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Belgium में अब मुसलमानों को नहीं मिलेगा Halal मीट, कोर्ट ने लगाई कानून पर मुहर

यूरोपीय महाद्वीप के देश बेल्जियम (Belgium) में अब मुसलमानों को हलाल मीट (Halal) और यहूदियों को कोशर मीट (koshar) खाने को नहीं मिलेगा. यूरोपीय संघ की अदालत ने बिना बेहोश किए जानवरों को मारे जाने के बेल्जियम के कानून को सही ठहराया है. पिछले साल लागू हुए इस कानून के बाद से बेल्जियम में रहने वाले मुसलमान भड़के हुए हैं. 

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Dec 22, 2020, 18:48 PM IST

ब्रूसेल्स: यूरोप के प्रभावशाली देश बेल्जियम (Belgium) में अब लोगों को हलाल (Halal) मीट नहीं मिलेगा. पशु अधिकारों की मांग को मानते हुए बेल्जियम की सरकार ने जनवरी 2019 में कानून बनाकर बिना बेहोश किए जानवरों को मारने पर रोक लगा दी थी. जिसे अब यूरोपीय संघ की अदालत (European Union Court) ने भी सही ठहरा दिया है. इसके बाद अब यूरोप के दूसरे देशों में भी इस तरह के कानून बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है. 

 

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हलाल और कोशर तरीके से मारे जाने पर प्रतिबंध

 Ban on killing in halal and kosher ways

बेल्जियम के इस कानून के तहत जानवरों को हलाल (Halal) और कोशर (koshar) तरीके से मारे जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इस कानून में कहा गया कि यदि खाने के लिए किसी जानवर की हत्या की जा रही है तो मारने से पहले उसे बेहोश कर लेना चाहिए, जिससे उसे दर्द का अहसास न हो. 

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मुसलमान और यहूदी कर रहे हैं कानून का विरोध

 Muslims and Jews are opposing the law

बेल्जियम के इस कानून का वहां रहने वाले मुसलमान (Muslims) और यहूदी (Jews) विरोध कर रहे हैं. दोनों मजहबी समुदायों की मान्यता है कि किसी जानवर के कत्ल के समय उसका होश में रहना जरूरी होता है. ऐसा न होने पर उसके मीट को खाना गलत माना जाता है. 

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बेल्जियम की फ्लेमिश संसद ने पास किया था कानून

Belgian Flemish parliament passed law

बेल्जियम (Belgium) की फ्लेमिश संसद में पिछले साल पास हुए इस कानून का कई मुस्लिम संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह कानून उनकी धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों पर हमला है. उनका यह भी आरोप है कि यह कानून क्षेत्र में बढ़ रही आप्रवासी विरोधी भावनाओं की वजह से लाया गया है. 

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यूरोपीय अदालत ने खारिज की मुस्लिमों की याचिका

 European court rejected the petition of Muslims

बेल्जियम (Belgium) के इस कानून के खिलाफ मुस्लिम और यहूदी संगठनों ने यूरोपीय संघ की अदालत (European Union Court) में चुनौती दी थी. जिसे अब कोर्ट ने खारिज कर दिया है. अदालत के इस फैसले का पशु अधिकार समूहों ने स्वागत किया है. 

 

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बेल्जियम ने कड़ाई से लागू किया नया कानून

Belgium strictly enforced new law

बता दें कि ब्रिटेन समेत कई अन्य यूरोपीय देशों में भी जानवरों को बेहोश करके मारे जाने का कानून पहले से लागू है. लेकिन वहां पर ये कानून केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों तक सीमित है. वहीं बेल्जियम के कानून को पूरे देश में सख्ती से लागू किया गया है. इसलिए इस कानून का प्रभाव कहीं ज्यादा व्यापक है.

 

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मुसलमानों को नहीं मिल पाएगा हलाल मीट

 Ban on eating halal meat of Muslims

खास बात ये है कि ब्रिटेन और दूसरे यूरोपीय देशों में मुसलमानों और यहूदियों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जानवरों का कत्ल करके मीट खाने की छूट मिली हुई है. यानी कि वे होश में रहते हुए जानवरों को हलाल और कोशर तरीके से मारकर खा सकते हैं. जबकि बेल्जियम (Belgium) के कानून ने इन दोनों समुदायों को दी ये खास छूट खत्म कर दी है. 

 

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'पशु अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच सही संतुलन'

 'The right balance between animal rights and religious freedom'

यूरोपीय संघ की अदालत (European Union Court) ने मुस्लिम संगठनों की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि बेल्जियम का कानून धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता. कोर्ट ने कहा कि यह कानून पशु अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच उचित संतुलन बनाने वाला लगता है. 

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मुस्लिमों को दूसरे देशों में भी ऐसे ही कानूनों का डर

Muslims fear similar laws in other countries

बेल्जियम (Belgium) के इस कानून ने यूरोप में रहने वाले मुस्लिम और यहूदी संगठनों को भड़का दिया है. इन देशों में पहले से ही मुस्लिम विरोधी भावनाएं उभार हैं. मुसलमानों को डर है कि बेल्जियम की देखादेखी बाकी यूरोपीय देश भी उनके हलाल मीट (Halal) पर रोक लगाने के लिए ऐसा ही कानून बना सकते हैं. वे इस कानून को अब विश्व मानवाधिकार आयोग में चैलेंज करने की योजना बना रहे हैं. 

 

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दर्दनाक होता है जानवरों को मारने का हलाल तरीका

 Halal way of killing animals is painful

हलाल (Halal) तरीके में जानवरों या पक्षियों की गर्दन थोड़ी सी काटकर उन्हें किसी बर्तन में डाल दिया जाता है. इसके बाद उनका खून धीरे-धीरे बहता रहता है और वे तड़प-तड़प कर दम तोड़ जाते हैं. मुसलमान इस तरीके को अपनी मजहबी मान्यता से जोड़ते हैं. जबकि पशु अधिकार संगठन इसे अमानवीय बताकर इस पर रोक लगाने के लिए लंबे समय से अभियान चलाते आ रहे हैं.