क्वारंटाइन सेंटर का सच दिखाने के लिए पाकिस्तान में दो पत्रकारों को किया गया प्रताड़ित

पाकिस्तान (Pakistan) की इमरान खान (Imran Khan) सरकार मीडिया की आजादी पर अंकुश लगाने पर आमादा है.

क्वारंटाइन सेंटर का सच दिखाने के लिए पाकिस्तान में दो पत्रकारों को किया गया प्रताड़ित
फाइल फोटो

इस्लामाबाद: पाकिस्तान (Pakistan) की इमरान खान (Imran Khan) सरकार मीडिया की आजादी पर अंकुश लगाने पर आमादा है. पाकिस्तान में दो पत्रकारों (Journalists) को केवल इसलिए बुरी तरह प्रताड़ित किया गया, क्योंकि उन्होंने बलूचिस्तान में बने क्वारंटाइन सेंटर (Quarantine Centre) की असल तस्वीर देश के सामने रखने का प्रयास किया. इन पत्रकारों को तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और जमकर मारपीट की गई. 

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (Reporters Without Borders (RWF/RSF) की एक रिपोर्ट के अनुसार, उर्दू भाषी चैनल समा न्यूज़ टीवी (Samaa News TV) के पत्रकार सईद अली अचाकजई (Saeed Ali Achakzai) और पश्तून भाषा के खैबर न्यूज़ टीवी (Khyber News TV) के अब्दुल मतीन अचाकजई (Abdul Mateen Achakzai) को अफगान सीमा के पास स्थित चमन शहर में फ्रंटियर कॉर्प्स कमांड सेंटर बुलाया गया था. यहां उन्हें तीन दिनों तक प्रताड़ित किया गया. 

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तीन दिनों तक गायब रहने के बाद पत्रकार जब वापस लौटे तो उनके पूरे शरीर पर चोटों के निशान थे. पत्रकार अब्दुल मतीन ने बताया कि आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें एंटी टेरेरिज्म फोर्स के हवाले कर दिया गया, जिसका संचालन बलूचिस्तान के लेवीस द्वारा किया जाता है. उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद फोर्स उन्हें एक कुख्यात जेल (Machh prison) ले गई, जहां दोनों को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया. अब्दुल मतीन के शरीर पर चोटों के निशान हैं, जो उनके दावों की पुष्टि करते हैं.  

मिल रही थी धमकी
अब्दुल मतीन अचाकजई के मुताबिक, उन्हें लगातर व्हाट्सएप पर धमकी भरे मैसेज आ रहे थे, क्योंकि पैरा मिलिट्री फोर्स के डिप्टी कमिश्नर हमारी कवरेज से खुश नहीं थे. हमने क्वारंटाइन सेंटर की अव्यवस्थाओं पर खबर दिखाई थी. रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने इस संबंध में बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आग्रह किया है. RSF की एशिया-पैसिफिक डेस्क के प्रमुख डैनियल बैस्टर्ड (Daniel Bastard) ने कहा, ‘हम इस घटना की निंदा करते हैं और यह पूरी तरह अस्वीकार्य है कि सुरक्षा बलों के लोग पत्रकारों की रिपोर्ट से नाखुश होकर उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं’.  

पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
डैनियल बैस्टर्ड ने आगे कहा कि हम बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री जाम कमाल खान (Jam Kamal Khan) से मांग करते हैं कि इस मामले की न्यायिक जांच कराई जाए और सभी दोषियों को सजा मिले, ताकि प्रेस की आजादी प्रभावित न हो. उनके मुताबिक, पाकिस्तान में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है और ऐसी घटनाएं लोगों में खौफ पैदा करती हैं. पाकिस्तान के कई क्षेत्रों, खासकर चमन में पत्रकारों को पहले भी इस तरह से प्रताड़ित किया जा चुका है. RSF के 2020 वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स के अनुसार, पाकिस्तान 180 में से 145 वें स्थान पर है.