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हज यात्री जबल अराफात की तरफ बढ़े, मंगलवार को होगी शैतान को पत्थर मारने की रस्म

सालाना हज यात्रा के अंतिम चरण में भारत समेत दुनिया भर के 20 लाख से ज्यादा मुसलमानों ने जबल अराफात पर चढ़ना शुरू कर दिया है. 

हज यात्री जबल अराफात की तरफ बढ़े, मंगलवार को होगी शैतान को पत्थर मारने की रस्म
बकरीद हज के समापन के मौके पर मनाई जाती है.(फोटो- Reuters)

जबल अराफात: सालाना हज यात्रा के अंतिम चरण में भारत समेत दुनिया भर के 20 लाख से ज्यादा मुसलमानों ने जबल अराफात पर चढ़ना शुरू कर दिया है. सफेद रंग के बिना सिला अहराम पहने सभी उम्र के हज यात्रियों ने आज सुबह हज के दूसरे दिन अराफात की ओर बढ़ना शुरू किया. यह वही स्थान है, जहां इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद ने हज का आखिरी खुतबा दिया था. अराफात की पहाड़ी को जबल अल-रहमत के तौर पर भी जाना जाता है. यहां रविवार शाम में बारिश हुई थी. सूरज डूबने के बाद हज यात्री नजदीक के मुजदलिफा नाम के इलाके में जाएंगे और और शैतान को प्रतीकात्मक तौर पर पत्थर मारने के लिए कंकड़ियां इकट्ठा करेंगे.

शैतान को कंकड़ी मारने की रस्म कल शुरू होगी. इसी दिन मुसलमान ईद-उल-अजहा या बकरीद मनाते हैं. बकरीद हज के समापन के मौके पर मनाई जाती है. बकरीद के तीन दिन में मुसलमान भेड़ या बकरे की कुर्बानी देते हैं. मुसलमान पैगंबर इब्राहीम की सुन्नत का अनुसरण करते हैं.

मान्यता है कि अल्लाह ने पैगंबर इब्राहीम से कहा था कि वह अपने सबसे प्रिय चीज, अपने बेटे पैगंबर इस्माईल को कुर्बान कर दें. पैगंबर इब्राहीम जब उनकी कुर्बानी दे रहे थे तो वहां दुम्बा आ गया था और उसकी कुर्बानी दे दी गई थी. मुसलमान कुर्बानी के जानवार के गोश्त का एक हिस्सा गरीबों में बांटते हैं, एक हिस्सा अपने रिश्तेदारों को देते हैं और बाकी एक हिस्सा अपने लिए रखते हैं. हज इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है और हर उस मुसलमान के लिए अनिवार्य है जो माली और जिस्मानी तौर पर सक्षम है. 

इनपुट भाषा से भी