रूस की पश्चिमी जगत को खुली धमकी, बैलेस्टिक मिसाइल दागी तो माना जाएगा परमाणु हमला

रूस की ये प्रतिक्रिया शुक्रवार को छपी एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद आई है. 

रूस की पश्चिमी जगत को खुली धमकी, बैलेस्टिक मिसाइल दागी तो माना जाएगा परमाणु हमला

मास्को: रूस और पश्चिमी देशों की अदावत दशकों पुरानी है, ऐसे में क्रेमलिन ने पश्चिमी देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि उनके क्षेत्र की ओर आने वाली बैलेस्टिक मिसाइल का जवाब, इसे परमाणु हमला मान कर दिया जाएगा. रूस की ये प्रतिक्रिया शुक्रवार को छपी एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद आई है. इससे पहले रूस के अधिकारिक सैन्य संस्थान की ओर से प्रकाशित अखबार क्रेसनाया (Krasnaya Zvezda) में छपा था कि अमेरिका (US) लंबी दूरी तक मार करने वाले गैर परमाणु हथियारों (non-nuclear weapons) पर काम कर रहा है.  

वॉशिंगटन पोस्ट (Washington Post) में छपे लेख में रूस की परमाणु हमले से संबंधित नीति पर पहले से प्रकाशित एक हिस्से का उल्लेख है, जिसके तहत परमाणु हथियारों के इस्तेमाल सिर्फ उस स्थिति में किया जा सकता है जब उनके देश पर परमाणु या किसी ऐसे हथियार से हमला हो जिससे रूस का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा. इस रिपोर्ट के बाद रूस ने चेतावनी दी है कि अब वो बैलिस्टिक मिसाइल लांच को भी परमाणु हमले के रूप में देखेगा. 

क्रेसनाया (Krasnaya Zvezda) के जरिए दिए गए जवाब में रूस के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों जैसे मेजर जनरल आंद्रेई स्टर्लिन (Andrei Sterlin) और कर्नल एलेक्जेंडर क्रिएपिन (Alexander Khryapin) के हवाले से कहा गया है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आने वाली बैलेस्टिक मिसाइल में एटमी हथियार है या नहीं , किसी भी सूरत में इसे उनके देश पर होने वाला परमाणु हमला ही समझा जाएगा. बयान में आगे ये भी जोड़ा गया कि रूस का सैन्य नेतृत्व अपने देश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. इसलिए किसी भी देश को रूस को लेकर कोई गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए. 

रूस के सैन्य अधिकारियों ने जिस तेवर में ऐसे बयान दिए हैं, उसे रूस की परमाणु पॉलिसी पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या उसमें कोई बदलाव किया गया है. 

परमाणु पॉलिसी के दस्तावेजों में उन हालातों की विस्तृत जानकारी दी गई है, जिनमें परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हो सकता है.  इसमें रूस के अलावा उसके सहयोगी देशों में भी बड़ी तबाही मचाने की नियत से हुए हमले का न्यूक्लियर हथियारों से जवाब देने का जिक्र है.

गौरतलब है कि यूक्रेन संकट के चलते अमेरिका और रूस के रिश्तों में खटास तेज हुई है. वहीं इससे पहले रूस पर 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में दखल देने जैसे आरोप लग चुके हैं. और हाल ही में अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने नवंबर 2020 में होने वाली यूएस प्रेसिडेंट चुनाव में रूस के हस्तपक्षेप संबंधी रिपोर्ट दी है.