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पाकिस्तानी अदालत ने ISI को खुश करने के लिए जारी किया गैर जमानती वारंट: गुलालई इस्माइल

पख्तून मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल के खिलाफ इस्लामाबाद की एक अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया है.

पाकिस्तानी अदालत ने ISI को खुश करने के लिए जारी किया गैर जमानती वारंट: गुलालई इस्माइल
पख्तून मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल. (फोटो साभार: youtube)

इस्लामाबाद: पाकिस्तान (Pakistan) में सरकारी एजेंसियों के उत्पीड़न से परेशान होकर अमेरिका पलायन करने वालीं पख्तून मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल (Galalai Ismail) के खिलाफ यहां की एक अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया है.

दरअसल, एक पाकिस्तानी पत्रकार ने गुलालाई के खिलाफ वारंट जारी होने पर ट्वीट में लिखा, ''यह अदालत नहीं कर रही है. पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान यही चाहता है और हम सभी जानते हैं कि न्यायपालिका से समझौता किया सकता है.'' जवाब में गुलालाई लिखती हैं, ''पाकिस्तानी अदालतें ISI को खुश करने के लिए करती हैं.''

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने गुलालाई के खिलाफ यह गैर जमानती वारंट राष्ट्रीय संस्थाओं को बदनाम करने के एक मामले में जारी किया है.

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अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अगर वह 21 अक्टूबर तक पेश नहीं होती हैं तो उन्हें भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए. रिपोर्ट में कहा गया है कि पासपोर्ट जब्त किए जाने के बाद भी गुलालाई पाकिस्तान से रहस्यमय तरीके से फरार हो गईं और वह इस समय अमेरिका में हैं जहां उन्होंने राजनैतिक शरण का आवेदन किया हुआ है.

इससे पहले मार्च में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने गुलालाई की याचिका पर गृह मंत्रालय को उनका नाम विदेश यात्रा पर रोक लगाने वाली एक्जिट कंट्रोल लिस्ट से हटाने निर्देश दिया था. लेकिन, अदालत ने खुफिया संस्था इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस की सिफारिशों के आधार पर उनका पासपोर्ट जब्त करने और उनके खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई करने को कहा था.

मानवाधिकार का मुद्दा उठाती हैं
32 साल की गुलालाई पाकिस्तान के पश्तून समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठाती रही हैं. उन्होंने अवेयर गर्ल्स नाम का एक एनजीओ बनाया है. पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उनका संबंध पश्तून तहफ्फुज आंदोलन से है और जिसके तहत वह देश की संस्थाओं के खिलाफ बातें करती हैं. जबकि, गुलालाई इसे गलत बताती हैं और उनका कहना है कि वह केवल लोगों के मानवाधिकार का मुद्दा उठाती हैं.