पाकिस्तान चुनाव: आजादी के बाद पहली बार इस गांव की महिलाओं ने किया मतदान

डेली पाकिस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब प्रांत के खुहाब शहर में एक गांव की महिलाएं पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार मतदान कर रही हैं.

पाकिस्तान चुनाव: आजादी के बाद पहली बार इस गांव की महिलाओं ने किया मतदान
पेशावर एक अन्य चुनाव क्षेत्र है जहां महिला मतदाताओं की संख्या बहुत कम दर्ज की गई.(फोटो-REUTERS)

लाहौर: पाकिस्तान में बुधवार को 11वें आम चुनाव में लाखों पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं लेकिन इस बार एक ऐसे गांव की महिलाएं भी वोट डाल रही हैं, जिन्हें आम तौर पर इससे पहले घर से बाहर निकलने की भी इजाजत नहीं थी. डेली पाकिस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब प्रांत के खुहाब शहर में एक गांव की महिलाएं पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार मतदान कर रही हैं. इसके अनुसार, मतदान शुरू होने के बाद महिलाएं मतदान केंद्र पहुंची और अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.

आदिवासी जिले मोहमंद में महिलाएं मतदान केंद्रों तक चल कर गईं.  इसी तरह दीर में भी महिलाओं को मतदान करने की अनुमति थी.  दीर एक समय तालिबान का गढ़ था और वहां महिलाओं को बहुत कम अधिकार प्राप्त थे और उन्हें मतदान करने का अधिकार नहीं था. निचले दीर में बड़ी संख्या में महिला मतदाताओं को देखा गया और सिंध प्रांत के मिथी और बदिन क्षेत्रों में भी ऐसा ही माहौल रहा. पेशावर और बन्नू में महिला मतदाताओं को छोड़कर स्थानीय लोगों के मतदान करने का मामला निर्वाचन आयोग के संज्ञान में आने के बाद पेशावर के बाहरी इलाकों में अचिनी के हाली बांदा क्षेत्र में महिलाओं को मतदान करने की अनुमति प्रदान की गई.

पेशावर एक अन्य चुनाव क्षेत्र है जहां महिला मतदाताओं की संख्या बहुत कम दर्ज की गई.  दोपहर तक अपेक्षित 1,700 मतों की तुलना में मात्र 56 मत पड़े थे. महिलाओं को मतदान का अधिकार देश के अस्तित्व में आने के साथ ही शुरू हो गया था लेकिन उनके द्वारा इस अधिकार का प्रयोग करना दूसरी कहानी है. चुनाव आयोग के सचिव ने कहा कि मतदान की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही नौशेरा सहित कुछ क्षेत्रों में महिलाओं को मतदान करने से रोकने के मामले आने लगे. पंजाब प्रांत के शहर मंडी बहौद्दीन में महिलाओं को उनके मताधिकार का प्रयोग नहीं करने दिया गया.

प्राप्त रिपोर्टो के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुछ हिस्सों में महिलाओं को मतदान करने से रोका गया.  प्रांत के शांग्ला और कोहिस्तान शहरों में किसी महिला ने मतदान नहीं किया. रिपोर्ट्स के अनुसार, महिलाओं के कम मतदान करने के पीछे अलग-अलग मतदान केंद्र नहीं बनाना भी है. चुनाव प्रचार के दौरान सभी राजनीतिक दलों, विशेषकर धार्मिक दलों ने कहा था कि महिलाओं को मतदान करना चाहिए. हालांकि कई क्षेत्रों में बुजुर्गो की सभा 'जिरगा' ने महिलाओं के मतदान न करने का फरमान दिया था. कई क्षेत्रों में मस्जिदों से घोषणा होने के बावजूद महिलाओं ने मतदान नहीं किया.

चुनाव आयोग ने कहा जिस मतदान केंद्र पर महिलाओं का मतदान कुल मतदान का 10 फीसदी से कम रहेगा उनके परिणाम रद्द कर दिए जाएंगे. कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रत्येक मतदान केंद्र पर न्यूनतम 10 फीसदी मतदान अनिवार्य है. गौरतलब है कि इन चुनावों में 10.59 करोड़ लोग मतदान के लिए पंजीकृत हैं, जिनमें 4.7 करोड़ महिलाएं हैं.  इस दौरान 272 राष्ट्रीय और 570 प्रांतीय चुनाव क्षेत्रों में लगभग 12,000 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.