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ZEE जानकारी: जम्मू-कश्मीर पर डोनाल्ड ट्रंप ने बोला झूठ

आपको बताएंगे कि कैसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने Donald Trump से मुलाकात के दौरान कश्मीर के विषय पर सवालों वाली Fixing की थी. 

ZEE जानकारी: जम्मू-कश्मीर पर डोनाल्ड ट्रंप ने बोला झूठ

आज हम सबसे पहले जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के अधूरे ज्ञान और फर्ज़ीवाड़े का विश्लेषण करेंगे. और आपको तस्वीरों की मदद से ये बताएंगे, कि कैसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने Donald Trump से मुलाकात के दौरान कश्मीर के विषय पर सवालों वाली Fixing की थी. और इसी Fixing में दुनिया के सबसे ताकतवर देश का राष्ट्रपति फंस गया. 

कल हुई मुलाकात के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति ने कश्मीर पर एक बहुत ही विवादित बयान दिया. और इमरान ख़ान से कहा, कि Osaka में G20 Summit के दौरान जब उनकी मुलाकात भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई थी. तब नरेंद्र मोदी ने कश्मीर के मुद्दे पर Donald Trump को मध्यस्थता करने की बात कही थी. Donald Trump के इस बयान के बाद भारत में राजनीतिक भूचाल आ गया. और विपक्षी पार्टियां देश के प्रधानमंत्री से सफाई मांगने लगीं.

हालांकि, कल रात विदेश मंत्रालय ने और आज सुबह खुद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद के दोनों सदनों में साफ शब्दों में कह दिया है, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Donald Trump से ना तो ऐसी कोई बात कही. और ना ही Donald Trump से कश्मीर के विषय पर मध्यस्थ बनने का अनुरोध किया. Donald Trump की टिप्पणी से भारत का विपक्ष हमलावर हो गया है. 

जबकि दूसरी तरफ अमेरिका में कश्मीर मुद्दे पर Trump की आपत्तिजनक टिप्पणी को Amate-urish और Embarrassing कहा जा रहा है. और ऐसे लोगों में अमेरिका के Democratic Party के सदस्य Brad Sherman शामिल हैं. जिन्होंने Trump के बयान के बाद अमेरिका में भारत के राजदूत से माफी मांगी है. और साफ कर दिया है, कि जो लोग दक्षिण एशिया की विदेश नीति को समझते हैं, उन्हें अच्छी तरह मालूम है, कि कश्मीर के विषय पर भारत ने हमेशा से किसी तीसरी पार्टी की मध्यस्थता से इंकार किया है. उन्होंने ये भी कहा, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसी टिप्पणी कभी कर ही नहीं सकते. Donald Trump को कश्मीर विवाद का ज्ञान नहीं है. उनकी टिप्पणी ना सिर्फ भ्रमित करने वाली है. बल्कि Trump ने ऐसी बात कहकर अमेरिका को शर्मिन्दा कर दिया है.

इस ख़बर में कई सारे पहलू हैं, जो विश्लेषण की मांग करते हैं. और चूंकि, पूरी ख़बर के केंद्रबिन्दु में कश्मीर है. इसलिए हमने सोचा, क्यों ना आज का DNA टेस्ट सीधे कश्मीर से किया जाए. और यहीं से Donald Trump और इमरान ख़ान को Expose किया जाए. सबसे पहले इमरान ख़ान की सवालों वाली फिक्सिंग की बात करते हैं. इन दोनों नेताओं ने कल 5 या 10 मिनट नहीं. बल्कि पूरे 40 मिनट तक पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया. ध्यान देने वाली बात ये थी, कि White House में मौजूद अमेरिकी पत्रकारों की दिलचस्पी इरान और North Korea में थी. क्योंकि वो उन्हीं देशों से संबंधित प्रश्न पूछ रहे थे. लेकिन, पाकिस्तानी पत्रकारों के ज़्यादातर सवाल, अफगानिस्तान....भारत और कश्मीर के इर्द-गिर्द घूम रहे थे.

सवालों की भूमिका इस प्रकार बनाई गई थी, जैसे पाकिस्तानी पत्रकार अफगानिस्तान के रास्ते कश्मीर का मुद्दा उठाना चाहते थे. और हुआ भी बिल्कुल ऐसा ही. कुछ मौकों पर ऐसा भी देखा गया, जब इमरान ख़ान पाकिस्तानी पत्रकारों को इशारा करते हुए देखे गए. आप ये भी कह सकते हैं, कि इमरान ख़ान ने पहले से ही सवालों की फिक्सिंग कर ली थी. क्योंकि, कश्मीर एजेंडे में नहीं था. 40 मिनट के दौरान इमरान ख़ान की Body Language देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे उन्हें पहले से मालूम था, कि कौन सा पत्रकार, किस वक्त, कौन सा सवाल पूछेगा ? इसलिए कश्मीर के मुद्दे पर Trump के विवादित बयान को सुनने के लिए आपको एक-एक करके वो सारे सवाल और उनके जवाब सुनने होंगे. जिसने कश्मीर वाले प्रश्न की भूमिका बांधी.

सबसे पहले एक पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत और अमेरिका के मज़बूत रिश्तों का ज़िक्र किया. और Trump से पूछा, कि क्या पाकिस्तान और अमेरिका के बीच मज़बूत पार्टनरशिप हो सकती है. जब Trump इस सवाल का जवाब दे रहे थे, उस वक्त इमरान ख़ान ने किसी पत्रकार की तरफ इशारा किया. पहले आप ये पूरा Sequence देखिए.

मिस्टर प्रेज़ीडेंट, पाकिस्तान और अफगानिस्तान लम्बे समय तक आपके सहयोगी रहे. आतंकवाद और अन्य विषयों पर आपकी राय क्या है ? भारत और अमेरिका के रिश्ते काफी मज़बूत हैं, इसे देखते हुए पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते कितने मज़बूत हो सकते हैं ? 

डॉनल्ड ट्रम्प, राष्ट्रपति, अमेरिका
ये काफी लम्बा सवाल है. जवाब देने में घंटों बीत जाएंगे. मैं कहूंगा, कि भारत के साथ हमारे रिश्ते काफी अच्छे हैं. मैं ये भी जानता हूं, कि आप दोनों के बीच रिश्ते सामान्य नहीं हैं. लेकिन आज हमारी बातचीत में भारत पर गहराई से चर्चा होगी. हो सकता है, हम कुछ मदद कर पाएं. हम अफगानिस्तान के मुद्दे पर भी बात करेंगे. हम वहां से अपने सैनिक कम कर रहे हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे. इस दिशा में हम पाकिस्तान के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. आज भारत और अफगानिस्तान के मुद्दे पर ज़रुर बात होगी.
((इसके बाद इमरान ख़ान ने इशारा किया किसी की तरफ))

अब दूसरे सवाल पर आते हैं. ये प्रश्न इमरान ख़ान और Donald Trump के व्यक्तित्व पर आधारित था. और जब पाकिस्तानी पत्रकार इमरान ख़ान की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे थे. उस वक्त पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के चेहरे पर राहत वाली मुस्कान थी.
((इस सवाल के दौरान इमरान खान मुस्कुरा रहे थे))

पाकिस्तानी पत्रकार
सर मेरा नाम जहांगीर बशीर है और मैं पाकिस्तान के ary news tv से हूं. लिंडसे ग्राहम ने जब इमरान खान से मुलाकात की थी, तो उन्होंने कहा था, कि आप दोनों का व्यक्तित्व एक जैसा है. जिस तरह आपने सारे वादे पूरे किए, ठीक इसी तरह इमरान ख़ान भी अपने वादे पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं. आप इस पर क्या कहेंगे ?

डॉनल्ड ट्रम्प, राष्ट्रपति, अमेरिका
मुझे लगता है कि आज हमारी बैठक काफी अच्छी रहेगी. मैं जानता हूं, कि ये एक महत्वपूर्ण मीटिंग है. पाकिस्तान, अफगानिस्तान में हमारी मदद कर सकता है. इस वक्त हम किसी पुलिसमैन की तरह हैं. अभी हम कोई युद्ध नहीं लड़ रहे. अगर हमें अफगानिस्तान में युद्ध लड़ना हो, तो मैं सिर्फ एक हफ्ते में युद्ध जीत सकता हूं. मैं 10 मीलियन लोगों की हत्या नहीं करना चाहता. अफगानिस्तान को लेकर मेरे पास प्लान तैयार है. अफगानिस्तान सिर्फ 10 दिनों के भीतर पृथ्वी से गायब हो सकता है. और मैं वो रास्ता नहीं अपनाना चाहता. इसीलिए हम पाकिस्तान और अन्य देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. हम पुलिसमैन बने रहना नहीं चाहते. क्योंकि, इस वक्त हम पुलिसमैन ही हैं. हम वहां 19 सालों से हैं. जो बिल्कुल बकवास है. पाकिस्तान उसमें हमारी मदद कर रहा है. क्योंकि हम पुलिसमैन की भूमिका में नहीं रहना चाहते. 

इमरान ख़ान की मुस्कुराहट बता रही थी, कि सारे सवाल पहले से तय किए गए Plan के तहत ही पूछे जा रहे थे. इसके बाद तीसरे प्रश्न की बारी आई. इस सवाल में पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की सेना के बलिदान का ज़िक्र किया. और Donald Trump से पूछा, कि क्या अमेरिका पाकिस्तान के लिए किसी नए पैकेज का ऐलान करेगा ?

पाकिस्तानी पत्रकार
सर मैं पाकिस्तान के पीटीवी नेटवर्क से हूं. पाकिस्तानी सेना ने आतंक के खिलाफ युद्ध लड़ा है और कई बलिदान भी दिए हैं. लेकिन पाकिस्तान पर हमेशा शक किया गया. अमेरिका ने आर्थिक मदद भी सस्पेंड कर दिया था. इस वक्त पाकिस्तान की आर्थिक हालत ठीक नहीं है. तो क्या आप किसी नए पैकेज का ऐलान करेंगे ?

डॉनल्ड ट्रम्प, राष्ट्रपति, अमेरिका
हम पाकिस्तान को 1.3 बीलियन की आर्थिक मदद दे रहे थे. लेकिन समस्या ये थी, कि इमरान ख़ान से पहले पाकिस्तान हमारे लिए कुछ नहीं कर रहा था. वो हमारे खिलाफ जा रहे थे. डेढ़ साल पहले मैंने वो मदद रोक दी थी. मुझे लगता है, कि इस वक्त पाकिस्तान के साथ हमारे संबंध पहले से बेहतर हैं. और भविष्य में ये संबंध और भी बेहतर होने की गुंजाईश है. हम उस दिशा में काम कर रहे हैं. मेरे कई पाकिस्तानी मित्र हैं. जो न्यूयॉर्क में रहते हैं. वो काफी स्मार्ट हैं, मज़बूत हैं, इमरान ख़ान की तरह. >>

शुरुआत के तीन सवालों तक माहौल बन चुका था. और अब बारी थी, कश्मीर वाले प्रश्न की. हालांकि, इस गंभीर सवाल से पहले माहौल को हल्का-फुल्का बनाया गया. Trump ने पाकिस्तानी पत्रकारों से हंसी-मज़ाक किया. और पाकिस्तानी पत्रकारों ने ऐसे सवाल पूछे, जिससे Trump को अहसास दिलाया जाए, कि 18 सालों में पाकिस्तान ने अमेरिका के लिए ऐसा क्या नहीं किया, जो उसे पसंद नहीं आया. ऐसा करते-करते, आखिरकार एक पाकिस्तानी पत्रकार ने कश्मीर के मुद्दे पर पहले से फिक्स किया हुआ सवाल पूछ दिया. और इमरान ख़ान की फिक्सिंग में Donald Trump फंस गए. दिलचस्प बात ये थी, कि इमरान ख़ान ने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तानी पत्रकार के प्रश्न को पूरा भी नहीं होने दिया. और सवाल पूछते वक्त ही अपना जवाब देने लगे. अब आप ये पूरा Sequence देखिए.

डॉनल्ड ट्रम्प, राष्ट्रपति, अमेरिका
क्या आप पाकिस्तान से हैं ? अच्छा है, मुझे कुछ पाकिस्तानी रिपोर्टर्स चाहिए. मैं पाकिस्तानी रिपोर्टर्स को ज़्यादा पसंद करता हूं, अमेरिका के रिपोर्टर्स के मुक़ाबले. 

पाकिस्तानी पत्रकार
पाकिस्तान ने इन 18 सालों में ऐसा क्या नहीं किया, जो अमेरिका को अच्छा नहीं लगा.

डॉनल्ड ट्रम्प, राष्ट्रपति, अमेरिका
मुझे लगता है इस दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका की इज्ज़त नहीं की. पाकिस्तान बहुत कुछ कर सकता था. 

((सवाल ख़त्म नहीं हुआ...लेकिन इमरान ख़ान ने कहा समझ गया))
पाकिस्तानी पत्रकार
मिस्टर प्रेज़ीडेंट में अफगानिस्तान के अलावा दक्षिण एशिया में सुरक्षा को लेकर एक और ख़तरा है. और वो है कश्मीर विवाद. जिसका अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है. 

इमरान खान, प्रधानमंत्री, पाकिस्तान
मैं प्रेज़ीडेंट ट्रम्प से कहूंगा, कि अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश है. सबकॉन्टिनेंट में शांति स्थापित करने में अमेरिका बड़ी भूमिका निभा सकता है. सबकॉन्टिनें में करोड़ों लोग रहते हैं. लेकिन कश्मीर में सबको बंधक बनाकर रखा गया है. और मुझे लगता है, कि दुनिया के सबसे ताकतवर देश का राष्ट्रपति दोनों देशों को साथ ला सकता है. मैं अपनी तरफ से कह सकता हूं, कि हमने अपनी पूरी कोशिश की. हमने बातचीत के लिए भारत से पहल की. लेकिन अभी तक कोई रास्ता नहीं निकला. मुझे उम्मीद है प्रेज़ीडेंट ट्रम्प इस प्रॉसेस को आगे बढ़ाएंगे.

डॉनल्ड ट्रम्प, राष्ट्रपति, अमेरिका
मैं दो हफ्तों पहले प्रधानमंत्री मोदी के साथ था और हमने इस विषय पर बात भी की. उन्होंने मुझसे कहा कि क्या आप मध्यस्थ या पंच बनना चाहोगे ? मैंने पूछा, कहां ? उन्होंने कहा, कश्मीर. क्योंकि ये विवाद कई वर्षों से चला आ रहा है. जब मुझे कश्मीर विवाद की वास्तविकता पता चली तो मैं अचंभित था. मुझे लगता है कि वो इस समस्या का समाधान चाहते हैं. आप भी इसका समाधान चाहते हैं. अगर मैं मध्यस्थ बनकर किसी प्रकार से मदद कर पाया, तो ज़रुर करुंगा. ये यकीन करना मुश्किल है, कि दो देश, जिनके पास इतना अच्छा नेतृत्व है, वो इस प्रकार की समस्या नहीं सुलझा सकते. अगर आप चाहते हैं, कि मैं मध्यस्थ बनूं या पंच बनूं, तो मुझे ऐसा करने में खुशी होगी. 

इमरान खान, प्रधानमंत्री, पाकिस्तान
प्रेज़ीडेंट मैं आपसे कह सकता हूं, कि आपके लिए करोड़ों लोग दुआएं करेंगे, अगर आपने मध्यस्थता करके इस विवाद का हल ढूंढ निकाला. 

डॉनल्ड ट्रम्प, राष्ट्रपति, अमेरिका
इसका हल निकलना ही चाहिए. उन्होंने भी मुझसे यही पूछा था. मुझे लगता है, कि हम उनसे बात करेंगे या मैं उनसे बात करुंगा. देखते हैं, क्या हो सकता है. क्योंकि मैंने कश्मीर के बारे में बहुत कुछ सुना है. इतना खूबसूरत नाम है. ये दुनिया की सबसे खूबसूरत जगह होनी चाहिए. लेकिन इस वक्त हर जगह बम धमाके हो रहे हैं. हालात ठीक नहीं हैं. और ऐसा कई सालों से है. मुझे खुशी होगी अगर मैं कुछ कर पाया तो.

Trump के विवादित बयान के बाद जब अमेरिका की फजीहत हुई. तो उसने Damage Control करने की कोशिश की. 

अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, कि कश्मीर, भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मुद्दा है. और Trump प्रशासन को खुशी होगी अगर दोनों देश एक साथ बैठकर बात करें. और अमेरिका इसमें सहयोग देने के लिए तैयार है. US State Department के प्रवक्ता ने ये भी कहा, कि दोनों देशों के बीच बातचीत का माहौल तभी पैदा होगा, जब पाकिस्तान अपनी ज़मीन पर मौजूद आतंकवादियों और उनके संगठनों के खिलाफ मज़बूत कदम उठाएगा. 

कश्मीर के मुद्दे पर भारत का भी Stand हमेशा से यही रहा है. पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत, सीमा पार से जारी आतंकवाद ख़त्म होने के बाद, लाहौर घोषणापत्र और शिमला समझौते के अंतर्गत ही होगी. लेकिन, दुख की बात ये है, कि राष्ट्रहित से जुड़े इतने गंभीर विषय पर भी हमारे देश में ओछी राजनीति शुरु हो गई है. 

राहुल गांधी ने तो ये तक कह दिया है, कि एक कमज़ोर विदेश मंत्रालय के इंकार से काम नहीं चलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद देश को बताना होगा, कि Trump से मुलाकात के दौरान उनकी क्या बातचीत हुई ? राहुल गांधी ने ये भी आरोप लगाया है, कि अगर इस बात में सच्चाई है, तो प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के हितों और शिमला Agreement के साथ समझौता किया है. 

लेकिन हमें ये कहने में कोई संकोच नहीं है, कि भारत के विदेश मंत्रालय को कमज़ोर बताकर, राहुल गांधी ने देश की मर्यादा को चोट पहुंचाई है. उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर की काबिलियत पर शक किया है. और भारत के प्रधानमंत्री से उस प्रश्न का जवाब मांगा है, जिसका उत्तर सही मायनों में अमेरिका के राष्ट्रपति को देना चाहिए. क्योंकि, ये बेतुका बयान भी Donald Trump ने ही दिया है. और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है.

अमेरिकी अखबार The Washington Post की Fact Checkers टीम ने कुछ दिनों पहले ही Trump के संदिग्ध बयानों का विश्लेषण करते हुए उनकी पोल खोली थी. 

और कहा था, कि राष्ट्रपति बनने के बाद 869 दिनों में Donald Trump ने 10 हज़ार 796 झूठे और गलतफहमी पैदा करने वाले दावे किए. 

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018 में Trump ने प्रतिदिन 17 झूठी बातें कहीं.

इमीग्रेशन के मुद्दे पर उन्होंने एक हज़ार से ज़्यादा बार झूठे बयान दिए. 

इस दौरान विदेश नीति पर 900 बार, व्यापार पर 854 बार, अर्थव्यवस्था पर 790 बार और अन्य विषयों पर 899 झूठ बोले. 

यानी जिस देश के राष्ट्रपति को प्रतिदिन 17 झूठ बोलने की आदत हो. उससे सही और सच्ची बातों की उम्मीद कैसे की जा सकती है.
इन आंकड़ों को देखकर तो यही कहा जाएगा, कि Osaka में Donald Trump और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मुलाकात भी हुई थी. बात भी हुई थी. लेकिन इस बातचीत में दूर-दूर तक कश्मीर का ज़िक्र नहीं था. हालांकि, भारत का विपक्ष Trump के इसी झूठ के सहारे, राष्ट्रहित से समझौता करते हुए अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहा है.