मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा की जमानत याचिका अमेरिका कोर्ट ने की खारिज

अमेरिका सरकार ने यह दलील देते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का विरोध किया कि अगर वह कनाडा भाग जाता है तो उसके भारत में मौत की सजा से बचने की आशंका है.

मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा की जमानत याचिका अमेरिका कोर्ट ने की खारिज

वाशिंगटन: अमेरिका (America) की एक अदालत ने 2008 मुंबई आतंकवादी हमलों (26/11) में संलिप्तता के लिए भारत द्वारा भगोड़ा करार दिए गए पाकिस्तानी मूल के कनाडाई कारोबारी तहव्वुर राणा (Tahawwur Hussain Rana) की जमानत याचिका खारिज कर दी. बता दें कि डेविड कोलमैन हेडली के बचपन के दोस्त राणा (59) को 2008 मुंबई आतंकवादी हमलों के मामले में शामिल होने के लिए भारत के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर लॉस एंजिलिस में 10 जून को फिर से गिरफ्तार किया गया था. 

इस हमले में छह अमेरिकियों समेत 166 लोग मारे गए थे. भारत में वह भगोड़ा अपराधी घोषित है. लॉस एंजिलिस में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की न्यायाधीश जैकलीन चूलजियान ने 21 जुलाई को अपने 24 पृष्ठों के आदेश में राणा को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि उसके फरार होने का खतरा है. अमेरिका सरकार ने यह दलील देते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का विरोध किया कि अगर वह कनाडा भाग जाता है तो उसके भारत में मौत की सजा से बचने की आशंका है.

अमेरिका के सहायक अटॉर्नी जॉन जे लुलेजियान ने अदालत में कहा, ‘‘किसी भी मुचलके पर जमानत देने से अदालत में राणा की मौजूदगी सुनिश्चित नहीं की जा सकेगी. उसे जमानत देने से अमेरिका को अपने विदेश मामलों में शर्मिंदा होना पड़ सकता है और उसके भारत के साथ रिश्ते तनावपूर्ण हो सकते हैं. वहीं, राणा के वकील ने कहा कि 26/11 के आरोपी के फरार होने का खतरा नहीं है और उन्होंने उसे जमानत पर रिहा करने के लिए 15 लाख डॉलर का मुचलका भरने का प्रस्ताव रखा.

ये भी पढ़ें:- अपनी जिद पर अड़े ट्रंप, अमेरिका में नहीं रह सकेंगे विदेशी छात्र

राणा ने अपने बचाव में कहा कि अमेरिका का सह-आरोपी हेडली को भारत प्रत्यर्पित न करने का फैसला असंगत है और यह उसके प्रत्यर्पण पर रोक लगाता है. पाकिस्तान में जन्मे राणा ने वहां के आर्मी मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की और एक दशक से अधिक समय तक पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर के तौर पर काम किया.
वह अब कनाडाई नागरिक है, लेकिन वह शिकागो में रहता था, जहां उसका कारोबार था। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार वह कनाडा, पाकिस्तान, जर्मनी और इंग्लैंड में भी रहता है और वहां की यात्रा करता रहता है तथा सात भाषाएं बोलता है.

संघीय अभियोजकों ने कहा कि अगर वह कनाडा भाग जाता है तो वह मौत की सजा से बच सकता है। दरअसल, भारत के साथ कनाडा की प्रत्यर्पण संधि में ऐसा प्रावधान है कि भारत में जिस अपराध के लिए प्रत्यर्पण की मांग की गई है, अगर उसमें मौत की सजा सुनाई जा सकती है और कनाडा में उसके लिए मौत की सजा नहीं है तो प्रत्यर्पण से इनकार किया जा सकता है.

अदालत के दस्तावेजों के अनुसार राणा 28 अप्रैल 2020 को लॉस एंजिलिस में टर्मिनल आइलैंड में कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया, लेकिन उसमें लक्षण नहीं थे और अब वह स्वस्थ है. संघीय अभियोजकों के मुताबिक 2006 से नवंबर 2008 के बीच राणा ने ‘दाउद गिलानी’ के नाम से पहचाने जाने वाले हेडली और पाकिस्तान में कुछ अन्य के साथ मिलकर लश्कर-ए-तैयबा तथा हरकत-उल-जिहाद-ए-इस्लामी को मुंबई में आतंकी हमलों की साजिश रचने तथा हमलों को अंजाम देने में मदद की.

पाकिस्तानी-अमेरिकी हेडली लश्कर का आतंकवादी है. वह 2008 के मुंबई हमलों के मामले में सरकारी गवाह बन गया है. वह हमले में भूमिका के लिए अमेरिका में 35 साल की जेल की सजा काट रहा है.

LIVE TV

Zee News App: पाएँ हिंदी में ताज़ा समाचार, देश-दुनिया की खबरें, फिल्म, बिज़नेस अपडेट्स, खेल की दुनिया की हलचल, देखें लाइव न्यूज़ और धर्म-कर्म से जुड़ी खबरें, आदि.अभी डाउनलोड करें ज़ी न्यूज़ ऐप.