ब्रिटेन के जनमत संग्रह पर रूस का प्रभाव साबित करना कठिनः रिपोर्ट

ब्रिटेन की राजनीति पर रूस के प्रभाव के बारे में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आरोपों को साबित करना असंभव नहीं तो कठिन जरूर है कि 2016 के ब्रेक्जिट जनमत संग्रह पर रूस का प्रभाव था.

ब्रिटेन के जनमत संग्रह पर रूस का प्रभाव साबित करना कठिनः रिपोर्ट

लंदनः ब्रिटेन की राजनीति पर रूस के प्रभाव के बारे में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आरोपों को साबित करना असंभव नहीं तो कठिन जरूर है कि 2016 के ब्रेक्जिट जनमत संग्रह पर रूस का प्रभाव था और सरकार इस खतरे को पहचानने में काफी सुस्त थी. संसदीय खुफिया और सुरक्षा समिति की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह आश्चर्यजनक है कि किसी ने भी 2016 के यूरोपीय संघ जनमत संग्रह को रूस के हस्तक्षेप से बचाने का प्रयास नहीं किया और ब्रिटेन के अधिकारियों को 2014 में ही रूस के खतरे को पहचान लेना चाहिए था. रिपोर्ट लिखने वालों ने कहा कि रूस के प्रभाव का आकलन नहीं किया गया. 

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘यह स्पष्ट है कि खतरे को पहचानने में सरकार काफी सुस्त थी और डेमोक्रेटिक नेशनल कमिटी के खिलाफ ‘हैक एंड लीक’ अभियान के बाद ही यह समझ में आया, जबकि इसे 2014 में ही समझ लेना चाहिए था.’’इसमें कहा गया है, ‘‘परिणाम यह हुआ कि सरकार ने 2016 में ब्रिटेन की प्रक्रिया को सुरक्षित करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की.’’

रिपोर्ट के लेखकों ने रूस के खतरे की अनदेखी करने के लिए ब्रिटेन के सरकार की आलोचना की. इसमें कहा गया है कि गंभीरता से प्रश्न पूछे जाने की जरूरत है कि 2014 के स्कॉटलैंड जनमत संग्रह में हस्तक्षेप के सबूत होने और अमेरिकी चुनावों में इस तरह की गतिविधियां होने के बावजूद क्यों मंत्रियों ने इस मुद्दे पर गौर नहीं किया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस ब्रिटेन को पश्चिम में अपने शीर्ष खुफिया लक्ष्य के तौर पर देखता है. इसने कहा कि ब्रिटेन में रूस का प्रभाव नई सामान्य बात है और कहा कि सरकारों ने रूस के इस कृत्य को खुले हाथों से लिया. यह रिपोर्ट छह महीने की देरी से मंगलवार को प्रकाशित हुई. इस तरह की आलोचना हो रही थी कि प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और उनकी कंजरवेटिव पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने के लिए सरकार ने इसे जारी करने में विलंब किया.