इस देश ने बड़े मन से लॉन्च किया पहला स्‍वदेशी स्‍पेस रॉकेट, लेकिन मिली मायूसी
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इस देश ने बड़े मन से लॉन्च किया पहला स्‍वदेशी स्‍पेस रॉकेट, लेकिन मिली मायूसी

दक्षिण कोरिया ने अपने पहले स्वदेशी रॉकेट के साथ एक सैटेलाइट को कक्षा (Orbit) में स्थापित करने की कोशिश की थी जिसमें वो विफल रहा. दक्षिण अफ्रीका इससे पहले भी ऐसी कोशिशें कर चुका है और हर वार विफल ही हुआ है.

इस देश ने बड़े मन से लॉन्च किया पहला स्‍वदेशी स्‍पेस रॉकेट, लेकिन मिली मायूसी

सियोल: दक्षिण कोरिया (South Korea) गुरुवार को अपने पहले स्वदेशी रॉकेट के साथ एक डमी सैटेलाइट को कक्षा (Orbit) में स्थापित करने में विफल रहा, जिससे देश के प्रतिष्ठित ग्लोबल अंतरिक्ष क्लब में शामिल होने की एक दशक लंबी परियोजना को झटका लगा है. राष्ट्रपति मून जे-इन (Moon Jae-in) ने गोहेंग के दक्षिणी तटीय गांव में नारो स्पेस सेंटर (Naro Space Center) में कहा, 'केएसएलवी-द्वितीय रॉकेट, (जिसे नूरी के नाम से भी जाना जाता है) ने 700 किलोमीटर की लक्ष्य ऊंचाई तक उड़ान भरी, लेकिन 1.5 टन के डमी सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा.'

विफलता ने उजागर कीं कई चुनौतियां

साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ने कहा, 'नूरी-हो का परीक्षण-लॉन्च पूरा हो गया था. मुझे इस पर गर्व है. लेकिन अफसोस की बात है कि हम पूरी तरह से लक्ष्य तक नहीं पहुंचे, लेकिन हमने पहले लॉन्च में एक बहुत ही विश्वसनीय उपलब्धि हासिल की.' इस विफलता ने एक सैटेलाइट को कक्षा (Orbit) में भेजने की चुनौतियों को उजागर कर दिया है. 

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साउथ कोरिया ने पहले भी की थी कोशिश

आपको बता दें कि अब तक, केवल 6 देशों - रूस, अमेरिका, फ्रांस, चीन, जापान और भारत ने एक अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान विकसित किया है, जो 1 टन से अधिक वजन का सैटेलाइट ले जा सकता है. मून ने कहा कि दक्षिण कोरिया अगले साल नूरी अंतरिक्ष रॉकेट का एक और प्रक्षेपण करने की योजना बना रहा है. इसके अलावा दक्षिण कोरिया के रॉकेट लॉन्च साल 2009 और 2010 में भी विफल रहे हैं. साथ ही साल 2013 में, दक्षिण कोरिया ने सफलतापूर्वक अपना पहला नारो अंतरिक्ष रॉकेट लॉन्च किया था. हालांकि, इसका पहला चरण रूस में बनाया गया था.

नूरी रॉकेट कैसे काम करता है?

तीन चरणों वाला नूरी रॉकेट अपने पहले चरण में चार 75-टन तरल इंजन के क्लस्टरिंग का उपयोग करता है. दूसरे चरण में 75-टन का तरल इंजन और तीसरे चरण में 7-टन का तरल इंजन इस्तेमाल करता है. दक्षिण कोरिया ने 2010 से तीन चरणों वाली नूरी के निर्माण में लगभग 2 ट्रिलियन वोन (1.8 अरब डॉलर) का निवेश किया है. हालांकि इस लॉन्च की पूरी प्रक्रिया को डिजाइन, उत्पादन, टेस्ट और लॉन्च ऑपरेशन सहित घरेलू तकनीक के साथ अंजाम दिया गया.

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उत्तर कोरिया से तनाव के बीच हुआ परीक्षण

गौरतलब है कि यह रॉकेट लॉन्च उत्तर कोरिया द्वारा मंगलवार को एक नई पनडुब्बी से लॉन्च की गई बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) की परीक्षण-फायरिंग पर तनाव के बीच हुआ, जो उत्तर द्वारा मिसाइल लॉन्च की एक सीरीज में नई है.

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