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सीरियाई कुर्दो ने की अमेरिका से अपील, कहा - तुर्की पर संघर्ष विराम का दबाव डालिए

कुर्दो के नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) ने शनिवार को अमेरिका से आग्रह किया कि वह तुर्की पर दबाव डाले कि वह पांच दिन के संघर्ष विराम का पालन करे.

सीरियाई कुर्दो ने की अमेरिका से अपील, कहा - तुर्की पर संघर्ष विराम का दबाव डालिए
कुर्दो को तुर्की आतंकवादी मानता है.

दमिश्क: कुर्दो के नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (SDF) ने शनिवार को अमेरिका से आग्रह किया कि वह तुर्की (Turkey) पर दबाव डाले कि वह पांच दिन के संघर्ष विराम का पालन करे और उत्तरी सीरियाई शहर रास-अल-ऐन से पीड़ित नागरिकों के निकलने के लिए मानवीय गलियारा खोले. समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, एसडीएफ कमांडर, मजलूम आब्दी ने एक बयान में कहा कि उनका पक्ष गुरुवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस के बीच हुए 120 घंटे के संघर्ष विराम समझौते का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है.

आब्दी ने कहा, "तुर्की पक्ष ने संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए अपना हमला जारी रखा है."

उन्होंने कहा कि इसने संघर्ष विराम की घोषणा के 30 घंटे बीत जाने के बावजूद रास अल-ऐन/सारी कान्येह शहर में फंसे घायलों और नागरिकों को निकालने के लिए एक सुरक्षित गलियारा भी नहीं खोलने की अनुमति दी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की घोषणा के तुरंत बाद 9 अक्टूबर को तुर्की ने उत्तरपूर्वी सीरियाई सीमा पर हमला बोल दिया. तुर्की द्वारा सीरियाई आक्रमण शुरू करने के कारणों में से एक यह था कि तुर्की के अधिकारी कुर्दो से मुक्त एक सुरक्षित क्षेत्र सुनिश्चित करना चाहते हैं जो उत्तरी सीरिया में करीब 32 किलोमीटर तक फैला होगा. कुर्दो को तुर्की आतंकवादी मानता है.

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साथ ही तुर्की इस क्षेत्र में लगभग 40 लाख सीरियाई शरणार्थियों को आसरा देना चाहता है. अंकारा सरकार अपनी सीमा के पास कुर्द अधिकार वाले क्षेत्र के निर्माण से बचना चाहती है. आब्दी ने पेंस और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का जिक्र करते हुए कहा, "संघर्ष विराम लागू करने और गलियारे को खोलने के लिए तुर्की को बाध्य करना अमेरिका की जिम्मेदारी है." उन्होंने कहा कि अमेरिकी पक्ष के साथ निरंतर संवाद और इस समस्या को हल करने के लिए उनके द्वारा किए गए वादे के बावजूद, इस संबंध में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है.