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ZEE जानकारी: सिंगापुर में फेक न्यूज फैलाने पर मिलेगी कड़ी सजा

सिंगापुर की सरकार ने Fake News को फैलाने वालों के ख़िलाफ़ एक कठोर कानून Pass ((पारित)) कर दिया है . 

ZEE जानकारी: सिंगापुर में फेक न्यूज फैलाने पर मिलेगी कड़ी सजा

क्या आपने कभी सोचा है कि सोशल मीडिय़ा पर एक झूठा Message Forward करने की क्या सज़ा हो सकती है ? शायद आपके मन में ऐसा विचार नहीं आया होगा क्योंकि झूठा Message Forward करने पर किसी के मन में अपराधबोध नहीं होता. लेकिन अब दुनिया में एक ऐसा देश भी है जिसने फेक न्यूज़ फैलाने वालों को 10 साल तक जेल में बंद रखने और उन पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाने का इंतज़ाम कर लिया है.

सिंगापुर की सरकार ने Fake News को फैलाने वालों के ख़िलाफ़ एक कठोर कानून Pass ((पारित)) कर दिया है . इसका नाम है The Protection from Online Falsehoods and Manipulation Bill . इसे आसान भाषा में Anti-Fake news बिल भी कहा जा सकता है . अब सिंगापुर में सोशल मीडिया के ज़रिये झूठे Messages को Forward करने से पहले लोगों का हज़ार बार सोचना पड़ेगा . 

अगले कुछ दिनों में इस कानून को लागू कर दिया जायेगा . इस कानून के मुताबिक सिंगापुर में Fake News फैलाने वालों को 10 साल की जेल की सज़ा या 5 करोड़ रूपये का ज़ुर्माना भरना होगा. इस कानून में सरकार के निर्देश पर सोशल मीडिया से Fake News हटाने और उसमें सुधार करने का प्रावधान भी रखा गया है . सिंगापुर से पहले Russia, France, और Germany ऐसे देश हैं जो Fake News के ख़िलाफ...कानून लागू कर चुके हैं . 

Russia में Fake News फैलाने पर 4 लाख रूपये के जुर्माने का प्रावधान है . France में Fake News को रोकने के लिए एक साल की सज़ा और 40 लाख रुपये का जुर्माना है . Germany में Fake News फैलाने पर सोशल मीडिया websites पर 400 करोड़ रूपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा 24 घंटे के अंदर सोशल मीडिया से Fake News को हटाना होगा 

मलेशिया की सरकार ने भी मार्च, 2018 में Anti-Fake news कानून पास किया था लेकिन लोगों के विरोध के बाद वहां की नई सरकार ने इस कानून को ख़त्म की कोशिश शुरू कर दी . अब ये कानून अगले कुछ महीनों में समाप्त कर दिया जायेगा . 

कुछ लोग सिंगापुर के इस कानून का विरोध कर रहे हैं . उनका कहना है कि इससे लोगों की अभिव्यक्ति की आज़ादी को ख़तरा हो सकता है.

सिंगापुर की सरकार का ये दावा है कि इस कानून से लोगों की अभिव्यक्ति की आज़ादी पर कोई असर नहीं होगा लेकिन अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर कोई व्यक्ति या संस्था...देश के ख़िलाफ़ झूठ फैलाने की कोशिश करेगी तो ये कानून उसे छोड़ेगा नहीं .

'Fake News' पर हुए एक Research मुताबिक Social Media पर झूठी ख़बरें बहुत तेज़ी से फैलती हैं और इन नकली ख़बरों की पहुंच बहुत दूर तक होती है. Twitter पर सच्ची ख़बरों की तुलना में झूठी और फ़र्ज़ी ख़बरों के फैलने की ताक़त 70 प्रतिशत ज़्यादा होती है. और इसकी वजह से सच्ची ख़बरों और सूचनाओं को खोज पाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है.

भारत में भी ऐसा बहुत बड़ा वर्ग सक्रिय है जो अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर देश के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना रखता है . ऐसे बुद्धिजीवियों और उनके समर्थकों द्वारा भारत में फैलाये जा रहे झूठ को रोकने के लिए एक कठोर कानून की आवश्यकता है. भारत में इस समय ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि यहां लोकसभा चुनाव चल रहे हैं . वोटर का ध्यान भटकाने के लिए कई लोग झूठ फैलाने में जुटे हुए हैं . ऐसे माहौल में आपका एक गलत फैसला भारत के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है . इसलिए जब तक भारत में फेक न्यूज़ के खिलाफ कोई कठोर कानून नहीं बनता, तब तक अपने स्तर पर फेक न्यूज़ को रोकने का प्रयास कीजिए.