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ZEE जानकारी: आस्ट्रेलिया के चुनाव के बारे में यह बात जानना है जरूरी!

भारत में अभी दो चरणों का चुनाव बाकी है. इसलिए अलग-अलग पार्टियों के नेता चुनाव प्रचार में पूरी ताकत लगा रहे हैं. बिल्कुल ऐसी ही स्थिति ऑस्ट्रेलिया में भी है. 

ZEE जानकारी: आस्ट्रेलिया के चुनाव के बारे में यह बात जानना है जरूरी!

अब हम चुनाव के नज़रिए से भारत और ऑस्ट्रेलिया का एक छोटा सा विश्लेषण करेंगे. क्योंकि, नई सरकार चुनने के लिए सिर्फ भारत में घमासान नहीं हो रहा. बल्कि ऑस्ट्रेलिया में भी 18 मई को Federal Election होना है. यानी भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही देश करीब-करीब एक ही समय में अपनी नई सरकार चुनेंगे. भारत में अभी दो चरणों का चुनाव बाकी है. इसलिए अलग-अलग पार्टियों के नेता चुनाव प्रचार में पूरी ताकत लगा रहे हैं. बिल्कुल ऐसी ही स्थिति ऑस्ट्रेलिया में भी है. 

चुनावी गर्मी में भारत के नेताओं को कहीं थप्पड़ खाने पड़ रहे हैं. तो कोई नेता, आम जनता के आक्रोश से भरे सवालों को झेल रहा है. इस लिहाज़ से ऑस्ट्रेलिया भी बिल्कुल हमारे जैसा ही है. क्योंकि, वहां भी Election Campaign के दौरान नेताओं पर Voters का गुस्सा फूट रहा है. ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा प्रधानमंत्री Scott Morrison के साथ कल एक ऐसा ही वाकया हुआ. जब एक महिला प्रदर्शनकारी ने उनके सिर पर अंडा फोड़ने की कोशिश की. 

हालांकि, भारत और ऑस्ट्रेलिया में एक छोटा सा फर्क भी है. हमारे देश में अगर किसी नेता के साथ इस प्रकार की अमर्यादित हरकत की जाती है. तो उसपर भी राजनीति शुरु हो जाती है. भारत के प्रधानमंत्री को यहां का विपक्ष खुलकर गालियां देता है. उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता है. लेकिन इस मामले में ऑस्ट्रेलिया थोड़ा सा सभ्य देश है. वहां के प्रधानमंत्री के सिर पर अंडा फोड़ने की कोशिश से विपक्ष के नेता नाराज़ हो गए हैं. और सभी एक स्वर में इस घटना की निन्दा कर रहे हैं. 

वैसे ऑस्ट्रेलिया में नेताओं के सिर पर अंडा मारना या अंडा फेंकने की घटना नई नहीं है. इसी वर्ष मार्च के महीने में एक 17 साल के लड़के ने Australian Senator, Fraser Anning के सिर पर अंडा फोड़ दिया था. ये वही Senator था, जिसने New Zealand के मस्ज़िद में हुए हमलों के लिए अप्रवासी मुस्लिमों को दोषी ठहराया था.

ये तो हुई राजनीति में अपने विरोधियों के सम्मान की बात. लेकिन अब आपको एक दिलचस्प जानकारी देते हैं. जब हम इस ख़बर पर Research कर रहे थे. तो हमें ऑस्ट्रेलिया में वोटिंग से संबंधित एक ज़रुरी बात पता चली. 

Australian Electoral Commission की Website पर एक ज़रुरी सूचना दी गई है. जिसमें लिखा है, कि ऑस्ट्रेलिया में 18 या उससे ज़्यादा उम्र के हर नागरिक को वोटिंग करना Compulsory यानी अनिवार्य है. जब हमने गहराई से इस तथ्य की पड़ताल की. तो पता चला, कि ऑस्ट्रेलिया में वोटिंग ना करना एक अपराध है. 

ऑस्ट्रेलिया के Federal Election में अगर कोई व्यक्ति वोट नहीं डाल पाता, तो उसे इसके लिए एक जायज़ वजह बतानी पड़ती है. अगर कोई व्यक्ति वोट ना करने की सही वजह नहीं बता पाता, तो ये Commonwealth Electoral Act 1918, के Section 245 के तहत एक अपराध है. इसके तहत First-Time Offenders को 975 रुपये का जुर्माना देना पड़ता है. जबकि, बार-बार Violation करने वालों को क़रीब ढाई हज़ार रुपये का जुर्माना देना पड़ता है. Australian Electoral Commission के मुताबिक, वहां के नागरिकों के लिए वोटिंग सिर्फ अधिकार नहीं है. बल्कि वोट डालना उनकी ज़िम्मेदारी है, उनका कर्तव्य है. 

इस वक्त दुनिया के क़रीब 22 देशों में Compulsory Voting का प्रावधान है. और इन 22 देशों में से 11 देशों में Compulsory Voting को कानून के तौर पर लागू किया जाता है. जिसमें जुर्माने का प्रावधान होता है. 

हालांकि, वोट डालने के लिहाज़ से Belgium एक ऐसा देश है, जो दुनिया के बाकी देशों के मुक़ाबले कहीं आगे है. पिछले साल Belgium में हुए Federal Election में 90 प्रतिशत वोटर्स ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. जबकि दूसरी तरफ अमेरिका में 2016 के राष्ट्रपति पद के चुनाव में सिर्फ 61 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला. 2018 में अमेरिका के Mid-Term Election में ये संख्या सिर्फ 49 फीसदी थी. Belgium में ज़्यादा वोटिंग की वजह ये है, कि वहां वोटिंग अनिवार्य है. जो लोग वोट नहीं देते, उन्हें जुर्माना देना पड़ता है. पहली बार पकड़े जाने पर साढ़े सात सौ रुपये और दूसरी बार पकड़े जाने पर क़रीब 2 हज़ार रुपये का जुर्माना है. अगर कोई वोटर 15 वर्षों में 4 बार वोट नहीं डालता, तो electoral register से उसका नाम 10 साल के लिए हटा दिया जाता है. सिर्फ इतना ही नहीं, ऐसे लोगों को इन 10 वर्षों के दौरान सरकारी नौकरी में कोई Promotion नहीं मिलता. यानी जिस देश की 18 फीसदी आबादी Government Sector में काम करती हो, वहां पर ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है. 

इसका एक दिलचस्प पहलू ये भी है, कि पिछले 15 वर्षों से वहां पर किसी को जुर्माना नहीं देना पड़ा है. क्योंकि लोग अपनी ज़िम्मेदारी समझते हैं. और वोट देने जाते हैं. Belgium के बारे में एक बात काफी मशहूर है, कि अगर कोई व्यक्ति वहां पर अपने पड़ोसी से बात करना चाहता है. तो उसका सबसे अच्छा तरीका ये है, कि वो पोलिंग स्टेशन में जाए वहां उसे अपना पड़ोसी ज़रूर मिल जाएगा . ठीक इसी तरह ब्राज़ील में जो लोग वोट नहीं देते, वो पब्लिक सेक्टर में नौकरी नहीं कर सकते. उन्हें पासपोर्ट नहीं मिलता. और ना ही उन्हें सरकारी बैंक से लोन मिलता है. भारत जैसे देश में भी Compulsory Voting को लागू करना अच्छा कदम साबित हो सकता है. ताकि लोग बड़ी से बड़ी संख्या में वोट डालें. और लोकतंत्र के सबसे बड़े उत्सव में अपनी भागीदारी निभाएं.