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भारतीय मूल के वकील ने लिखा वो 'मेमो', जिसने डोनाल्ड ट्रंप और एफबीआई में बढ़ाई तकरार

पटेल इससे पहले वर्ष 2016 में तब खबरों में आए थे, जब उन्होंने संघीय अदालत में न्याय विभाग के लिए काम करते हुए टाई नहीं पहनी थी.

भारतीय मूल के वकील ने लिखा वो 'मेमो', जिसने डोनाल्ड ट्रंप और एफबीआई में बढ़ाई तकरार
कश्यप पटेल के मेमो में संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) की आलोचना की गई है. (फाइल फोटो)

न्यूयॉर्क: भारतीय मूल के वकील कश्यप 'काश' पटेल ने रिपब्लिकन का वह विवादास्पद मेमो तैयार किया है, जिसमें संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) की आलोचना की गई है. पटेल ने इस दस्तावेज का मसौदा तैयार किया है, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रचार अभियान और रूस सरकार के बीच कथित संबंधों की एफबीआई जांच में अनियमितता बरतने की बात कही गई है. सदन की खुफिया समिति के रिपब्लिकन सदस्यों की ओर से यह मेमो तैयार किया गया है, जिसे ट्रंप की मंजूरी के बाद शुक्रवार (2 फरवरी) को सार्वजनिक किया गया. एफबीआई और डेमोक्रेट सदस्यों ने इस मेमो का विरोध किया है.

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डेली बीस्ट ने इस मेमो से वाकिफ सूत्रों के हवाले से बताया कि पटेल ने इस खुफिया मेमो को पढ़ा और उन्होंने ही इस मेमो का मसौदा तैयार किया था. डेली बीस्ट की रपट के अनुसार, वह पहले न्याय विभाग के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभाग में काम करते थे. वह अप्रैल 2017 में वरिष्ठ आतंकवाद रोधी वकील के तौर पर समिति में शामिल हुए थे. वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, शुक्रवार को जारी इस मेमो ने जहां एक तरफ व्हाइट हाउस और रिपब्लिकन के बीच तो दूसरी तरफ न्याय विभाग और एफबीआई के बीच बढ़ रहे अविश्वास को और बढ़ा दिया है.

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न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘कैश मेमो’ में एफबीआई को नकारात्मक तरीके से दिखाया गया है. उसमें आरोप लगाया गया है कि एजेंसी ने 2016 के राष्ट्रपति चुनावों में जीत हासिल करने वाले डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेटिक पार्टी और इसकी राष्ट्रपति उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन की मदद की.  बहरहाल, पटेल ने मीडिया रिपोर्ट को खारिज करते हुए उसे ‘पूरी तरह गलत’ करार दिया.

खुफिया मामलों पर सदन की स्थायी प्रवर समिति में आतंकवाद निरोधक मुद्दे पर वरिष्ठ वकील पटेल ने बताया, ‘टाइम्स की खबर पूरी तरह गलत है. यह दुख की बात है कि इतना नामचीन मीडिया संगठन तथ्यों को नहीं बताता है, खासकर तब जब उन्होंने अनुरोध किया और उन्हें प्राप्त भी हुआ.’ रिपोर्ट में कहा गया कि मेमो मुख्य रूप से रिपब्लिकन ऑफ कैलिफोर्निया और खुफिया समिति के अध्यक्ष डेविन नून्स के कमेटी स्टाफ सदस्य पटेल की ओर से लिखा गया. कांग्रेस (संसद) सदस्य नून्स के दफ्तर, जहां पटेल काम करते हैं, ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है कि पटेल ने मेमो लिखा है. उनका कहना है कि यह एक सामूहिक और टीम का प्रयास है.

पटेल इससे पहले वर्ष 2016 में तब खबरों में आए थे, जब उन्होंने संघीय अदालत में न्याय विभाग के लिए काम करते हुए टाई नहीं पहनी थी. एबवदीलॉ डॉट कॉम की रपट के अनुसार, आतंकवाद संबंधी उस मुकदमे के दौरान, पटेल मध्य एशिया से आने के तुरंत बाद अदालत चले गए थे, जहां न्यायाधीश लिन ह्यूजेस ने उनके पहनावे को लेकर उनकी आलोचना की थी और उनका पासपोर्ट देखने की मांग की थी.