रूस-अमेरिका में वेनेजुएला को लेकर बढ़ी तनातनी, क्या शीतयुद्ध जैसे हो रहे हैं हालात?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि रूस को वेनेजुएला से जाना होगा. वहीं रूस ने कहा है कि रूस-वेनेजुएला अमेरिकी प्रांत नहीं हैं. 

रूस-अमेरिका में वेनेजुएला को लेकर बढ़ी तनातनी, क्या शीतयुद्ध जैसे हो रहे हैं हालात?
रूस और अमेरिका में वेनेजुएला को लेकर हो रही बयान बाजी शीत युद्ध के माहौल की याद दिलाती है. (फोटो: Reuters)

नई दिल्ली: वेनेजुएला को लेकर अब रूस और अमेरिका के बीच तनातनी बढ़ गई है. इसकी उम्मीद तब और ज्यादा बढ़ गई थी जब पिछले सप्ताह वेनेजुएला की राजधानी काराकास के पास सिमन बोलीवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर रूसी विमान पहुंचने लगे जिसकी अमेरिका कड़ी प्रतिक्रिया दी और रूस ने भी उसका जवाब दिया. अमेरिका के उप राष्ट्रपति माइक पेंस ने रूस के विमानों के आने को उकासावे की घटना माना. फिरअमेरिका ने तल्ख लफ्जों में कहा है कि रूसी सेना को वेनेजुएला से जाने के लिए कहा. अब रूस ने कहा कि रूस और वेनेजुएला अमेरिका के प्रांत नहीं हैं.  

ट्रंप कार्रवाई की जल्दी में नहीं
इससे पहले वेनेजुएला में विपक्षी नेता जुआन गुएदो ने आरोप लगाया था कि कि संकट के समय देश में रूसी सैनिकों की तैनाती से संविधान का उल्लंघन है. गुएदो ने बुधवार को हुई बैठक के दौरान जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या रूसी हस्तक्षेप से वेनेजुएला में स्थिति जटिल हो रही है? तो ट्रंप ने केवल इतना कहा कि रूस को बाहर जाना होगा.

ट्रंप ने कहा, दबाव पहले ही ज्यादा, पर सारे विकल्प अभी खुले हैं
वेनेजुएला के सत्ताधारी राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन पर दवाब बढ़ाने के लिए अमेरिका की कार्रवाई के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि  "उन पर अभी बहुत दवाब है. उनके पास रुपये नहीं है, उनके पास तेल नहीं है, उनके पास कुछ नहीं है. उन पर अभी काफी ज्यादा दवाब है. उनके पास बिजली भी नहीं है." उन्होंने कहा, "(पहले ही उन पर जितने दबाव हैं, उन्हे देखते हुए) सेना के अलावा उन पर और कोई दवाब नहीं डाला जा सकता.. सभी विकल्प खुले हैं."

रूस के तेवर भी कम तीखे नहीं
रूस के वेनेजुएला के साथ द्वपक्षीय संबंध जगजाहिर हैं. रूस के संयुक्त राष्ट्र में नियुक्त उप राजदूत दिमित्री पॉलियान्सकी ने ट्विटर पर कहा है कि अमेरिका को दूसरे देशों की भाग्य का फैसला करने का कोई हक नहीं है. यह हक केवल वेनेजुएला के लोगों और उसके जायज राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को है. रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा है कि  रूस  इस इलाके (वेनेजुएला) में सत्ता के संतुलन को नहीं बिगाड़ रहा है और न ही रूस ने अमेरिका से उलट किसी भी नागरिक को धमकी दी है. उन्होंने कहा कि न तो रूस और न ही वेनेजुएला अमेरिका के प्रांत हैं. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर ‘‘तख्तापलट की कोशिश’’ का आरोप लगाया

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मादुरो ने दिया रूस का साथ
वहीं राष्ट्रपति मादुरो ने भी रूस के सुर से सुर मिलाया है. रूस से वेनेजुएला को आर्थिक के साथ-साथ मानवीय सहायता भी मिल रही है. इसी साल 22 फरवरी को वेनेजुएला से 7.5 टन का मानवीय सहायता का सामान मिला था जिसमें दवाइयां, चिकित्सा का सामान, चिकित्सकीय उपकरण और अन्य सामग्री शामिल थे. वेनेजुएला ऐसी ही एक और सहायता की अपेक्षा कर रहा है. मादुरो ने अमेरिका समर्थित विपक्ष के नेता जुआन गुएदो के सार्वजनिक कार्यालय संभालने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

Nicolas Maduro

क्या शीतयुद्ध के जैसा माहौल बन रहा है?
रूस और अमेरिका के बीच चल रहा यह खेल अब ज्यादा खुल गया है. रूस अपने निवेश की चिंता में मादुरो को सहयोग देता जा रहा है, वहीं अमेरिका और अन्य देश मादुरो को हटाने के लिए गुएदो का समर्थन कर रहे हैं. इसकी वजह से रूस और अमेरिका में तनावपूर्ण स्थितियां जरूर बनेंगी. अमेरिका सैन्य विकल्प की धमकी देने से भी न चूके तो हैरानी नहीं होगी, लेकिन उसके लिए वेनेजुएला में सेना को भेजना भी आसान नहीं होगा. सारे विकल्प खुले होने की बात ट्रंप पहले ही कह चुके हैं. इतना तय है कि तनाव दोनों तरफ से बढ़ना तय है जो कि अब दिखने भी लगा है. 

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जनता तो भुगत ही रही है
इसी बीच वेनेजुएला में दूसरा बिजली संकट छा गया है. राष्ट्रपति ने इसके लिए एक बार फिर अमेरिका को इसके लिए दोषी ठहराया है. जबकि देश पहले से ही कई आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है. रूस और अमेरिका की तनातनी में वेनेजुएला की जनता को अपनी परेशानियां कम होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है.