श्रीलंका: गोतबया राजपक्षे होंगे नए राष्ट्रपति, सजित प्रेमदासा को बड़े अंतर से हराया

गोतबया राजपक्षे को 30 लाख से ज्यादा वोट मिले हैं उनकी पार्टी का वोट शेयर लगभग 53 प्रतिशत रहा.

श्रीलंका: गोतबया राजपक्षे होंगे नए राष्ट्रपति, सजित प्रेमदासा को बड़े अंतर से हराया
गोतबया राजपक्षे श्रीलंका के नए राष्ट्रपति चुने गए

कोलंबो: श्रीलंका (Sri Lanka) के राष्ट्रपति चुनाव में 'श्रीलंका पोडुजाना पेरामुना पार्टी' (एसएलपीपी) के उम्मीदवार और पूर्व रक्षा सचिव गोतबया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) ने जीत दर्ज की. गोतबया श्रीलंका के आठवें राष्ट्रपति चुने गए. उन्होंने सत्तारूढ़ 'न्यू डेमोक्रेटिक फ्रंट' (एनडीएफ) के उम्मीदवार सजित प्रेमदासा (Sajith Premadasa) को बड़े अंतर से हरा दिया है.गोतबया राजपक्षे को चुनाव में श्रीलंका के बहुसंख्यक सिंहली समुदाय से भरपूर सपोर्ट मिला, जिसके चलते उन्हें 30 लाख से ज्यादा वोट मिले हैं और उनकी पार्टी का वोट शेयर लगभग 53 प्रतिशत रहा.

आपको बता दें कि साल 2009 में श्रीलंका में गृहयुद्ध के आखिरी दौर में तमिल विद्रोह को कुचलने में पूर्व रक्षा सचिव गोतबया राजपक्षे की भूमिका अहम रही थी. माना जा रहा है कि इसी के उन्हें बहुसंख्यक सिंहली समुदाय के वोट बड़ी संख्या में मिले हैं, लेकिन वहीं दूसरी तरफ उन्हें चुनाव में तमिल पार्टियों के कड़े विरोध का सामना भी करना पड़ा है. 

सत्तारूढ़ पार्टी 'न्यू डेमोक्रेटिक फ्रंट' के उम्मीदवार सजित प्रेमदासा ने चुनाव में अपनी हार स्वीकारते हुए गोतबया राजपक्षे को जीत की बधाई दी और कहा 'जनता ने जो निर्णय दिया है मैं उसको स्वीकार करता हूं. गोतबया राजपक्षे को राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए बहुत-बहुत बधाई, मैं आशा करता हूं जिस प्रकार राष्ट्रपति महिन्दा राजपक्षे ने अपने कार्यकाल में देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया आप भी वैसा ही काम करेंगे. मैं आशा करता हूं चुनाव के परिणाम आने के बाद भी देश में शांति बनी रहेगी. मैं अपनी पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं और जिन्होनें मुझे वोट दिया मैं उनका भी धन्यवाद करता हूं.'

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आपको बता दें कि कल 16 नवंबर के दिन श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डाले गए थे. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार कुल 80 प्रतिशत मतदान हुआ था. श्रीलंका में वोटरों की कुल संख्या 1 करोड़ 59 लाख के करीब है.

इसी साल अप्रैल में इसाई समुदाय के त्योहार 'ईस्टर' रविवार के दिन सीरियल ब्लास्ट के बाद ये चुनाव हो रहे हैं. इन धमाकों की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) ने ली थी. इन धमाकों की वजह से सत्ताधारी पार्टी 'न्यू डेमोक्रेटिक फ्रंट' की बहुत किरकिरी हुई थी.