DNA ANALYSIS: राष्ट्रपति चुनाव पर अमेरिका में वोट नहीं, कोर्ट से फैसला?

अमेरिका (America) का अगला राष्ट्रपति (Presidential Election) कौन बनेगा इसका फैसला अब तक नहीं हो पाया है. पहले उम्मीद थी कि 4 नवंबर तक इसकी सटीक जानकारी मिल जाएगी. लेकिन ऐसा लगता है कि अंतिम नतीजे सामने आने में कुछ दिनों या कुछ हफ्तों का समय भी लग सकता है.

DNA ANALYSIS: राष्ट्रपति चुनाव पर अमेरिका में वोट नहीं, कोर्ट से फैसला?

नई दिल्ली: अमेरिका (America) के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का इंतजार वहां रहने वाले 33 करोड़ लोगों समेत दुनिया के 750 करोड़ लोग भी कर रहे हैं. अमेरिका का अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा, इसका पूरी दुनिया पर असर पड़ता है, इसलिए ये आज की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर है. अभी राष्ट्रपति चुनावों (Presidential Election 2020) का नतीजा सामने नहीं आया है. हालांकि इससे पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी जीत की घोषणा कर दी और अमेरिका की जनता के साथ धोखेबाजी का दावा करते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान कर दिया. इस ऐतिहासिक चुनावी ड्रामे को देख रहे अमेरिका के लोगों में बेचैनी है, वो डरे हुए हैं और उन्हें वहां पर दंगे होने की आशंका है. 

अमेरिका के सभी राज्यों को मिलाकर कुल 538 इलेक्टोरल वोट हैं और वहां राष्ट्रपति बनने के लिए 270 इलेक्टोरल वोटों की जरूरत होती है.

120 वर्षों में वोटिंग का सबसे ज्यादा प्रतिशत
अमेरिका का अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा इसका फैसला अब तक नहीं हो पाया है. पहले उम्मीद थी कि 4 नवंबर तक इसकी सटीक जानकारी मिल जाएगी. लेकिन ऐसा लगता है कि अंतिम नतीजे सामने आने में कुछ दिनों या कुछ हफ्तों का समय भी लग सकता है. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप इंतजार नहीं करना चाहते हैं. अब उन्होंने खुद के चुनाव जीतने का दावा किया है. हालांकि उनके प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन को अमेरिका की जनता पर भरोसा है. 

- अमेरिका के इस राष्ट्रपति चुनाव में करीब 67 प्रतिशत वोटर्स ने वोट डाले. ये पिछले 120 वर्षों में वोटिंग का सबसे ज्यादा प्रतिशत है.

- अमेरिका में कुल 16 करोड़ लोगों ने पॉपुलर वोट डाले हैं. अमेरिका के वोटर्स द्वारा डाले गए वोटों को ही पॉपुलर कहते हैं. इनमें से 6 करोड़ 80 लाख से ज्यादा वोट जो बाइडेन के पक्ष में हैं और 6 करोड़ 67 लाख से अधिक वोट डोनाल्ड ट्रंप को मिले हैं.

- अमेरिका में आबादी के हिसाब से हर राज्य के वोट निर्धारित होते हैं. जो भी उम्मीदवार किसी राज्य में सबसे ज्यादा पॉपुलर वोट हासिल कर लेता है, उसे ही वहां के सभी इलेक्टोरल वोट मिलते हैं.

- अमेरिका के इस चुनाव में 6 करोड़ 40 लाख पोस्टल वोटों पर विवाद है. इन वोटों की गिनती हाथों से की जाती है और अमेरिका के हर राज्य में इन पोस्टल वोटों को लेकर अलग-अलग नियम हैं.

- कुछ राज्यों ने देर से मिले पोस्टल वोटों को भी स्वीकार किया और डोनाल्ड ट्रंप इन्हीं पर सवाल उठा रहे हैं.

अमेरिका के मुकाबले भारत की चुनाव प्रणाली बेहतर
अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है और वो दुनिया के दूसरे देशों को अमेरिका जैसा लोकतंत्र अपनाने की सलाह देता है. लेकिन अमेरिका की अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था बहुत जटिल है, यही कारण है कि वहां पर राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) के नतीजे अभी तक नहीं आए हैं. अमेरिका के मुकाबले भारत की चुनाव प्रणाली बेहतर है. यहां पर आप ब्रेकफास्ट से चुनाव के नतीजे देखना शुरू करते हैं और लंच तक ये तय हो जाता है कि अगली सरकार किस पार्टी या गठबंधन की होगी.

अमेरिका में करीब 24 करोड़ वोटर्स हैं, जबकि भारत में इससे लगभग 4 गुना अधिक करीब 90 करोड़ वोटर्स हैं. इसके बावजूद भारत में शांतिपूर्ण तरीके से वोटिंग और वोटों की गिनती होती है. इसके लिए आपको भारत के चुनाव आयोग को धन्यवाद देना चाहिए. भारत के चुनावों में अक्सर EVM पर विवाद होते हैं, कुछ सीटों पर गड़बड़ी के आरोप लगते हैं. लेकिन पार्टियां नतीजों को स्वीकार कर लेती हैं. यानी कोई विवाद नहीं होता और चुनाव परिणाम के खिलाफ राजनीतिक दल सुप्रीम कोर्ट नहीं जाते हैं.

वोटर्स ने ट्रंप को उतना समर्थन नहीं दिया जितनी उन्हें उम्मीद थी
अंतिम नतीजों से पहले अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के बयान के खिलाफ प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ और कुछ प्रदर्शनकारियों को व्हाइट हाउस के करीब गिरफ्तार भी किया गया. हालांकि अमेरिका के कई और शहरों में प्रदर्शन हुए और ये ज्यादातर शांतिपूर्ण रहे.

अमेरिका से आई ऐसी तस्वीरों से ये पता चलता है कि अमेरिका एक बंटा हुआ देश है. अब तक आए नतीजों में अमेरिका के वोटर्स ने ट्रंप को उतना समर्थन नहीं दिया जितनी उन्हें उम्मीद थी और न ही बाइडेन (Joe Biden को इतने वोट मिले कि वो बड़ी जीत हासिल कर सकें.

अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में होगा फैसला
अमेरिका के अगले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही बने रहेंगे या फिर जो बाइडेन को मौका मिलेगा. इसका फैसला अब अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में होगा. यानी अमेरिका का चुनाव ट्रंप और बाइडेन ने लड़ लिया और अब वहां की सुप्रीम कोर्ट में इन दोनों उम्मीदवारों के वकीलों की फौज लड़ेगी.

- डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन ने चुनाव से संबंधित विवादों के लिए अपने वकीलों की टीम तैयार कर ली है. अमेरिका में अब तक इस चुनाव से संबंधित 400 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और ये अब तक के सबसे अधिक मामले हैं.

- अब अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट के 9 जज मिलकर वहां के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का फैसला करेंगे. हालांकि इन 9 जजों में ज्यादातर डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक हैं.

- हालांकि ये पहला मौका नहीं है जब अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों का फैसला वहां की सुप्रीम कोर्ट के जज करेंगे.

- इससे पहले वर्ष 2000 में George W. Bush और Al Gore के बीच लगभग एक महीने तक अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चली थी. तब कोर्ट ने जॉर्ज बुश को विजयी घोषित किया और वो अमेरिका के 43वें राष्ट्रपति बने थे.

- वर्ष 1876 में भी Presidential Election के नतीजों का फैसला करने के लिए वहां की संसद ने वर्ष 1877 में 5 जजों का एक आयोग बनाया था. उस समय चुनाव के नतीजे आने में लगभग दो महीने की देरी हुई थी.

सर्वे करनेवाली एजेंसियों के दावे गलत साबित हुए
अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में अब तक जो नतीजे आए हैं, उसमें सर्वे करनेवाली एजेंसियों के दावे गलत साबित हुए हैं. ज्यादातर सर्वे में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन की जीत का दावा किया गया था, लेकिन नतीजों में अभी भी दोनों उम्मीदवार एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं.

इससे पहले वर्ष 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में हिलेरी क्लिंटन की जीत के दावे करने वाले सभी अनुमान गलत साबित हुए थे. यानी अमेरिका के ओपिनियन पोल एक विज्ञापन की तरह हैं, जिसमें पैसा लेकर किसी खास उम्मीदवार के जीतने की भविष्यवाणी की जाती है.

संभव है कि इन्हें देखकर वहां के कई वोटर्स ने ओपिनियन पोल में जीतनेवाले उम्मीदवारों को वोट दिया होगा.

सवाल है कि क्या अमेरिका की सर्वे एजेंसियां किसी एक पार्टी का एजेंडा चलाती हैं? क्या उनकी विश्वनीयता इतनी कम हो गई है कि वहां की जनता उन्हें सच बताती ही नहीं है?

जीत का भारत से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर असर
माना जाता है कि अमेरिका में नये राष्ट्रपति के चुने जाने के बाद भी भारत के लिए नीतियों में ज्यादा बदलाव नहीं होगा. इन चुनावों के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ दोस्ती नहीं निभाई, उन्होंने प्रदूषण जैसे मुद्दों को लेकर भारत को निशाना बनाया. डोनाल्ड ट्रंप के बेटे ने भारत का एक गलत नक्शा ट्वीट किया. इससे पता चलता है कि उन्हें दुनिया के बारे में कितनी कम जानकारी है.

अब आपको बताते हैं कि ट्रंप और बाइडेन की जीत का भारत से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर क्या असर हो सकता है

- ट्रंप जीते तो भारत और अमेरिका के संबंध और बेहतर होंगे जबकि बाइडेन के साथ भारत को नए सिरे से संबंधों की शुरुआत करनी होगी.

- ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बने तो भारत और अमेरिका के सैन्य संबंध और मजबूत होंगे. हालांकि बाइडेन आए तो भी इनमें ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है.

- आतंकवाद के मुद्दे पर ट्रंप सरकार आक्रामक है, लेकिन Biden प्रशासन इस पर नरमी बरत सकता है.

- इस जीत के बाद ट्रंप... चीन के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं, हालांकि जो बाइडेन भारत पर चीन के साथ दोस्ती के लिए दबाव डाल सकते हैं.

- ट्रंप के मुकाबले बाइडेन की इमिग्रेशन पॉलिसी भारतीयों के पक्ष में होगी. इससे अमेरिका के साथ बिजनेस भी बढ़ सकता है.

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