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अमेरिकी सांसद ने ट्रंप प्रशासन से कहा- बिना संसद की इजाजत के देश को युद्ध में नहीं झोंक सकते

ईरान पर लगाम लगाने के लिये कभी बमबारी तो कभी सुलह के बीच झूल रहे ट्रंप ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि ईरान के उकसावे पर सख्ती से निपटा जाएगा.

अमेरिकी सांसद ने ट्रंप प्रशासन से कहा- बिना संसद की इजाजत के देश को युद्ध में नहीं झोंक सकते
.(फाइल फोटो)

वॉशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान को लेकर सख्त रुख पर उठ रहे सवालों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारी संसद को इस बारे में जानकारी देने के लिये कैपिटल हिल का रुख कर रहे हैं, लेकिन डेमोक्रेटिक सांसद संशय में हैं और इस बारे में दूसरी राय चाहते हैं. बंद दरवाजों के भीतर मंगलवार को बैठकों का यह दौर ऐसे वक्त हो रहा है जब फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव के बाद ईरान के साथ संभावित सैन्य टकराव की आहट ने खतरे की घंटी बजा दी है.

सांसद ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दे रहे हैं कि वह संसद की इजाजत के बिना देश को युद्ध में नहीं झोंक सकते और एक के बाद एक हो रही ये बैठकें डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सांसदों का पश्चिम एशिया को लेकर व्हाइट हाउस की नीति में अचानक आए बदलाव को लेकर चौकन्नापन दर्शाती हैं.

ईरान पर लगाम लगाने के लिये कभी बमबारी तो कभी सुलह के बीच झूल रहे ट्रंप ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि ईरान के उकसावे पर सख्ती से निपटा जाएगा लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वह बातचीत के इच्छुक हैं.  एक रैली के लिये व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले ट्रंप ने संवाददाताओं को बताया, “हम देखेंगे क्या होगा. ”

उन्होंने कहा कि ईरान का रुख बेहद “शत्रुतापूर्ण” रहा है.  ट्रंप ने कहा, “हमें इस बात का कोई संकेत नहीं है कि कुछ हुआ है या कुछ होगा, लेकिन ऐसा कुछ होता है, तो स्वाभाविक रूप से इसका जोरदार जवाब दिया जाएगा.  हमारे पास कोई विकल्प नहीं है. ”

ट्रंप प्रशासन ने हाल में फारस की खाड़ी में एक विमान वाहक पोत और अन्य सैन्य संसाधनों को भेजा है.  उसने इराक से अपने गैर जरूरी कर्मियों को भी वापस बुला लिया है. प्रशासन संसद के दोनों सदनों को इस मामले में जानकारी देने के लिये विदेश मंत्री माइक पोम्पियो, कार्यकारी रक्षा मंत्री पैट्रिक शानान और दूसरे प्रमुख अधिकारियों जनरल जोसफ डनफोर्ड समेत तमाम अधिकारियों को भेज रहा है.