सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी का सीक्रेट ऑपरेशन, दुश्‍मन के परमाणु प्‍लांट को बनाया टारगेट
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सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी का सीक्रेट ऑपरेशन, दुश्‍मन के परमाणु प्‍लांट को बनाया टारगेट

प्लांट में ब्लास्ट करने के लिए ड्रोन की मदद ली गई थी. इस काम में करीब हजार लोग लगे हुए थे जिनमें तकनीशियन से लेकर कई तरह के एक्सपर्ट शामिल थे. रिपोर्ट में बताया गया है कि तीन बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मोसाद ने करीब 18 महीने तक प्लानिंग की थी. 

सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी का सीक्रेट ऑपरेशन, दुश्‍मन के परमाणु प्‍लांट को बनाया टारगेट

नई दिल्ली: इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान के 10 असंतुष्ट वैज्ञानिकों को सीक्रेट तरीके से भर्ती किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि वह इंटरनेशनल ग्रुप के लिए काम कर रहे हैं. इसके बाद उन्होंने वैज्ञानिकों की मदद से ईरान के ही न्यूक्लियर प्लांट को नष्ट करने का प्लान भी तैयार किया. ईरान में अप्रैल के दौरान नटांज परमाणु प्लांट को खत्म करने के लिए एक सीक्रेट ऑपरेशन चलाया गया था.

न्यूक्लियर प्लांट को हुआ काफी नुकसान

'ज्यूस क्रानिकल' (Jewish Chronicle) की रिपोर्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस पूरे ऑपरेशन को एक साल से प्लान किया जा रहा था. इसमें बताया गया कि इजरायल ने सीक्रेट तरीके से 10 ईरानी वैज्ञानिकों को भर्ती किया था. इस पूरे ऑपरेशन से पर्दा तब उठा जब नटांज न्यूक्लियर प्लांट में पहली बार ब्लास्ट हुए थे और प्लांट का बड़ा हिस्सा इन धमाकों से बर्बाद हो गया.  

बता दें कि ईरान के न्यूक्लियर प्लांट में जुलाई 2020 में धमाका हुआ था. इस हमले में रेजा करीमी समेत तीन लोग शामिल थे. वह हमला होने से कुछ घंटे पहले देश छोड़कर भाग गया था.

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रिपोर्ट के मुताबिक प्लांट में ब्लास्ट करने के लिए ड्रोन की मदद ली गई थी. इस काम में करीब हजार लोग लगे हुए थे जिनमें तकनीशियन से लेकर कई तरह के एक्सपर्ट शामिल थे. रिपोर्ट में बताया गया है कि तीन बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मोसाद ने करीब 18 महीने तक प्लानिंग की थी. 

तस्करी से लाया गया विस्फोटक

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्लांट को उड़ाने का सामान तस्करी के जरिए लाया गया था, जिसमें विस्फोटक में शामिल था. इसके अलावा खुफिया एजेंसी ने ये सामान गुप्त ठिकाने पर छुपाकर रखा था. जानकारी के मुताबिक धमाके के लिए जिस ड्रोन से विस्फोटक लाया गया था वह मोटर साइकिल के साइज का क्वाडकॉप्टर था. ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मोसाद के एजेंटों ने नटांज सेंट्रीफ्यूज हॉल में विस्फोटकों को एक साल तक छुपाकर रखा था. 

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