ZEE जानकारी: ISIS ने ली श्रीलंका के सीरियल बम धमाकों की जिम्मेदारी

आतंकवादी संगठन ISIS ने 300 से ज़्यादा लोगों की हत्या करने वाले इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

ZEE जानकारी: ISIS ने ली श्रीलंका के सीरियल बम धमाकों की जिम्मेदारी

अब हम आपको श्रीलंका के चर्च में हमला करने वाले Suicide Bomber की पहली तस्वीरें दिखाएंगे. आप इसे श्रीलंका की चलती-फिरती मौत भी कह सकते हैं. आम तौर पर अगर कोई व्यक्ति जींस, टी-शर्ट और पीठ पर बैग लेकर आपके बीच से गुज़रे या आपके बगल में आकर बैठ जाए. तो ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल है, कि वो कोई सामान्य व्यक्ति है या फिर आतंकवादी.

वो आदमी जिसे पता है कि वो कुछ ही मिनटों में मरने वाला है और अपने साथ सैकड़ों लोगों को मारने वाला है.. वो कैसा व्यवहार करता है, किस तरह चलता है, उसके हाव-भाव क्या होते हैं ? और उसे डर क्यों नहीं लगता? लोगों की हत्या करते हुए उसका दिल कांपता क्यों नहीं ? आतंक का ये चेहरा किसी भी रुप में आपके बगल में आकर बैठ जाएगा.और आपको अपने बगल में बैठी इस मौत का अंदाज़ा ही नहीं होगा. इसलिए आज आपको इस चलती-फिरती मौत को बहुत ध्यान से देखना चाहिए.

ये श्रीलंका के St. Sebastian Church की तस्वीरें हैं. इस तस्वीर में आप जिस व्यक्ति को पीठ पर Backpack लेकर आगे बढ़ते हुए देख रहे हैं, वो संदिग्ध आत्मघाती हमलावर है. रविवार को श्रीलंका के Negombo शहर में St Sebastian Church में प्रार्थना सभा के दौरान, बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. ये संदिग्ध हमलावर चुपचाप चर्च के अंदर दाखिल हुआ. इस दौरान चर्च में बैठे किसी भी व्यक्ति को इस बात की भनक भी नहीं लगी, कि उसकी पीठ पर विस्फोटक मौजूद है... और अगले कुछ मिनटों में क्या होने वाला है? 

ये हमलावर Suicide Mission पर था. और उसका एकमात्र मकसद था, ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की हत्या करना. आतंकवाद की विचारधारा के पीछे ना सिर्फ़ कट्टरवादी सोच है. बल्कि इसका एक जेहादी टैबलेट से भी रिश्ता है. ये जेहादी गोली खाकर ही ISIS के आतंकवादी सीरिया और इराक में इतने ख़तरनाक बन गये थे कि उन्हें रोकना मुश्किल हो रहा था. इस जेहादी गोली को कैप्टागन (Captagon) कहा जाता है. 

कैप्टागन एक मनोवैज्ञानिक गोली है. ये दवा खाने वाले व्यक्ति को एक ख़ास तरह के नशे का ऐहसास होता है. वो ज़्यादा देर तक जाग सकता है, उसे नींद नहीं आती. उसकी ऊर्जा बढ़ जाती है और उसे थकान महसूस नहीं होती. ये मनुष्य के शरीर को एक अलग Level पर ले जाती है. एक आतंकवादी को अपना मिशन पूरा करने के लिये ये दवा खिलाई जाती हैं. ISIS के आतंकवादी भी इस जेहादी टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं. 

यही वजह है कि ISIS के आतंकवादियों को हराने में, तमाम देशों की सेनाओं को कई साल लग गए. आतंकवादी इस गोली को खाकर एक सामान्य सैनिक के मुक़ाबले ज़्यादा देर तक लड़ सकते हैं. आतंकवादियों को दर्द का ऐहसास नहीं होता. वो एक मशीन की तरह लड़ते रहते हैं और खून बहाते रहते हैं. 1960 के दशक में ये टैबलेट जर्मनी में तैयार की गई थी. ये दवा ऐसे लोगों को दी जाती थी, जो किसी भी काम में अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते थे. लेकिन बाद में नशीली दवाइयों में इसका इस्तेमाल बढ़ने की वजह से 1986 में इस पर पाबंदी लगा दी गई.

रविवार को श्रीलंका में हुए आत्मघाती हमलों और धमाकों के बाद एक-एक करके कई ऐसी जानकारियां सामने आ रही हैं, जो ना सिर्फ परेशान करने वाली हैं. बल्कि श्रीलंका का पड़ोसी होने के नाते भारत के लिए बहुत चिंताजनक है. इस हमले से जुड़ी आज की सबसे बड़ी ख़बर ये है, कि आतंकवादी संगठन ISIS ने 300 से ज़्यादा लोगों की हत्या करने वाले इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

अब से थोड़ी देर पहले ISIS ने 8 आतंकवादियों की एक तस्वीर जारी की है. और बाकयादा एक प्रेस रीलिज़ जारी की है. जिसमें उसने कहा है, कि श्रीलंका में अलग-अलग जगहों पर हुए आत्मघाती हमलों और धमाकों में उसके आतंकवादियों का हाथ था. हमले के लिए ISIS ने IED का भी इस्तेमाल किया. और उनका मुख्य मकसद ईसाई धर्म के लोगों को निशाना बनाना था. इसीलिए चर्च और उन होटल्स में धमाके किए गए, जहां बड़ी संख्या में ईसाई धर्म को मानने वाले और विदेशी नागरिक मौजूद थे. आप ISIS का दुस्साहस देखिए कि आतंकवादी हमला करने के बाद उसने बाकायदा प्रेस रिलीज़ जारी करके हमले की ज़िम्मेदारी ले रहा है.

इस बीच श्रीलंका की सरकार ने पहली बार ये बात स्वीकार की है, कि Easter के मौके पर श्रीलंका के चर्च में और सार्वजनिक स्थानों पर हुआ फिदायीन हमला, न्यूज़ीलैंड की मस्जिद में हुए आतंकवादी हमले का बदला हो सकता है. इसका सीधा सा मतलब ये हुआ, कि अगर ISIS या उसकी विचारधारा का समर्थन करने वाले आतंकवादी, हमारे पड़ोसी देश में आकर हमला कर सकते हैं. तो कल, ऐसे हमले भारत में भी हो सकते हैं. आतंक का ये चेहरा किसी भी रुप में आपके बगल में आकर बैठ जाएगा. और इससे पहले कि आपको कुछ पता चले, तेज़ धमाके में सबकुछ बर्बाद हो जाएगा.

श्रीलंका की सरकार को भारत और अमेरिका की तरफ से खुफिया जानकारियां दी गई थीं, जिनमें इन हमलों का ज़िक्र किया गया था. भारत ने ख़ास तौर पर श्रीलंका के कट्टरपंथी संगठनों, ISIS और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के गठजोड़ से संबंधित ख़तरे के प्रति श्रीलंका को आगाह किया था. लेकिन श्रीलंका की सरकार ने उसे अनदेखा कर दिया. ऐसा क्यों हुआ, आज ये जानना भी आपके लिए दिलचस्प होगा. क्योंकि, जब देश की सुरक्षा के नाम पर देश के अंदर ही राजनीति होने लगे, तो उस देश को बर्बाद और तबाह होने से कोई नहीं रोक सकता. ये राजनीति भारत में भी अपने रंग दिखाती है. इसके बारे में हम आपको आगे बताएंगे. लेकिन पहले ये देखिए, कि श्रीलंका को भारत की तरफ से क्या जानकारी दी गई थी ?

भारत की खुफिया एजेंसियों ने नेशनल तौहीद जमात यानी NTJ नामक संगठन द्वारा किए जाने वाले हमले के बारे में जानकारी दी थी. वो भी हमले वाले दिन से 17 दिन पहले यानी 4 अप्रैल को. 

इसके अलावा भारत ने समय-समय पर श्रीलंका में संभावित जेहादी हमले की खुफिया सूचनाएं भी दी थीं. 

भारतीय एजेंसियों ने, NTJ के बारे में श्रीलंका को बताया था, कि इस संगठन के कई सहयोगी और समर्थक पाकिस्तान में हैं. और ये संगठन श्रीलंका में हमले की Planning कर रहा है. 

भारतीय एजेंसियां, पूर्वी श्रीलंका में कट्टरपंथी इस्लामी मान्यताओं के प्रभाव पर नज़र रख रही थीं.

इसी के तहत श्रीलंका की सरकार को चेतावनी दी गई थी, कि ये क्षेत्र लश्कर ए तैय्यबा जैसे आतंकी संगठनों का Operational Zone बन सकता है. 

भारत की एजेंसियों के मुताबिक, लश्कर ए तैय्यबा, श्रीलंका में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने में जुटा है.

लश्कर-ए-तैय्यबा के फलाह-ए-इंसानियत संगठन ने वर्ष 2016 में एक विज्ञापन दिया था. जिसमें उसने दावा किया था, कि सीरिया, अफगानिस्तान, म्यांमार और सोमालिया के अलावा उसकी मौजूदगी श्रीलंका में भी है. 

सिर्फ आतंकी संगठन ही नहीं, श्रीलंका में कट्टरपंथ को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का भी हाथ है. 

Reports के मुताबिक, श्रीलंका के नेशनल तौहीद जमात को ISI, फंड करती है. अन्य संगठनों के साथ मिलकर वो श्रीलंका की बेरोज़गार मुस्लिम आबादी को Radicalize करती है. और उन्हें नेशनल तौहीद जमात में शामिल होने के लिए उकसाती है.

शुरुआती जांच में ये भी पता चला है, कि लश्कर के कुछ लोगों ने समाज सेवक के वेश में श्रीलंका और Maldives का दौरा किया था. ताकि वो जेहादियों की भर्ती कर सकें. और इन लोगों को पाकिस्तान में ट्रेनिंग भी दी गई थी. 

इतनी पुख्ता जानकारी होने के बावजूद श्रीलंका की सरकार आंख मूंद कर बैठी रही. राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राजनीति होती रही. और उसी राजनीति के बीच 300 से ज़्यादा लोग मारे गए.

इस बीच ऐसी ख़बरें भी हैं, कि भारत की National Investigation Agency अपनी एक टीम श्रीलंका भेजना चाहती है. ताकि श्रीलंका में हुए हमलों के पैटर्न की स्टडी की जाए. क्योंकि, भारत में भी इस प्रकार के हमले की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता. 
यहां आपको ये भी समझना होगा कि सारी जानकारियां होने के बावजूद श्रीलंका में आत्मघाती हमले और धमाके कैसे हो गए ?

श्रीलंका के सिस्टम में सबसे बड़ी कमी ये थी कि भारत की तरफ से जो खुफिया जानकारियां श्रीलंका को उपलब्ध कराई गई थीं, उन्हें प्रधानमंत्री रानिल विक्रमासिंघे के साथ Share नहीं किया गया. श्रीलंका में सुरक्षा से जुड़ी Services को वहां के राष्ट्रपति नियंत्रित करते हैं. यानी इस मामले में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमासिंघे को अंधेरे में रखा. राष्ट्रपति ने हमले की पूरी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की. जिसकी वजह से सैकड़ों लोग मारे गए. हालांकि अबसे थोड़ी देर पहले श्रीलंका के राष्ट्रपति ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है और कहा है कि हमलों से संबंधित इंटेलिजेंस रिपोर्ट की जानकारी उन्हें भी नहीं दी गई थी. 

ज़रा सोचिए कि ये कैसा देश है जहां राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति गंभीर नहीं है.
श्रीलंका की राजनीति में वहां के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच पिछले कई महीनों से टकराव की स्थिति बनी हुई है. राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमासिंघे की आपस में नहीं बनती. और आपसी मन-मुटाव और राजनीति की वजह से.. राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया गया. आपने ये भी नोट किया होगा, कि हमारे देश में भी लगभग ऐसी ही स्थिति है. श्रीलंका की ही तरह, भारत में भी राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर जमकर राजनीति की जाती है. राष्ट्रीय सुरक्षा भारत में सबसे बड़ा मुद्दा है. लेकिन जब विपक्षी पार्टियां और बुद्धिजीवी इस गंभीर विषय को राजनीति का सामान बना देंगे, तो हो सकता है, कि आने वाले दिनों में श्रीलंका की ही तरह भारत में भी बम धमाके होने लगें.