी.'

माइक पोम्पियो ने चीन को लेकर पूर्व अमेरिकी सरकारों की नीतियों पर भी प्रहार किया. उन्होंने कहा कि चीन ने हांगकांग की स्वायत्तता, दक्षिण चीन सागर और राज्य समर्थित बौद्धिक संपदा खतरों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को तोड़ दिया है. हम पहले जैसी स्थिति (पुरानी नीतियां) में केवल इसलिए वापस नहीं आ सकते, क्योंकि चीन के लिए वह आरामदायक या सुविधाजनक हैं.

विदेश मंत्री ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का जिक्र करते हुए कहा, ‘हम अब अपने देशों के बीच मौलिक राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों को नजरअंदाज नहीं कर सकते, जैसे कि CCP ने इन्हें कभी नजरअंदाज नहीं किया है’. पोम्पियो ने कहा कि वाशिंगटन ने चीन को ह्यूस्टन, टेक्सास स्थित अपना वाणिज्य दूतावास बंद करने का आदेश दिया है, क्योंकि यह अवैध रूप से अमेरिकी कंपनियों के ट्रेड सीक्रेट प्राप्त करने और जासूसी का अड्डा बन गया था.

उन्होंने कहा, ‘हमने इस सप्ताह चीन के ह्यूस्टन स्थित वाणिज्य दूतावास को बंद करने का फैसला किया है, क्योंकि यह जासूसी और बौद्धिक संपदा को चुराने का अड्डा बन गया था. चीन ने हमारी बौद्धिक संपदा चुराई और ट्रेड सीक्रेट चुराए जिसकी वजह से लाखों अमेरिकी नागरिकों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी.

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