Switzerland में Burqa Ban करने की तैयारी, Referendum में 51 प्रतिशत लोगों ने किया प्रतिबंध का समर्थन

Burqa Ban in Switzerland: कुछ वक्त पहले एक रिसर्च में दावा किया गया था कि स्विट्जरलैंड में कोई महिला बुर्का नहीं पहनती, सिर्फ 30 फीसदी महिलाएं केवल नकाब लगाती हैं. इसके बावजूद मुस्लिम संगठन प्रतिबंध का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार के इस कदम से स्विट्जरलैंड की छवि इस्लाम विरोधी देश की बन जाएगी.   

Switzerland में Burqa Ban करने की तैयारी, Referendum में 51 प्रतिशत लोगों ने किया प्रतिबंध का समर्थन
फाइल फोटो: रॉयटर्स

ज्यूरिक: स्विट्जरलैंड (Switzerland) की सरकार बुर्का (Burqa) और नकाब (Face Covering) पर प्रतिबंध लगाने जा रही है. इस संबंध में रविवार को कराए गए जनमत संग्रह (Referendum) में अधिकांश लोगों ने बुर्का पर बैन के पक्ष में मतदान किया. जनमत संग्रह में देशवासियों से पूछा गया था कि क्या बुर्का और नकाब पर बैन लगाया जाना चाहिए? जिसके जवाब में करीब 51 फीसदी लोगों ने प्रतिबंधित का समर्थन किया. लिहाजा अब सरकार जल्द ही आधिकारिक तौर पर बुर्का और नकाब पहनने पर रोक की घोषणा कर सकती है. 

इसलिए कराया Referendum

स्विट्जरलैंड में लगभग एक महीने सार्वजनिक जगहों पर बुर्का पहनने या किसी अन्य तरह से चेहरा ढंकने (Face Covering) पर रोक लगाने का प्रस्ताव लाया गया था, जिस पर कई संगठनों ने आपत्ति जताई थी. विरोध करने वालों में मुस्लिम संगठन (Muslim Organisation) भी शामिल थे. इसे देखते हुए सरकार ने जनता की राय जानने का फैसला लिया और रविवार को जनमत संग्रह कराया गया. करीब 51 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि बुर्का और नकाब आदि पर प्रतिबंध लगाया जाए.

ये भी पढ़ें -Nepal के पीएम KP Sharma Oli को नहीं है चीन के टीके पर भरोसा, लगवाई भारतीय Corona Vaccine

कोई महिला नहीं पहनती Burqa

यूनिवर्सिटी ऑफ लूसर्न ने साल की शुरुआत में यह दावा किया था कि स्विट्जरलैंड में कोई महिला बुर्का नहीं पहनती, जबकि सिर्फ 30 फीसदी महिलाएं केवल नकाब लगाती हैं. बता दें कि स्विट्जरलैंड में 5.2 फीसदी आबादी मुस्लिम है. यहां रहने वाले अधिकांश मुस्लिम, बोस्निया, तुर्की और कोसोवो से हैं. इन देशों की मुस्लिम परिवारों की महिलाएं नकाब और बुर्का पहनती हैं. यही वजह है कि इस जनमत संग्रह को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताया जा रहा है.

Swiss Party ने चलाया अभियान

राइट विंग की स्विस पीपल्स पार्टी (Swiss People's Party-SVP) ने बुर्का और फेस कवरिंग के खिलाफ कैंपेन भी चलाया है. जनमत संग्रह से पहले पार्टी की तरफ से जगह-जगह बिलबोर्ड लगाए गए थे, जिनमें बुर्का पहने महिला की तस्वीर के साथ अतिवाद को रोकने की बात कही गई थी. SVP के सांसद और रेफरेंडम कमेटी के सदस्य वाल्टर वॉबमन (Walter Wobmann) ने लोगों से खुलकर अपनी राय व्यक्त करने की अपील करते हुए कहा था कि स्विट्जरलैंड में चेहरा दिखाने की परंपरा है, ये हमारी मूलभूत स्वतंत्रता का संकेत है.

‘यह Muslims की आजादी पर अंकुश’

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फेस कवरिंग संबंधी प्रस्ताव में इस्लाम और मुस्लिम महिलाओं का सीधे तौर पर जिक्र नहीं है. प्रस्ताव में यह कहा गया है कि हिंसक प्रदर्शनकारियों और मास्क पहने बदमाशों पर लगाम लगाने के मकसद से फेस कवरिंग पर बैन जरूरी है. हालांकि, मुस्लिम संगठन इसे बुर्का बैन ही करार दे रहे हैं और उनका कहना है कि यह मुस्लिम महिलाओं की आजादी पर अंकुश है. यह प्रस्ताव उन्हें अपने धर्म के अनुसार बुर्का पहनने से रोकता है.

यहां पूरी तरह से है Ban

फ्रांस ने साल 2011 में चेहरे को पूरी तरह से ढंकने पर बैन लगा दिया था. डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड्स और बुल्गेरिया में सार्वजनिक जगहों पर बुर्का पहनने पर रोक है. जबकि स्विट्जरलैंड में रहने वाले मुस्लिमों का मानना है कि बुर्का बैन पूरी तरह गलत है और इससे दुनिया में यह संदेश जाएगा कि स्विट्जरलैंड इस्लाम विरोधी देश है. उनका यह भी कहना है कि सरकार प्रतिबंध लगाकर सरकार उनके अधिकारों को सीमित करना चाहती है. 

VIDEO

Zee News App: पाएँ हिंदी में ताज़ा समाचार, देश-दुनिया की खबरें, फिल्म, बिज़नेस अपडेट्स, खेल की दुनिया की हलचल, देखें लाइव न्यूज़ और धर्म-कर्म से जुड़ी खबरें, आदि.अभी डाउनलोड करें ज़ी न्यूज़ ऐप.