विश्वभर के मुस्लिम नेता आतंकी संगठन ISIS के खिलाफ बोलें, यह इस्लाम की बात नहीं करता: बराक ओबामा

अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विश्वभर के इस्लामी नेताओं से आतंकी संगठन आईएसआईएस और इसकी विचारधारा के खिलाफ बोलने की अपील करते हुए कहा कि आईएसआईएस इस्लाम की बात नहीं करता है।

विश्वभर के मुस्लिम नेता आतंकी संगठन ISIS के खिलाफ बोलें, यह इस्लाम की बात नहीं करता: बराक ओबामा

वॉशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विश्वभर के इस्लामी नेताओं से आतंकी संगठन आईएसआईएस और इसकी विचारधारा के खिलाफ बोलने की अपील करते हुए कहा कि आईएसआईएस इस्लाम की बात नहीं करता है।

ओबामा ने ओवल कार्यालय से राष्ट्र को अपने दुर्लभ संबोधन में देशवासियों से भी यह अपील की कि वे धर्म के आधार पर लोगों के खिलाफ भेदभाव न करें। कैलिफोर्निया के सान बर्नार्डिनो में एक कट्टपंथी दंपति द्वारा की गई गोलीबारी में 14 लोगों के मारे जाने के बाद से अमेरिका में रह रहे मुस्लिमों को लोगों के गुस्से का शिकार होने का डर है। ओबामा ने इस घटना को आतंकवादी करतूत करार दिया।

राष्ट्रपति ने दो संदिग्धों- पाकिस्तानी नागरिक ताशफीन मलिक और पाकिस्तानी मूल के उसके पति सैयद रिजवान फारूक का जिक्र करते हुए कहा, अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि हत्यारों को विदेशों में स्थित किसी आतंकवादी संगठन ने ऐसा करने का निर्देश दिया था या वे यहां अमेरिका में किसी बड़े षड़यंत्र का हिस्सा थे।

ओबामा ने कहा, लेकिन यह स्पष्ट है कि उन दोनों ने इस्लाम की उस गलत व्याख्या को अपनाकर कट्टरपंथ के अंधकारमय मार्ग पर चलना शुरू कर दिया था जो अमेरिका और पश्चिम के खिलाफ युद्ध की अपील करती है। उन्होंने असॉल्ट हथियार, गोला बारूद और पाइम बम एकत्र किए थे इसलिए यह एक आतंकवादी कृत्य था जिसका उद्देश्य निर्दोष लोगों की हत्या करना था।

ओबामा ने अपने ओजस्वी भाषण में अमेरिकियों से अपील की कि वे एक दूसरे के खिलाफ खड़े होकर इस युद्ध को अमेरिका और इस्लाम के बीच के युद्ध के रूप में परिभाषित किए जाने की अनुमति नहीं दें। उन्होंने कहा, आईएसआईएल भी यही चाहता है। ओबामा ने कहा, आईएसआईएस इस्लाम की बात नहीं करता। वे ठग और हत्यारे हैं जो मौत के पंथ का हिस्सा हैं। और वे विश्वभर में मौजूद एक अरब से भी से अधिक मुसलमानों का एक बहुत छोटा सा हिस्सा भर हैं। विश्वभर के मुसलमानों में लाखों देशभक्त मुस्लिम-अमेरिकी भी हैं, जो कि उनकी घृणास्पद विचारधारा को खारिज करते हैं। उन्होंने कहा, साथ ही, आतंकवाद से पीड़ितों की बड़ी संख्या विश्व के मुसलमानों की ही है। यदि हमें आतंकवाद को हराने में सफलता हासिल करनी है तो हमें मुस्लिम समुदायों को शक और घृणा की दृष्टि से देखकर अपने से दूर करने के बजाए उन्हें हमारे कुछ सबसे मजबूत सहयोगियों में शामिल करना होगा।ओबामा ने कहा कि इसका यह अर्थ नहीं है कि इस तथ्य से इनकार कर दिया जाए कि कट्टरपंथी विचारधारा कुछ मुस्लिम समुदायों में फैल गई है। यह एक वास्तविक समस्या है जिसका मुसलमानों को बिना कोई बहाना दिए सामना करना चाहिए।

ओबामा ने कहा, यहां और विश्वभर में मुसलमान नेताओं को हमारे साथ मिलकर काम करना जारी रखना होगा ताकि उस घृणास्पद विचारधारा को निर्णायक और स्पष्ट तरीके से खारिज किया जा सके जिसे आईएसआईएस और अलकायदा जैसे संगठन प्रोत्साहित करते हैं और न केवल हिंसा के खिलाफ बल्कि इस्लाम की उन व्याख्याओं के खिलाफ भी बोला जा सके जो धार्मिक सहिष्णुता, आपसी सम्मान और मानवीय प्रतिष्ठता के मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन जिस तरह यह विश्व भर के मुसलमानों की जिम्मेदारी है कि वे कट्टरवाद के मार्ग पर ले जाने वाले गलत विचारों को जड़ से समाप्त करें, उसी तरह यह प्रत्येक धर्म के सभी अमेरिकियों की जिम्मेदारी है कि वे भेदभाव नहीं करें।

ओबामा ने कहा, यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उस लोगों की धार्मिक परीक्षाएं न लें जिन्हें हम इस देश में प्रवेश देते हैं। इन प्रस्तावों को खारिज करना हमारी जिम्मेदारी है कि मुस्लिम-अमेरिकियों के साथ अलग तरीके से व्यवहार किया जाना चाहिए। क्योंकि जब हम इस मार्ग पर जाते हैं, तब हम हारते हैं। इस प्रकार के भेदभाव हमारे मूल्यों के साथ धोखा करते हैं और आईएसआईएस जैसे संगठन इसका फायदा उठाते हैं।