कोरोना वायरस के संक्रमण से बचना चाहते हैं तो सबसे पहले इस 'नशे' को छोड़ दें

अगर कोरोना वायरस संक्रमण से बचना चाहते हैं तो धूम्रपान छोड़ देने में ही भलाई है. एक अध्ययन बताता है कि धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को कोविड-19 बीमारी के चपेट में आने का खतरा ज्यादा क्यों होता है.

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचना चाहते हैं तो सबसे पहले इस 'नशे' को छोड़ दें
धूम्रपान छोड़ देने से कम हो सकता है कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा

नई दिल्ली: एक नए अध्ययन से पता चलता है कि धूम्रपान छोड़ देने से गंभीर कोरोना वायरस (coronavirus) संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. क्योंकि सिगरेट का धुआं ज्यादा रिसेप्टर प्रोटीन बनाने के लिए फेफड़ों को फैलाता है और इस प्रोटीन का इस्तेमाल करके वायरस मानव कोशिकाओं में प्रवेश करता है.

डेवलपमेंटल सेल नामक जर्नल में प्रकाशित किए गए जांच परिणाम ये समझा सकते हैं कि धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों को कोविड-19 बीमारी के चपेट में आने का खतरा ज्यादा क्यों होता है.

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अमेरिका में कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लेबोरेटरी के कैंसर जेनेटिसिस्ट और इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक जेसन शेल्टज़र ने कहा- 'हमने पाया कि धूम्रपान ACE2 में उल्लेखनीय वृद्धि को बढ़ा देता है, ये वो प्रोटीन है जिसके जरिए वायरस मानव कोशिकाओं में प्रवेश कर जाता है.'

वैज्ञानिकों के अनुसार, धूम्रपान छोड़ने से गंभीर कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. उन्होंने कहा कि वायरस से संक्रमित ज्यादातर व्यक्ति केवल हल्की बीमारी से पीड़ित होते हैं. हालांकि गंभीर वायरस हमला करें तो कुछ लोगों को गहन देखभाल की भी जरूरत पड़ती है.

विशेष रूप से, दूसरों की तुलना में तीन समूहों में इस बीमारी के गंभीर रूप से विकसित होने की काफी संभावना होती है- पुरुष, बुजुर्ग और धूम्रपान करने वाले.

इन विषमताओं के लिए संभावित स्पष्टीकरण के लिए पहले से प्रकाशित आंकड़ों को देखें तो, वैज्ञानिकों ने ये जानने की कोशिश की कि क्या इन कमजोर समूहों में मानव प्रोटीन से संबंधित कुछ खास विशेषताएं दिखाई देती हैं, जिसपर वायरस संक्रमण के लिए निर्भर करता है.

सबसे पहले उन्होंने, अलग अलग उम्र, स्त्री और पुरुष, और धूम्रपान करने और नहीं करने वाले लोगों के फेफड़ों में जीन गतिविधियों की तुलना की. वैज्ञानिकों ने कहा कि लैब में धुंए में रखे गए चूहों और धूम्रपान करने वाले मनुष्यों में ACE2 बढ़ा हुआ था.

धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों की तुलना में धूम्रपान करने वालों लोगों ने ACE2 का उत्पादन 30-55 प्रतिशत ज्यादा किया.

हालांकि फेफड़ों में ACE2 के स्तर पर उम्र या लिंग का कोई प्रभाव पड़ता है इसका कोई सबूत वैज्ञानिकों को नहीं मिला. उन्होंने कहा कि धुएं के संपर्क में आने के प्रभाव आश्चर्यजनक रूप से बहुत प्रबल थे.

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आंकड़ों के अनुसार, धूम्रपान छोड़ने वाले लोगों के फेफड़ों में ACE2 का स्तर धूम्रपान नहीं करने वालों के ही समान था.

अध्ययन में कहा गया है कि वायुमार्ग में सबसे ज्यादा ACE2 बानाती हैं म्यूकस बनाने वाली कोशिकाएं हैं, जिन्हें गॉब्लेट कोशिकाएं कहा जाता है. धूम्रपान ऐसी कोशिकाओं को बढ़ाने के लिए ही जाना जाता है. इसलिए अगर कोरोना वायरस संक्रमण से बचना चाहते हैं तो धूम्रपान छोड़ देने में ही भलाई है.