अब Switzerland में बुर्का Ban करने की तैयारी, जल्द कराया जाएगा जनमत संग्रह

स्विट्जरलैंड के फेस कवरिंग पर बैन संबंधी प्रस्ताव में इस्लाम और मुस्लिम महिलाओं का सीधे तौर पर जिक्र नहीं है. प्रस्ताव में यह कहा गया है कि हिंसक प्रदर्शनकारियों और मास्क पहने बदमाशों पर लगाम लगाने के मकसद से फेस कवरिंग पर बैन जरूरी है. लेकिन मुस्लिम संगठन इसे बुर्का बैन करार दे रहे हैं.   

अब Switzerland में बुर्का Ban करने की तैयारी, जल्द कराया जाएगा जनमत संग्रह
फाइल फोटो: रॉयटर्स

ज्यूरिक: स्विट्जरलैंड (Switzerland) में सार्वजनिक स्थलों पर बुर्का पहनने या किसी अन्य तरह से चेहरा ढंकने (Face Covering) पर रोक लगाने की तैयारी चल रही है. यदि ऐसा होता है, तो मुस्लिम देशों का भड़कना तय है. रविवार को स्विट्जरलैंड में इस संबंध में जनमत संग्रह कराया जाने वाला है और माना जा रहा है कि अधिकांश लोग फेस कवरिंग पर बैन के पक्ष में वोट करेंगे. वहीं, इस प्रस्तावित बैन को लेकर मुसलमान (Muslims) अभी से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं.     

‘हमारे यहां Face दिखाने की परंपरा’

राइट विंग की स्विस पीपल्स पार्टी (Swiss People's Party-SVP) फेस कवरिंग के खिलाफ कैंपेन भी चला रही है. पार्टी की तरफ से जगह-जगह बिलबोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें बुर्का पहने महिला की तस्वीर के साथ अतिवाद को रोकने की बात कही गई है. SVP के सांसद और रेफरेंडम कमेटी के सदस्य वाल्टर वॉबमन (Walter Wobmann) ने इस संबंध में कहा कि स्विट्जरलैंड में चेहरा दिखाने की परंपरा है, ये हमारी मूलभूत स्वतंत्रता का संकेत है.

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प्रस्ताव में Islam का जिक्र नहीं

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फेस कवरिंग संबंधी प्रस्ताव में इस्लाम और मुस्लिम महिलाओं का सीधे तौर पर जिक्र नहीं है. प्रस्ताव में यह कहा गया है कि हिंसक प्रदर्शनकारियों और मास्क पहने बदमाशों पर लगाम लगाने के मकसद से फेस कवरिंग पर बैन जरूरी है. हालांकि, मुस्लिम संगठन इसे बुर्का बैन ही करार दे रहे हैं और उनका कहना है कि यह मुस्लिम महिलाओं की आजादी पर अंकुश है. यह प्रस्ताव उन्हें अपने धर्म के अनुसार बुर्का पहनने से रोकता है.

Ban से बढ़ सकती है परेशानी 

अगर बैन लगता है तो स्विट्जरलैंड से मुसलमानों की नाराजगी और बढ़ सकती है. क्योंकि साल 2009 में स्विट्जरलैंड ने नई मीनारें बनाने पर रोक लगाने के लिए मतदान किया था. इसके अलावा, देश में दो स्थानों पर पहले से ही फेस कवरिंग पर बैन है. ऐसे में यदि चेहरा ढंकने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगता है, तो मुस्लिमों का भड़कना तय है. साथ ही स्विट्जरलैंड की सरकार को मुस्लिम देशों के विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है.

समर्थन और विरोध में अलग-अलग तर्क

वॉबमैन ने आगे कहा कि ये वोटिंग इस्लाम के खिलाफ नहीं है, लेकिन बुर्का पहनना कट्टर और इस्लाम की राजनीति का हिस्सा बन गया है. उन्होंने आगे कहा कि यूरोप में इस्लाम का राजनीतिकरण तेजी से बढ़ा है जिसकी स्विट्जरलैंड में कोई जगह नहीं है. वहीं, मुस्लिम संगठनों का कहना है कि बैन से दुनिया में स्विट्जरलैंड की छवि इस्लाम विरोधी की बनेगी. एक मुस्लिम महिला ने प्रस्तावित प्रतिबंध का विरोध करते हुए कहा कि ऐसी समस्या के नाम पर बुर्का बैन किया जा रहा है, जो है ही नहीं. मुसलमानों का यह भी कहना है कि दक्षिणपंथी पार्टियां मतदाताओं का समर्थन जुटाने के लिए उन्हें दुश्मन की तरह पेश कर रही हैं.  

यहां है पूरी तरह Ban

फ्रांस ने साल 2011 में चेहरे को पूरी तरह से ढंकने पर बैन लगा दिया था. डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड्स और बुल्गेरिया में सार्वजनिक जगहों पर बुर्का पहनने पर रोक है. यूनिवर्सिटी ऑफ लूसर्न के मुताबिक, स्विट्जरलैंड में कोई बुर्का नहीं पहनता है, जबकि सिर्फ 30 फीसदी महिलाएं केवल नकाब लगाती हैं. बता दें कि स्विट्जरलैंड में 5.2 फीसदी आबादी मुस्लिम है.  

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