डिप्रेशन अब मानसिक नहीं, मानी जाएगी शारीरिक समस्‍या; ब्‍लड टेस्‍ट से चलेगा पता!
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डिप्रेशन अब मानसिक नहीं, मानी जाएगी शारीरिक समस्‍या; ब्‍लड टेस्‍ट से चलेगा पता!

अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ब्लड टेस्ट लॉन्च किया है जो किसी व्यक्ति में डिप्रेशन और बाईपोलर डिसऑर्डर के बारे में बता सकता है.

डिप्रेशन अब मानसिक नहीं, मानी जाएगी शारीरिक समस्‍या; ब्‍लड टेस्‍ट से चलेगा पता!

नई दिल्ली: जब आपके शरीर में कहीं चोट लगती है या फिर आपको कोई इंफेक्शन होता है तो आपका डॉक्टर आपसे कहता है कि जाकर Xray और Blood Test करा लीजिए. फिर वो Xray, MRI और Blood Test की रिपोर्ट देखकर आपका इलाज शुरू करता है, क्योंकि उसे समस्या के बारे में सही-सही जानकारी मिल चुकी होती है. लेकिन अगर किसी के मन में चोट लगी हो यानी अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन की वजह से उदास और परेशान हो तो इस समस्या का पता लैब में की गई किसी जांच से नहीं लग पाता, सिर्फ मनोवैज्ञानिक ही ऐसे व्यक्ति की मदद कर पाते हैं. लेकिन कई बार उन्हें भी पुख्ता तौर पर ये पता नहीं चलता कि असली समस्या क्या है और इसकी वजह क्या है.

अमेरिका ने किया नया आविष्कार

लेकिन अब अमेरिका के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ब्लड टेस्ट लॉन्च किया है जो किसी व्यक्ति में डिप्रेशन और बाईपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder) के बारे में बता सकता है. ठीक वैसे ही जैसे एक साधारण से ब्लड टेस्ट के जरिए डायबिटीज, थाइरोइड, कॉलेस्ट्रोल जैसी कई बीमारियों और इंफेक्शन का पता लगाया जाता है. यानी अब तक जिस डिप्रेशन को हम मनोवैज्ञानिक बीमारी मानते थे, अब उसे एक शारिरिक समस्या मानकर उसका इलाज किया जा सकेगा.

महामारी से कम नहीं मानसिक रोग

पूरी दुनिया में इस समय 80 करोड़ से ज्यादा लोग किसी ना किसी मानसिक समस्या का शिकार हैं, जबकि भारत में ऐसे लोगों की संख्या 19 करोड़ से ज्यादा है. यानी मानसिक रोग किसी महामारी से कम नहीं है लेकिन फिर भी इसका पता लगाना और इसका इलाज करना आज भी कई रोगों के मुकाबले बहुत मुश्किल है. पूरी दुनिया में अब तक 26 करोड़ लोगों को कोरोना का संक्रमण हो चुका है और इससे करीब 52 लाख लोगों की मौत हो चुकी है. ये संक्रमण सिर्फ 2 साल पहले दुनिया के सामने आया था और कुछ ही दिनों में बाजार में ऐसी तकनीक भी आ गई जिससे कुछ ही मिनटों में शरीर में कोरोना का पता लगाया जा सकता है. 

जबकि मानसिक रोगों का जिक्र आज से 4 हजार वर्ष पहले मेसोपोटामिया (Mesopotamia) में लिखी गई किताबों में भी मिलता है और आज की तारीख में इससे हर साल 80 लाख से ज्यादा लोगों की मौत भी हो जाती है. लेकिन फिर भी 4 हजार वर्षों तक वैज्ञानिक कोई ऐसी तकनीक नहीं खोज पाए जो डिप्रेशन और उदासी की सही पहचान कर पाए. लेकिन अब इस दिशा में अमेरिका में एक क्रांतिकारी अविष्कार हुआ है.

डिप्रेशन औप बाइपोलर डिसऑर्डर में फर्क

अमेरिका की Indiana University के School of Medicine ने दावा किया है कि एक साधारण से ब्लड टेस्ट के जरिए डिप्रेशन और Bipolar Disorder का पता लगाया जा सकता है. Depression और Bipolar Disorder में फर्क ये है कि Depression में मन लगातार उदास बना रहता है, थकावट होती, शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती है और मृत्यु के विचार आने लगते हैं. जबकि Bipolar Disorder जिसे Mania भी कहा जाता है, उसके मरीज को अपने शरीर में जरूरत से ज्यादा ऊर्जा महसूस होती है, उसकी नींद कम हो जाती है और उसे लगता है कि वो दुनिया में कोई भी काम कर सकता है, वो बहुत ज्यादा बातें करने लगता है और वो उद्धेश्य हीन तरीके से काम करने लगता है.

अब अमेरिका में होगी मानसिक रोग की पहचान

Indiana University के वैज्ञानिकों ने जिस ब्लड टेस्ट का अविष्कार किया है वो इन दोनों स्थितियों का पता लगा सकता है और इनमें अंतर भी कर सकता है. इस Test को 15 वर्षों के रिसर्च के बाद तैयार किया है और इसे अब अमेरिका में मान्यता भी मिल चुकी है, यानी वहां डॉक्टर उन मरीजों को ये टेस्ट कराने के लिए कह सकते हैं जिन्हें Depression या Mania होने की आशंका है.

कैसे होगी पहचान?

अब ये समझिए कि आपके खून की कुछ बूंदें ये कैसे बताएंगी कि आपको डिप्रेशन है या नहीं? दरअसल जब कोई व्यक्ति Depression या Mania का शिकार होता है तो उसके Biological Markers में बदलाव आ जाता है. जब डॉक्टर आपके Blood Pressure की जांच करता है, आपकी Pulse देखता है, ECG करता है या आपसे ब्लड टेस्ट कराने के लिए कहता है तो वो असल में आपके Biological Markers की ही जांच कर रहा होता है. अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग Biological Markers की जांच की जाती है और अगर ये Markers सामान्य से ऊपर या नीचे होते हैं तो डॉक्टर आपको ये बता पाता है कि आपको कौन सा रोग है.

डिप्रेशन होने पर शरीर में होते हैं ये बदलाव

वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि जब किसी व्यक्ति को डिप्रेशन होता है तो उसके शरीर का RNA,DNA, प्रोटीन और Hormones भी प्रभावित होते हैं, जिसका पता अलग-अलग 12 Biological markers से लगाया जा सकता है. एक बार इन markers में आने वाले बदलाव का पता लग गया तो डिप्रेशन के मरीज को सटीक दवाएं दी जा सकती हैं क्योंकि अब तक डिप्रेशन और Mania का इलाज करने के लिए डॉक्टर मरीजों को अलग-अलग दवाएं देकर देखते हैं कि उन पर कौन सी दवा असर कर रही है, फिर भी कई बार वर्षों तक मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पाता. लेकिन अब इस नए Blood Test की वजह से डॉक्टर्स मरीजों को वही दवाएं और इलाज दे पाएंगे जिनकी उन्हें जरूरत है.

इसका मतलब कि अब तक जिसे हम मनोवैज्ञानिक बीमारी मानते थे, अब उसे एक शारिरिक समस्या मानकर उसका इलाज किया जा सकेगा.

कोरोना के लिए ब्लड टेस्ट क्यों नहीं?

आप सोच रहे होंगे कि वैज्ञानिक ब्लड टेस्ट के जरिए डिप्रेशन का पता लगाने में तो सक्षम हो गए हैं. लेकिन खून की जांच के जरिए कोरोना के संक्रमण का पता क्यों नहीं लगाया जा सकता. इसकी वजह ये है कि कोरोना एक ऐसा वायरस है जो शरीर की श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है. ये मुंह या नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और गले के रास्ते फेफड़ों तक पहुंच जाता है. लेकिन ये वायरस खून में जाकर नहीं मिलता. 

इसलिए मुंह-नाक से लिए जाते हैं कोरोना सैंपल्स

इसलिए इसके RT-PCR टेस्ट के लिए नाक और मुंह से Swab के जरिए सैंपल्स लिए जाते हैं, इस दौरान नाक और मुंह में मौजूद म्यूकस (Mucus) Swab से चिपक जाते हैं और फिर लैब में RT-PCR टेस्ट के जरिए इन सैंपल्स में कोरोना की मौजूदगी का पता लगाया जाता है. हालांकि जब कोविड का संक्रमण होता है तो शरीर में Inflamation यानी सूजन बढ़ जाती है और इसका पता Blood Test के जरिए लगाया जा सकता है, जिसे CRP Test कहते हैं. CRP का मतलब है c-reactive protein, लेकिन समस्या ये है कि अगर आपको जरा सी चोट भी लग जाए या शरीर में कोई और इंफेक्शन हो जाए तब भी CRP का स्तर बढ़ जाता है. इसलिए ये कहना मुश्किल होता है कि इसकी वजह कोरोना है या कुछ और. लेकिन RT-PCR टेस्ट से स्थिति साफ हो जाती है.

हालांकि Covid का पता लगाने के लिए Antigen टेस्ट भी किया जाता है, जिसके लिए आपके खून का सैंपल लिया जाता है. लेकिन इससे Active Infection का पता नहीं चलता बल्कि सिर्फ ये पता चलता है कि आपके शरीर में कोरोना के खिलाफ Anti Bodies बन चुकी है या नहीं.

लेकिन अब वैज्ञानिक लैब में आपके खून की जांच करके डिप्रेशन का पता ज़रूर लगा सकते हैं, आज हमने इस बारे में कुछ डॉक्टरों और Lab Experts से भी बात की..जिनका मानना है कि अगर मानसिक रोगों का इलाज भी इसे  Biological समस्या मानकर किया जाने लगा तो इससे सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि लोग डिप्रेशन और Mania के लिए खुद को दोषी मानना छोड़ देंगे.

डिप्रेशन एक चिंताजनक समस्या

हमारे समाज में जब कोई व्यक्ति डिप्रेशन में जाता है तो उसके आस पास के लोग अक्सर इसे एक रोग मानने से ही इनकार कर देते हैं और कहने लगते हैं कि इतना सोचा मत करो, सकारात्मक सोचो, अच्छी बातें किया करो, कहीं घूम आओ तो सब ठीक हो जाएगा. लेकिन अगर ब्लड टेस्ट से डिप्रेशन का पता लगाया जाने लगा तो ऐसे लोगों की सोच भी बदल जाएगी और मानसिक रोगियों को तिरस्कार का सामना नहीं करना पडेगा, हालांकि ये टेस्ट भारत में कब आएगा, ये किसी को नहीं पता लेकिन देर सवेर ऐसा जरूर होगा और ये भारत के उन करोड़ों लोगों के लिए एक अच्छी खबर होगी जो चाहकर भी किसी को ये नहीं बता पाते कि उन्हें डिप्रेशन है.

इसलिए बढ़ता है तनाव

मानसिक रोगों का एक बड़ा कारण ये भी है कि लोग या तो भविष्य की चिंताओं में खोए रहते हैं या फिर वो अपने अतीत से चिपके रहते हैं. वर्तमान में कोई भी जीना नहीं चाहता. इसलिए वर्तमान में जीने की आदत डालिए, ताकि डिप्रेशन की जांच कराने की नौबत ही ना आए. इसके अलावा तनाव और डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण ये भी है कि लोग वो बनना चाहते हैं जो वो नहीं है. इसलिए आप जैसे हैं उसे स्वीकार कीजिए. अपने आप पर भरोसा रखिए और दूसरों से अपनी तुलना करना बंद कर दीजिए.

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