पासपोर्ट को लेकर ताईवान ने उठाया ये कदम, अब चीन से अलग होगी पहचान!

ताईवान यानी रिपब्लिक ऑफ चाइना ने अपने पासपोर्ट में बदलाव लाने की घोषणा की है, साथ ही अपने नए पासपोर्ट की पहल झलक भी दुनिया को दिखा दी है. इस नए पासपोर्ट में ताईवान नागरिकों की पहचान अलग रहेगी.

पासपोर्ट को लेकर ताईवान ने उठाया ये कदम, अब चीन से अलग होगी पहचान!

ताईपेई: ताईवान यानी रिपब्लिक ऑफ चाइना ने अपने पासपोर्ट में बदलाव लाने की घोषणा की है, साथ ही अपने नए पासपोर्ट की पहल झलक भी दुनिया को दिखा दी है. इस नए पासपोर्ट में ताईवान नागरिकों की पहचान अलग रहेगी. साथ ही इस पासपोर्ट में ताईवान को वरीयता दी गई है.

कन्फ्यूजन दूर करने की कोशिश
ताईवान और चीन के बीच विवाद काफी पुराना है. लेकिन कोरोना महामारी और उससे पहले चीन की तरफ से उसकी संप्रभुता पर हमले की कोशिशों के बीच ताईवान ने पासपोर्ट को लेकर ये कदम उठाया है. अभी तक ताईवान के पासपोर्ट पर सामने बड़े शब्दों में 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' लिखा रहता था,जबकि 'ताईवान' नीचे की तरफ अंकित रहता था. इसकी वजह से दुनिया से दूसरे देशों में ताईवानी नागरिकों को समस्याओं का सामना करना पड़ता था.

'रिपब्लिक ऑफ चाइना' शब्द हटाया
ताईवान जनवरी से नए पासपोर्ट जारी करेगा, जिसमें अंग्रेजी में लिखा 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' शब्द नहीं रहेगा. अंग्रेजी में सिर्फ ताईवान लिखा रहेगा. हालांकि चीनी भाषा में रिपब्लिक ऑफ चाइना शब्द पहले की तरह मौजूद रहेगा. ताईवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने कहा कि नए पासपोर्ट से ताईवानी नागरिकों की पहचान साफ हो सकेगी और उन्हें गलती से 'चीनी नागरिक' माने जाने से बचाया जा सकेगा.

वुहान वायरस के सामने आने के बाद से नागरिकों को हुई पहचान संबंधी दिक्कत
जोसेफ वू ने कहा कि वुहान वायरस यानी कोरोना महामारी के फैलने के बाद से पूरी दुनिया में चीनी नागरिकों को शक की नजरों से देखा जाने लगा. इसीलिए हमने नए पासपोर्ट में ताईवानी पहचान को ऊपर रखा है. ताकि गलती से भी लोग ये न समझें कि हम चीनी नागरिक हैं.

एयरलाइन का नाम बदलने पर भी हो रहा विचार
अभी ताईवानी एयरलाइन का नाम 'चाइना एयरलाइन' है. नाम की वजह से लोगों में ये भ्रम होता है कि ये चीनी एयरलाइन कंपनी है. ऐसे में ताईवानी सरकार एयरलाइन का नाम बदलने पर भी विचार कर रही है.

चीन और ताईवान में क्या है लड़ाई?
ताईवान में चीन की राष्ट्रवादी लोकतांत्रिक सरकार है. दरअसल, ताईवान का असली नाम 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' है. 1949 का युद्ध कम्युनिस्ट पार्टी से हारने के बाद चीन की सरकार ताईवान निर्वासित हो गई. उसके बाद से ताईवान खुद को लोकतांत्रिक चीन कहता है, जबकि मेनलैंड चाइना खुद को पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना कहता है. ताईवान खुद की लोकतांत्रिक पहचान को दुनिया के सामने रखता है और एक दिन पूरे चीन को लोकतांत्रिक छतरी के नीचे लाने की बात करता है, तो पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ताईवान को चीन का हिस्सा बताता है. मौजूदा समय में ताईवान से जो देश संबंध रखता है, चीन उससे संबंध नहीं रखता. हालांकि ताईवान का अमेरिका, भारत, ब्रिटेन समेत कई देशों के साथ अनौपचारिक संबंध हैं और काउंसलेट के माध्यम से ये संबंध कायम हैं. चूंकि दुनिया में अधिकतर देशों ने चीन के असली कर्ताधर्ता के तौर पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को ही मान्यता दे दी है. इसलिए ताईवान बस समंदर के बीच में ही सिमट कर रह गया है और चीन जब तक ताईवान को हड़पने की बात करता रहता है.