पड़ोसी के बुरे हाल: पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई पाकिस्तान में, SBP की रिपोर्ट में खुलासा

कोरोना संकट (Corona Virus) के बीच पाकिस्तान में आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगे हैं. पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई पाकिस्तान में दर्ज की गई है. यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि पाकिस्तान स्टेट बैंक (SBP) के किया है.

पड़ोसी के बुरे हाल: पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई पाकिस्तान में, SBP की रिपोर्ट में खुलासा
फाइल फोटो

इस्लामाबाद: कोरोना संकट (Corona Virus) के बीच पाकिस्तान में आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगे हैं. पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई पाकिस्तान में दर्ज की गई है. यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि पाकिस्तान स्टेट बैंक (SBP) के किया है. SBP के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 में पाकिस्तान ने दुनिया में सबसे ज्यादा मुद्रास्फीति दर्ज की है. जनवरी में यह 12 सालों के उच्च स्तर के साथ 14.6 प्रतिशत पहुंच गई थी. जिसकी वजह से नीति निर्माताओं को ब्याज दर बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा.

‘द डॉन’ न्यूज ने बताया कि बैंक की अप्रैल के लिए जारी मुद्रास्फीति रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान  ने न केवल विकसित अर्थव्यवस्थाओं बल्कि भारत, चीन, बांग्लादेश जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे अधिक मुद्रास्फीति दर्ज की है.

SBP ने वित्तीय वर्ष के दौरान मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ा दिया, लेकिन इसका परिणाम उल्टा हुआ और मुद्रास्फीति बढ़ गई. निजी कंपनियों ने महंगा कर्ज लेना बंद कर दिया, जिससे औद्योगिक विकास एवं सेवाएं प्रभावित हुईं. जनवरी में महंगाई दर 14.6 पहुंच गई थी, जिसके जवाब में केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को बढ़ाकर 13.25 फीसदी कर दिया. कोरोना संकट के चलते मांग में जब कमी की वजह से मुद्रास्फीति नीचे आई तो SBP को ब्याज दरों में केवल तीन महीनों के भीतर 5.25 प्रतिशत की कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

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द डॉन के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के लिए जुलाई-मई की मुद्रास्फीति स्टेट बैंक के पहले के 11 प्रतिशत के प्रोजेक्शन से नीचे फिसलकर 10.94 प्रतिशत हो गई. जून में इसमें और गिरावट आने की उम्मीद जताई जा रही है. दरअसल, इमरान सरकार ने पिछले दो महीनों में पेट्रोलियम की कीमतों में तीन बार कमी की है, जिसने उत्पादन, परिवहन की लागत को काफी कम कर दिया और इसका असर मुद्रास्फीति पर भी पड़ रहा है. वहीं, व्यापार और औद्योगिक क्षेत्र ने ब्याज दर में कटौती की मांग करते हुए कहा है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए 3-4 ट्रिलियन रुपये के अतिरिक्त निवेश का आवश्यकता है.