साहित्य अकादमी ने रुख साफ नहीं किया तो पुरस्कार लौटा दूंगी: अनिता देसाई

प्रसिद्ध उपन्यासकार अनिता देसाई ने कहा है कि अगर साहित्य अकादमी यह साफ नहीं करता कि वह एक सरकारी संस्था नहीं बल्कि एक स्वतंत्र संस्था है, जो अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा, सवाल एवं असहमति के अधिकार के लिए बनी है तो वह अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा देंगी। इससे पहले कन्नड़ लेखक एम एम कलबुर्गी की हत्या और दादरी हत्याकांड समेत दूसरे मुद्दों को लेकर पिछले कुछ हफ्तों में कम से कम 34 लेखकों ने अपने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए।

साहित्य अकादमी ने रुख साफ नहीं किया तो पुरस्कार लौटा दूंगी: अनिता देसाई

लंदन: प्रसिद्ध उपन्यासकार अनिता देसाई ने कहा है कि अगर साहित्य अकादमी यह साफ नहीं करता कि वह एक सरकारी संस्था नहीं बल्कि एक स्वतंत्र संस्था है, जो अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा, सवाल एवं असहमति के अधिकार के लिए बनी है तो वह अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा देंगी। इससे पहले कन्नड़ लेखक एम एम कलबुर्गी की हत्या और दादरी हत्याकांड समेत दूसरे मुद्दों को लेकर पिछले कुछ हफ्तों में कम से कम 34 लेखकों ने अपने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिए।

अनिता ने पेन इंटरनेशनल की ओर से जारी एक बयान में कहा, ‘अगर यह इस तरह की नीति घोषित करने और आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं है तो मैं अपने साथी लेखकों के साथ एकजुटता दिखाते हुए अकादमी की अपनी सदस्यता एवं वह पुरस्कार त्यागने के लिए बाध्य हो जाउंगी जो उसने मुझे ज्यादा उम्मीद भरे दिनों में एक युवा लेखिका के तौर पर दिया था।’ 78 साल की लेखिका को 1978 में उनके उपन्यास ‘फायर ऑन दि माउंटेन’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था।

उन्होंने कहा कि उनका जन्म एक ऐसे भारत में हुआ जिसके संविधान में लोकतंत्र, बहुलतावाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निहित थी। लेखिका ने कहा, ‘मैं वर्तमान काल के उस भारत को नहीं जानती जहां ‘हिन्दुत्व’ के बैनर तले भय एवं कट्टरता लेखकों, विद्वानों और धर्मनिरपेक्ष एवं तर्कसंगत सोच में विश्वास करने वाले सभी लोगों की आवाज दबाना चाहती हैं।’  उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में जहां असहमति, आलोचना या तर्कसंगत सोच को बुलंद करने वाले लोगों के लिए कोई सुरक्षा या समर्थन नहीं है, किसी भी तरह का कोई बौद्धिक या कलात्मक काम नहीं हो सकता।

 

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