अमेरिका ने इजरायल के लिए ऐसा क्या किया जिससे फिलिस्तीन और अरब वर्ल्ड हुआ आगबबूला

अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट माइक पोम्पियो ने सोमवार को घोषणा करके कहा, 'अमेरिका अब इजरायल के कब्जे को अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक अवैध नहीं मानता है. बहुत ही संवेदनशीलता के साथ सभी पक्षों के वैध दावों का अध्ययन करके, हम इस पर सहमत हुए हैं कि इजरायली नागरिकों वेस्ट बैक में रहना अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से अवैध नहीं है'

अमेरिका ने इजरायल के लिए ऐसा क्या किया जिससे फिलिस्तीन और अरब वर्ल्ड हुआ आगबबूला
वेस्ट बैंक में इजराल के लोगों के सेटलमेंट

वाशिंगटन: अमेरिका (USA) ने मध्य-पूर्व एशिया के क्षेत्र में अपनी विदेशनीति और कूटनीति में बड़ा फेरबदल करते हुए इजरायल (Israel) के वेस्ट बैंक (West Bank) में इजरायली नागरिकों के रहने को मान्यता दे दी. आपको बता दें कि जून 1967 में इजरायल ने इजिप्ट (Egypt), सीरिया (Syria) और जॉर्डन (Jordan) से 'सिक्स डे वार' में फिलिस्तीन (Palestine) से वेस्ट बैंक का क्षेत्र जीत लिया था. वहां अब इजरायल के करीब 6 लाख यहूदी नागरिक रहते हैं और वेस्ट बैंक अब भी इजरायल के कब्जे में है.

अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट माइक पोम्पियो (Mike Pompeo) ने सोमवार को घोषणा करके कहा, 'अमेरिका अब इजरायल के कब्जे को अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक अवैध नहीं मानता है. बहुत ही संवेदनशीलता के साथ सभी पक्षों के वैध दावों का अध्ययन करके, हम इस पर सहमत हुए हैं कि इजरायली नागरिकों का वेस्ट बैक में रहना अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से अवैध नहीं है. अभी तक इजरायली नागरिकों के रहने को लेकर अमेरिका की पॉलिसी स्टेट डिपार्टमेंट के 1978 के मत पर आधारित थी.'

अमेरिका के इस फैसले का इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netayahu) ने बड़ी गर्मजोशी से स्वागत किया. बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्वीट करके कहा, 'मैंनें अमेरिकी प्रधानमंत्री डॉनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और उनसे कहा कि आपने इतिहास में हुए अन्याय को सुधारा है. किसी ना किसी को तो इस सच को मानना ही था और राष्ट्रपति ट्रंप ने वही किया, जैसा कि उन्होंने पहले भी गोलन हाइट्स को मान्यता देकर और अमेरिकी दूतावास को जेरुसलम में स्थानांतरित करके किया था.'

अमेरिका के मध्य-पूर्व एशिया के क्षेत्र में अपनी पॉलिसी में इतने बड़े बदलाव के पीछे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के इजरायल की सत्ता में दोबारा ना काबिज हो पाने को माना जा रहा है. बेंजामिन नेतन्याहू को दक्षिणपंथी विचारधारा का माना जाता है और वो अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) के करीबी भी हैं. ऐसा हो सकता है कि इजरायल में पिछले आम चुनावों के बाद स्थाई सरकार ना बन पाने के बाद एक बार फिर से होने वाले चुनावों में डॉनल्ड ट्रंप अपने दोस्त बेंजामिन नेतन्याहू को वोटों के मामले में फायदा पहुंचाना चाहते हैं.

अमेरिका के इस बड़े फैसले पर फिलिस्तीन ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि अमेरिका का ये फैसला अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के बिल्कुल ही खिलाफ है. फिलिस्तीन के राष्ट्रपति के प्रवक्ता नबील अबू रूदीनाह (Nabil Abu Rudinah) ने कहा, 'वाशिंगटन को कोई अधिकार नहीं है कि वो किसी अंतर्राष्ट्रीय प्रस्ताव के खि़लाफ जाकर इजरायली सेटलमेंट को वैध होने की मान्यता दे.'आपको बता दें कि वेस्ट बैंक में इजरायली नागरिकों के रहने पर फिलिस्तीन और अरब दुनिया का आरोप है कि वेस्ट वेस्ट पर कब्जे के बाद इजरायल ने वहां रहने वाले फिलिस्तीनी लोगों को जबरदस्ती उनके घरों से निकाल दिया और वहां अपने नागरिकों यानी यहूदियों को बसा दिया ऐसा करना अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के बिल्कुल खिलाफ है.

दरअसल साल 2016 में संयुक्त राष्ट्र (United Nation) ने एक प्रस्ताव में माना था कि वेस्ट बैंक में इजरायली नागरिकों का रहना अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पूरी तरीके से उल्लंघन है क्योंकि चौथे जेनेवा समझौते (Geneva Convention) का आर्टिकल 49 कहता है कि अगर कभी दो देशों के बीच युद्ध होता है तो युद्ध जीतने वाला देश कभी भी हारे वाले देश से युद्ध में जीती हुई जमीन पर पहले से रह रहे लोगों को ना तो निकाल सकता है और ना ही उनको किसी दूसरी जगह रहने के लिए स्थानांतरित कर सकता है अथवा उस जगह के बदले किसी दूसरी जगह पर जाने के लिए मजबूर कर सकता है.

इसके अलावा चौथे जेनेवा समझौते में ये भी करार हुआ था कि  युद्ध जीतने वाला देश कभी भी हारे वाले देश से युद्ध में जीती हुई जमीन पर पहले से बनी हुई निजी या सरकारी बिल्डिंगों और संपत्तियों को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा जब तक कि किसी मिलिट्री ऑपरेशन के लिए किसी बिल्डिंग को तोड़ना बहुत जरूरी ना हो.

जेनेवा समझौता क्या है ?

साल 1864 में लड़ाई के दौरान गिरफ्तार किए गए युद्धबंदियों (Prisoners of War), नागरिकों (Citizens) के अधिकारों और घायलों की की मदद करने के लिए रेड क्रॉस (Red Cross) के संस्थापक हेनरी डुनेंट के प्रयासों से पहली बार जेनेवा समझौता हुआ. अब कुल 4 जेनेवा समझौते हो चुके हैं. जिनमें पहला जेनेवा समझौता 1864, दूसरा 1906, तीसरा 1929 और चौथा 1949 में हुआ था.

पहला जेनेवा समझौता 1864

1. इसमें युद्ध के दौरान घायल हुए सैनिकों को सुरक्षा देने एक समझौता हुआ.
2. इस समझौते में चिकित्सा-कर्मियों, धार्मिक लोगों और चिकित्सा वाहनों की सुरक्षा की बात पर समझौता हुआ.

दूसरा जेनेवा समझौता 1906

1. इसमें समुद्री युद्धों और उससे जुड़े नियमों को पुराने समझौते में जोड़ा गया.
2. इस समझौते में समुद्री युद्ध के दौरान घायल सैनिकों की रक्षा और अधिकारों के लेकर नए नियमों को जोड़ा गया.

तीसरा जेनेवा समझौता 1929

1. इस समझौते में युद्ध के दौरान कैद किये गए सैनिकों यानी युद्धबंदियों के अधिकारों पर करार हुए.
2. इसमें युद्धबंदियों को युद्ध खत्म होने के बाद रिहा करने को लेकर समझौता हुआ.

चौथा जेनेवा समझौता 1949

1. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सबक लेते हुए युद्ध में कब्जे वाले या युद्ध वाले क्षेत्र के साथ साथ वहां रहने वाले नागरिकों के अधिकारों पर कई करार हुए.
2. युद्ध में गिरफ्तार किए गए युद्धबंदियों के साथ कैसा व्यवहार हो इस पर भी समझौता हुआ.