मुंबई हमला : लश्कर को 40 लाख रूपया देने वाले को न्यायिक हिरासत

मुंबई हमले को अंजाम देने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को करीब 40 लाख रूपये प्रदान करने वाले व्यक्ति को पाकिस्तान की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और उसे आगे एफआईए की हिरासत में नहीं भेजने का फैसला किया।

लाहौर : मुंबई हमले को अंजाम देने वाले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को करीब 40 लाख रूपये प्रदान करने वाले व्यक्ति को पाकिस्तान की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और उसे आगे एफआईए की हिरासत में नहीं भेजने का फैसला किया।

सुफियान जफर इस मामले के अन्य छह संदिग्धों अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हम्माद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और मोहम्मद यूनुस अंजुम के साथ रावलपिंडी स्थित आदियाला जेल में सुनवाई में शामिल हुआ। ये संदिग्ध साल 2009 से इसी जेल में बंद हैं।

लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी और मुंबई हमले का मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी जेल से रिहा होने के बाद से किसी अज्ञात स्थान पर रह रहा है। वह एक साल पहले जेल से रिहा हुआ था। एफआईए के एक सूत्र ने बताया कि बीते शनिवार को आतंकवाद विरोधी अदालत ने जफर को न्यायिक हिरासत में भेजा और कहा कि संघीय जांच एजेंसी को इस संदिग्ध की जांच के लिए पर्याप्त समय दिया गया है।

जफर पर आरोप है कि उसने मुंबई हमले के सह-अभियुक्त रियाज को कराची के ड्रिग रोड स्थित मुस्लिम कॉमर्शियल बैंक की शाखा के खाता नंबर 2338-2 और एलाइड बैंक की ड्रिग कालोनी शाखा के खाता नंबर 2464-0 के माध्यम से 39.8 लाख रूपये दिए। यह धन मुंबई हमले से पहले दिया गया था।

सूत्र ने कहा कि एफआईए द्वारा पूछताछ के दौरान जफर से मुंबई हमले के संदिग्धों को लाखों रूपये मुहैया कराने, उनके एवं दूसरे फरार संदिग्धों के साथ उसके रिश्तों के बारे में पूछा गया। इस सूत्र ने कहा, ‘एफआईए ने मुंबई हमले के मामले के सह-अभियुक्तों को वित्तीय मदद मदद प्रदान करने, आतंकवादियों एवं लश्कर से उसके संबंध के बारे में पूछताछ की। उसे उस माध्यम एवं स्रोत के बारे में भी पूछा गया जिससे उसे इनकी भारी भरकम रकम मिली थी जो उसने आतंकवादियों को दिए।’  

मुंबई हमले के मामले में भगोड़ा घोषित होने के बाद से जफर फरार चल रहा था। उसे इस महीने की शुरूआत में खबर-पख्तूनख्वाह प्रांत से गिरफ्तार किया गया। पंजाब के गुजरावाला जिले का निवासी जफर उन 21 अन्य 21 फरार संदिग्धों में शामिल है जो इस मामले में वांछित हैं। अदालती दस्तावेजों के अनुसार आतंकवादियों को धन मुहैया कराने वाले अन्य संदिग्धों में अहमद एवं अजुम, भगोड़ा घोषित हो चुके मोहम्मद उस्मान जिया, मुख्तार अहमद, अब्बास नासिर और जावेद इकबाल शामिल हैं।

एफआईए जफर की जांच को लेकर और अधिक समय चाहती थी। सूत्र का कहना है कि उसकी चालान पूरी होने के बाद एजेंसी उसे इस मामले के सात अन्य संदिग्धों के साथ अभ्यारोपित करगी। निचली अदालत एक महीने के लंबे अवकाश के बाद इस मामले की सुनवाई सात सितंबर को फिर शुरू करेगी।

बचाव पक्ष के वकीलों का मानना है कि सात अन्य अभियुक्तों के साथ जफर को अभ्यारोपित करने से इस मामले के निष्कर्ष तक पहुंचने में विलंब होगा। यह मामला 2009 से आतंकवाद विरोधी अदालत में लंबित हैं। लखवी के वकील राजा रिजवान अब्बासी ने समाचार पत्र ‘डॉन’ से कहा, ‘आतंकवाद निरोधक कानून-1997 की धारा 21एम के तहत सुनवाई चल रही है, ऐसे में जफर के खिलाफ सात संदिग्धों के साथ मुकदमा चलाया जा सकता है।’