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ZEE जानकारी: अंतरिक्ष में चीन का स्पेस स्टेशन बेकाबू, कभी भी गिर सकता है पृथ्वी पर

चीन ने इस Space Station को पहले सिर्फ दो साल के अभियान के लिए Launch किया था. लेकिन वर्ष 2013 में.. चीन ने इसे भविष्य में इस्तेमाल करने के लिए Sleep Mode में डाल दिया.

ZEE जानकारी: अंतरिक्ष में चीन का स्पेस स्टेशन बेकाबू, कभी भी गिर सकता है पृथ्वी पर

चीन, लगातार दुनिया की सुपरपावर बनने का सपना देख रहा है. वो Manufacturing और Technology के क्षेत्र में सबसे आगे रहना चाहता है. लेकिन ऐसा करने की जल्दबाज़ी में कई बार गलतियां भी हो जाती है. अंतरिक्ष में मौजूद चीन का Space Station बेकाबू हो गया है और वो कभी भी पृथ्वी पर गिर सकता है. इस Space Station का नाम है Tian-gong-1. चीन ने इसे 29 सितंबर 2011 को लॉन्च किया था. इस Space Station का वज़न 8 हज़ार 506 किलोग्राम है और इसकी लंबाई करीब साढ़े 10 मीटर है. इस Space Station ने अपने Launch से लेकर 1 नवंबर 2017 तक पृथ्वी के 34 हज़ार 976 चक्कर लगाए.

चीन ने इस Space Station को पहले सिर्फ दो साल के अभियान के लिए Launch किया था. लेकिन वर्ष 2013 में.. चीन ने इसे भविष्य में इस्तेमाल करने के लिए Sleep Mode में डाल दिया. Sleep Mode में डालने के बावजूद, इस Space Station से लगातार जानकारियां मिलती रही. 21 मार्च, 2016 को चीन के Space Engineering Office ने साढ़े चार साल की सेवा लेने के बाद इसकी Data सर्विस को बंद कर दिया.. जिसके बाद पिछले साल सितंबर में अचानक इससे संपर्क टूट गया . और तब से ये लगातार अपनी Orbit से नीचे गिर रहा है. 

चीन का ये Space Station कहां गिरेगा और इससे कितना नुकसान होगा.. ये जानने की कोशिश लगातार हो रही है. European Space Agency इस पर नज़र बनाए हुए है, ESA के मुताबिक चीन का ये Space Station कई टुकड़ों में ज़मीन पर गिरेगा और ये टुकड़े Spain, Portugal, Italy, Bulgaria और Greece जैसे देशों में गिर सकते हैं. ESA के मुताबिक जब ये Space Station अगले कुछ महीनों में पृथ्वी के वातावरण में घुसेगा तब इसका ज़्यादातर हिस्सा जल जाएगा, लेकिन करीब 100 Kilogram का हिस्सा.. कचरे के रूप में ज़मीन पर गिरेगा . और यही चिंता की बड़ी वजह है.

कुछ ऐसा ही घटनाक्रम करीब 38 साल पहले भारत में हुआ था. तब लोगों ने ये मान लिया था कि अमेरिकी Space Station स्काईलैब के कारण उनकी मौत हो जाएगी.

अमेरिका ने 1973 में 'स्काईलैब' को Launch किया था. ये करीब नौ मंजिला बिल्डिंग जितना ऊंचा था और इसका वज़न 78 टन था. चार साल तक ठीक से काम करने के बाद इसने काम करना बंद कर दिया. इसके बाद ये बेकाबू हो गया.. और धरती की तरफ गिरने लगा. उस दौरान ये घोषणा की गई कि.. स्काईलैब.. जुलाई 1979 में कभी भी धरती पर गिर सकता है. और ऐसी आशंका जताई गई कि ये अमेरिका या भारत में से किसी एक देश में गिरेगा. इस सूचना से भारत में जबरदस्त दहशत फैल गई थी. कई लोगों ने मान लिया था कि अब उनके जीवन के कुछ ही दिन बचे हैं.

आखिरकार 12 जुलाई 1979 को स्काईलैब के धरती से टकराने की नौबत आ गई. उस दिन पूरे भारत में हाई अलर्ट जारी किया गया था. मगर राहत की बात ये थी कि ये Space Station भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हिंद महासागर में गिरा और इससे कोई नुकसान नहीं हुआ.

जानें क्या है सौर तूफान: तूफान शब्द को सुनते ही.. दिमाग में हमेशा विनाश की तस्वीरें घूमने लगती हैं.. लेकिन कुछ तूफान सुंदर होते हैं. तूफानों का ये सौंदर्य.. आज दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकता है. सौर तूफान की वजह से अमेरिका और ब्रिटेन के कई हिस्सों में आज रात को Northern Lights यानी Auroras देखने को मिलेंगे. आप इसे कुदरत की आतिशबाज़ी भी कह सकते हैं.. लेकिन इससे कोई प्रदूषण नहीं होता.

आपको शायद सौर तूफानों यानी Solar Storms के बारे मे पता नहीं होगा. हम आपको सरल भाषा में इसके बारे में बताते हैं. सूर्य की सतह पर कई बार बड़े विस्फोट होते हैं. जिनकी वजह से Charged Particles की एक आंधी पृथ्वी की तरफ बढ़ती है. और जब ये आंधी धरती के वातावरण से टकराती है.. तो हवा के कण Charge हो जाते हैं.. और इसकी वजह से आसमान में अलग अलग रंगों की रोशनी दिखाई देती है.

अगर सूर्य की तरफ से आने वाली आंधी ज़्यादा तेज़ होती है.. तो कई बार Power Grids, और Tele communication systems थोड़ी देर के लिए खराब हो जाते हैं. हालांकि इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है.