Coronavirus से ज्यादा सुई से डरे लोग, America में आधे से ज्यादा ने नहीं लगवाई वैक्सीन

लोगों को कोरोना वायरस महामारी से ज्यादा सुई से डर लग रहा है. यही कारण है कि अभी तक अमेरिका में आधे से ज्यादा लोग टीका लगवाने को तैयार नहीं है. एक शोध में इसका खुलासा हुआ है. 

Coronavirus से ज्यादा सुई से डरे लोग, America में आधे से ज्यादा ने नहीं लगवाई वैक्सीन

वाशिंगटन: क्या आप जानते हैं कि अमेरिका (America) में 25% लोग ऐसे हैं, जो सुई लगवाने से बचते हैं. यही वजह है कि वह कोविड वैक्सीन (Corona Vaccine) नहीं लगवा रहे हैं. ऐसे लोगों को कोविड-19 के टीकाकरण स्टॉल तक लाने के लिए बीयर या लॉटरी टिकट की घूस भी सुई से उनके डर को दूर नहीं कर पा रही है.

अमेरिका की ऑगस्टा यूनिवर्सिटी के पेन मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट एमी बैक्सटर ने कहा, 'मैं टीकाकरण से होने वाले दर्द के प्रभाव का अध्ययन करता हूं. शोध से सिद्ध हुआ है कि वयस्को में सुई लगवाना दर्द, बेहोशी, घबराहट और भय जैसी बातों से जुड़ा है, लेकिन अगर उन कारणों को समझ लिया जाए, जिनकी वजह से सुई का डर इतना सामान्य हो गया है तो शर्मिन्दी को झेलना आसान होगा.

सुई की चिंता क्यों बढ़ गई?

जे.जी. हैमिल्टन द्वारा 1995 में किए गए ऐतिहासिक अध्ययन के बाद से सुई का डर नाटकीय रूप से बढ़ गया है. हैमिल्टन के अनुसार, 10% एडल्ट्स और 25% बच्चे सुइयों से डरते थे. उस अध्ययन में, एडल्ट्स ने बताया कि उन्हें 5 साल की उम्र के आसपास सुई लगवाने के दौरान तनावपूर्ण अनुभव हुआ. मरीजों के बचपन के अनुभव आमतौर पर एक अप्रत्याशित बीमारी से संबंधित होते हैं. जब हैमिल्टन के अध्ययन में भाग लेने वाले प्रीस्कूल में थे, तब टीके केवल 2 वर्ष की आयु तक लगाने निर्धारित किए गए थे.

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हालांकि, 1980 के बाद पैदा हुए अधिकांश लोगों के लिए, 4 से 6 साल की उम्र के बीच दिए जाने वाले बूस्टर इंजेक्शन टीके के अनुभव का एक नियमित हिस्सा बन गए हैं. बूस्टर का समय प्रतिरक्षा को तो बढ़ाता है, लेकिन यह उम्र के उस दौर में लगाया जाता है, जब यह डर का कारण बन जाता है. 2012 में 1,024 बच्चों के एक कनाडाई अध्ययन में पाया गया कि 2000 या उसके बाद पैदा हुए 63% लोग अब सुइयों से डरते हैं. 2017 के एक अध्ययन में, मैंने और मेरे सहयोगियों ने इस वृद्धि की पुष्टि की: आधे प्रीस्कूलर जिन्होंने एक दिन में अपने सभी बूस्टर लिए - अक्सर एक बार में चार या पांच इंजेक्शन - अभी भी सुइयों से गंभीर रूप से डरते थे.

अप्रत्याशित रूप से, सुई का डर इस बात को प्रभावित करता है कि किशोर और एडल्ट टीका लगवाने के इच्छुक कैसे हैं. 2016 के एक अध्ययन में सुई का डर किशोरों के एचपीवी का दूसरा टीका नहीं लेने का सबसे आम कारण पाया गया. स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता कोई अपवाद नहीं हैं: 2018 के एक अध्ययन में पाया गया कि अस्पताल के 27% कर्मचारियों ने सुई के डर के कारण फ्लू के टीके नहीं लगवाए. अभी हाल ही में, अप्रैल 2021 में कोविड-19 का टीका नहीं लगवाने वाले 600 अमेरिकी वयस्कों के राष्ट्रीय सर्वेक्षण में पाया गया कि 52% ने सुई के मध्यम अथवा गंभीर डर के कारण ऐसा नहीं किया.

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एडल्ट्स के लिए संभावित समाधान

साक्ष्यों से पता चलता है कि यदि सुई लगते समय बच्चों का ध्यान भटका दिया जाए तो उनके दर्द और डर को कम किया जा सकता है. वयस्कों में सुई के डर को कम करने के लिए इंजेक्शन अध्ययनों के निष्कर्षों के आधार पर कुछ संभावित उपायों का सुझाव दिया जा सकता है. उन लोगों के लिए जो टीका तो लगवाना चाहते हैं लेकिन इस दौरान उन्हें कुछ सहायता की जरूरत होती है. इनमें प्रमुख हैं:-

1. दर्द में कमी

इंजेक्शन के दर्द से राहत मरीजों में सुई के डर को कम कर सकती है. उदाहरण के लिए, न्यूजीलैंड में मरीजों का एक समूह रयूमैटिक हृदय रोग के लिए अपने मासिक एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगवाने नहीं आ रहा था. उनके डॉक्टरों ने एक विशेष क्लीनिक बनाया, जिसमें ऐसे मरीजों को टीका लगाने के दौरान एनेस्थेटिक्स, टीका लगाने से पहले टीके के स्थान पर ठंडी थरथराहट देने वाली मशीन या दोनों के इस्तेमाल की पेशकश की गई. 107 एडलट्स में इन उपायों से 3 महीने के बाद सुई का दर्द और भय 50% तक कम हो गया. जबकि 6 महीने बाद, आधे मरीजों ने इन उपायों का उपयोग किया, और टीका लगवाने से बच रहे मरीजों को टीका लगाने के लिए खोले गए इस क्लिनिक की जरूरत नहीं रही. 

2. मनोवैज्ञानिक चिकित्सा

इस तरह की थेरेपी में एक मरीज को टीका लगाने के दौरान अन्य आशंकाओं में उलझाकर सुई का डर कम करने का प्रयास किया जाता है. हालांकि एक एडल्ट के सुई डर पर इस तरह का परीक्षण करने वाले तीन अध्ययनों में से किसी ने भी दीर्घकालिक भय में कमी नहीं दिखाई.

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3. ध्यान भटकाना

हैरानी की बात है कि इंजेक्शन के दौरान उस प्रक्रिया से ध्यान भटकाने के बारे में वयस्कों पर कोई अध्ययन नहीं हुआ है. हालांकि, दो अध्ययनों में पाया गया है कि खांसी का नाटक करने से सुई लगने के दौरान होने वाला दर्द कम हो जाता है. बम फटने की आवाज से भी मदद मिल सकती है. हाल के एक अध्ययन में पाया गया कि कुछ बेकार के शब्द बोलने की तुलना में कोई शपथ लेने से दर्द एक तिहाई कम हो जाता है. बच्चों को टीका लगने के दौरान आभासी वास्तविकता वाले खेल या वीडियो अधिक प्रभावी होते हैं, हालांकि वयस्कों में इसके मिश्रित परिणाम मिले हैं.

टीका लगवाने के दौरान यदि बच्चों के दिमाग को व्यस्त रखने वाले कार्य दिए जाएं तो उनके भीतर से सुई के दर्द को कम किया जा सकता है. हालांकि वयस्कों को इस तरह के अनुभव के लिए अधिक जटिल कार्य की आवश्यकता हो सकती है. कई तरीकों का इस्तेमाल करते हुए एक योजना के साथ सुई के डर को कम किया जा सकता है. अपने वैक्सीनेशन के अनुभव पर नियंत्रण रखना सुई के डर को कम करने का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है.

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