ZEE जानकारी: बौद्धिक संपदा की चोरी करके शक्तिशाली बनना चाहते हैं कुछ देश

अमेरिका की एक मशहूर पत्रिका Scientific American ने प्राणायाम को एक नया नाम देकर उसके फ़ायदों के बारे में एक लेख छापा है. इस लेख में प्राणायाम को अंग्रेज़ी में Cardiac Coherence Breathing Exercises कहा गया है. 

ZEE जानकारी: बौद्धिक संपदा की चोरी करके शक्तिशाली बनना चाहते हैं कुछ देश

अब आपसे एक सवाल - क्या योग, प्राणायाम, अनुलोम विलोम या आयुर्वेद की चोरी की जा सकती है? ये सवाल सुनकर आप भी यही कहेंगे कि ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि ये एक तरह की बौद्धिक संपदा है और किसी तरह के ज्ञान, किसी विद्या या क्रिया की चोरी नहीं की जा सकती.  लेकिन 21वीं सदी में बड़े बड़े देश, मार्केटिंग के दम पर.. पूरी दुनिया में फैले ज्ञान और बौद्धिक संपदा की चोरी करके शक्तिशाली बनना चाहते हैं. और अमेरिका ऐसे देशों में सबसे आगे है.

अमेरिका की एक मशहूर पत्रिका Scientific American ने प्राणायाम को एक नया नाम देकर उसके फ़ायदों के बारे में एक लेख छापा है. इस लेख में प्राणायाम को अंग्रेज़ी में Cardiac Coherence Breathing Exercises कहा गया है . इसका शाब्दिक अर्थ है - दिल को स्वस्थ रखने वाला सांसों का व्यायाम. वैसे प्राणायाम की क्रिया को सांसों के एक व्यायाम तक सीमित करना ये बताता है कि अमेरिका के लोग प्राणायाम की संपूर्ण शक्ति को ठीक से समझ नहीं पाए हैं. प्राणायाम... योग का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है. जिसका शाब्दिक अर्थ है...प्राण को लम्बा करना यानी जीवनीशक्ति को बेहतर बनाना . ये शरीर के किसी एक अंग को स्वस्थ बनाने का व्यायाम नहीं है... बल्कि ये पूरे जीवनकाल में, स्वस्थ बने रहने का असरदार तरीका है . इसकी खोज करीब 6 हज़ार साल पहले भारत के ऋषि मुनियों द्वारा की गई थी . लेकिन प्राचीन भारतीय संस्कृति से ज्ञान चुराकर उसे नया नाम देना अमेरिका की पुरानी आदत रही है . 

अंग्रेज़ी के वाक्यों का इस्तेमाल करके अमेरिका ने प्राणायाम को एक वैज्ञानिक खोज बताने की कोशिश की है. ये एक तरह से मार्केटिंग वाला हथकंडा है. आने वाले कुछ वर्षों में जब मार्केटिंग और पैसे के दम पर.. ये नाम प्रचारित हो जाएगा तो दुनिया भर के लोग प्राणायाम को Cardiac coherence breathing exercises के नाम से जानेंगे. हो सकता है कि भविष्य में अमेरिका, प्राणायाम के इस अंग्रेज़ी नाम का Patent करवा ले, और प्राणायाम को अपनी धरोहर बना ले.  अमेरिका के लिए ये कोई नई बात नहीं है.. इस तरह की बौद्धिक लूटपाट वो पहले भी कर चुका है. 

वर्ष 1995 में अमेरिका की एक कंपनी ने नीम को पेटेंट करवाने की कोशिश की थी लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं हो पाया. 

इसके बाद Turmeric यानी हल्दी को अमेरिका ने अपनी धरोहर बनाने की कोशिश की लेकिन भारत के कानूनी विरोध के बाद उसे पीछे हटना पड़ा . 

आज आपको जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका में भारतीय मूल के मसाले जैसे लौंग, कालीमिर्च, जीरा, सौंफ, हल्दी और अदरक पर लंबे समय तक रिसर्च किया गया और ये पाया कि स्वस्थ रहने के लिए ये सारी चीज़ें बहुत लाभकारी हैं . 

अमेरिका के कई Restaurants में हल्दी से बनाए गये अलग अलग तरह के Drinks आपको आसानी से मिल जाऐंगे 

आपको य़े जानकर दुख होगा कि इस वक्त आयुर्वेद का सबसे बड़ा बाज़ार.. भारत नहीं.. बल्कि अमेरिका है. जो पूरी दुनिया के 41 प्रतिशत आयुर्वेदिक उत्पादों का इस्तेमाल करता है. 

यानी अमेरिका... भारत के सामान पर अपना ठप्पा लगाकर.. उसे अपना बना लेता है और उससे करोड़ों-अरबों रूपये का मुनाफ़ा कमाता है . 

आज अमेरिका की अर्थव्यस्था में योग का बहुत बड़ा योगदान है. अमेरिका में योग का बाज़ार 16 बिलियन अमेरिकी डॉलर्स यानी 1 लाख 8 हज़ार करोड़ रुपये का है. 

हो सकता है प्राणायाम को अपना अंग्रेजी नाम देकर अमेरिका.. इसका भी एक नया बाज़ार तैयार कर ले. यहां आपको ये समझने की ज़रूरत है कि दूसरे की धरोहर को हथियाने के लिए उसे अपना नाम देना बहुत आवश्यक है . इसमें भाषा ....एक हथियार का काम करती है . 

आपने नोट किया होगा कि भारत के योग को दुनिया भर में.... योगा के नाम से जाना जाता है . इसके अलावा आर्युवेद को आर्युवेदा, शहद को Honey और ग्वारपाठा को Aloe vera के नाम से जाना जाता है . ये भारत की संपदा को अपना बनाने का एक बौद्धिक तरीका है. 

ये सब सुनने में बहुत सामान्य लगता है लेकिन लंबे समय में इसका असर बहुत नकारात्मक होता है. इसलिए ऐसी कोशिशों से सावधान रहना बहुत ज़रूरी है. आज हम आपको भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी योग यात्रा के बारे में बताएंगे. ताकि दुनिया को ये याद रहे.. कि योग और प्राणायाम भारत की धरोहर हैं.