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ZEE जानकारी: आपकी निजता में सेंधमारी का DNA टेस्ट, भारत के 40 करोड़ लोगों की सुरक्षा का विश्लेषण

कल तक इस कंपनी ने हर जगह से अपनी पहचान मिटा दी थी. जिस दफ्तर में कंपनी काम करती थी वहां से बोर्ड तक हटा दिया था.

ZEE जानकारी: आपकी निजता में सेंधमारी का DNA टेस्ट, भारत के 40 करोड़ लोगों की सुरक्षा का विश्लेषण

नई दिल्ली: अंग्रेजी में कहते हैं 'Nothing is Private in the Digital World' यानी कि डिजिटल दुनिया में कोई भी जानकारी छिपी हुई या सुरक्षित नहीं है. इस जानकारी तक पहुंच बनाने के लिए जरूरत होती है सिर्फ सही साधनों की . और एनएसओ ग्रुप के जासूसी सॉफ्टवेयर की मदद से व्हाट्सऐप के साथ भी ऐसा ही हुआ है. अब हम DNA में व्हाट्सऐप जासूसी मामले पर ZEE NEWS की 'इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म सीरीज' की दूसरी विस्फोटक रिपोर्ट दिखाएंगे.

कल आपने देखा होगा कैसे हमने इज़रायल के तेलअवीव शहर में इस कंपनी के पहले ठिकाने तक पहुंचे थे. जहां से कभी एनएसओ ग्रुप काम करता था. ZEE NEWS के सहयोगी अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ चैनल WION के पश्चिम एशिया ब्यूरो चीफ डैनियले पगानी ने ये खुलासा किया था. कल तक इस कंपनी ने हर जगह से अपनी पहचान मिटा दी थी. जिस दफ्तर में कंपनी काम करती थी वहां से बोर्ड तक हटा दिया था. वेबसाइट पर कंपनी का फोन नंबर या पता मौजूद नहीं था. ऐसा लग रहा था मानो एनएसओ ग्रुप ने खुद तक पहुंचने वाले हर रास्ते को बंद कर दिया है. लेकिन हमारा मानना था कि 7 हजार करोड़ रुपए की कंपनी रातों रात गायब नहीं हो सकती है. हम लगातार जांच करते रहे.

और आज डैनियले पगानी तेल अवीव शहर में एनएसओ ग्रुप की नई बिल्डिंग तक पहुंच गए...ये पुराने ऑफिस से कुछ ही मीटर की दूरी पर है . ये वही ऑफिस है जहां जासूसी का पूरा षडयंत्र रचा गया . तेलअवीव शहर में हर्ज-लिया ((Herzliya)) एक बिजनेस सेंटर है और इसी इलाके में NSO ग्रुप का नया ऑफिस है. जानबूझकर इस बिल्डिंग पर उन्होंने अपना कोई बोर्ड नहीं लगाया है... ताकि उनकी पहचान ना हो सके . नीले रंग के शीशे लगी इस ऊंची इमारत में ही एनएसओ ग्रुप का दफ्तर है... और दुनिया को पहली बार ZEE NEWS देखकर इस कंपनी के बारे में नई जानकारियां मिली हैं. 

ये वो जगह है जहां से एनएसओ ग्रुप आज भी काम कर रहा है और दुनिया भर में जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर्स बेच रहा है. व्हाट्सऐप जासूसी कांड पर ZEE NEWS की कवरेज और सवालों से शायद एनएसओ ग्रुप परेशान है.इसलिए उनके किसी प्रतिनिधि ने डैनियले पगानी से मिलकर... सवालों का जवाब नहीं दिया है. एनएसओ ग्रुप ने आज अपने ऑफिस को भी सीक्रेट रखने की कोशिश की. आप सोचेंगे बिजनेस करने वाली कोई कंपनी अपना दफ्तर क्यों छिपाना चाहेगी?

आज जब डैनियले पगानी वहां वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे. तभी सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें रोका...और फिर डैनियले के मोबाइल में मौजूद वीडियो और तस्वीरों को डिलिट करवा दिया . आप सोच रहे होंगे कि एनएसओ ग्रुप उनसे जुड़ी हर बात को गुप्त क्यों रखना चाहता है? क्या उनके पास ऐसी जानकारी है जिसे वो दुनिया से छिपाना चाहते हैं? आखिर क्यों एनएसओ ग्रुप हमारे सवालों का जवाब नहीं देना चाहता है?

इजरायल की इस कंपनी के लिए भारत की एक कहावत एकदम सही है... ये कहावत है... चोर की दाढ़ी में तिनका. यानी अगर किसी अपराधी के मन में शंका हो तो वो दूसरों से नजरें नहीं मिला पाता है . और शायद इसलिए एनएसओ ग्रुप हमसे मिलकर सवालों का जवाब नहीं देना चाहता है. और हमेशा पर्दे के पीछे रहकर काम करना चाहता है.

व्हाट्सऐप पर जासूसी... इज़रायल की एक कंपनी एनएसओ ग्रुप के सर्विलांस सॉफ्टवेयर पेगासस से की गई थी . इस मामले के सामने आने के बाद से एनएसओ ग्रुप...ZEE NEWS के सवालों से बचने की कोशिश कर रहा है. हमने Email भेजकर जवाब जानने की कोशिश की... लेकिन Email पर कंपनी ने अपना पुराना जवाब दोहरा दिया था . भारत में 40 करोड़ सहित दुनिया भर में 150 करोड़ लोग व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं. व्हाट्सऐप के जरिए जासूसी हमारे लिए आम लोगों से जुड़ा हुआ मुद्दा है. ज्यादातर मीडिया हाउस ऐसी खबरों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं. इसलिए जिस कंपनी को कोई नहीं तलाश कर पाया उसे हमने ढूंढ लिया है .

NSO ग्रुप मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दे रहा है... लेकिन उन्हें कोर्ट के सवालों का जवाब देना होगा. इस कंपनी के खिलाफ अमेरिका में कैलिफोर्निया की एक जिला कोर्ट ने समन जारी किया है... व्हाट्सऐप ने NSO ग्रुप पर जासूसी मामला सामने आने के बाद केस किया है. और अब उन्हें 21 दिनों में कंपनी के अधिकारियों को कोर्ट में उपस्थित होकर अपना जवाब देना है.

कोर्ट में व्हाट्सऐप ने 140 पेज का आरोप पत्र पेश किया है जिसमें 1400 मोबाइल फोन को टारगेट करने का आरोप है. Spyware या जासूसी सॉफ्टवेयर की मदद से Mobile Phones को निशाना बनाया गया. हालांकि व्हाट्सऐप का दावा है कि मई 2019 में जानकारी मिलने के बाद Update जारी करके उसने अपने App को और सुरक्षित बना दिया है. कहा ये भी गया है कि पेगासस Spyware हमले के बावजूद व्हाट्सऐप Users के मैसेज सुरक्षित रहे.

यानी पहले व्हाट्सऐप ने जासूसी होने की खबर को रोकने की कोशिश की... इसके बाद ये भी नहीं बताया कि कितना नुकसान हुआ है... और अब ये दावा कर रहे हैं कि जासूसी हुई ही नहीं है. यहां ध्यान देने की बात ये है कि व्हाट्सऐप ने बड़ी आसानी से सारी जिम्मेदारी NSO ग्रुप पर डाल दी है. सबसे बड़ी बात ये है कि व्हाट्सऐप ऐसा करके निश्चिंत नहीं हो सकता है. क्योंकि हरेक User की Private मैसेज और जानकारियों की रक्षा करना व्हाट्सऐप की जिम्मेदारी है.

व्हाट्सऐप के आरोप से कई हैरान करनेवाले खुलासे भी हुए हैं. इसके मुताबिक NSO ग्रुप और अफ्रीका के देश घाना की एक कंपनी के बीच वर्ष 2015 में एक समझौता हुआ था. बताया गया कि इस कंपनी के पीछे घाना की सरकार मौजूद थी. इसमें 25 मोबाइल फोन को हैक करने के लिए 56 करोड़ का समझौता हुआ था. NSO ग्रुप ने इसके लिए अपने सभी जासूसी सॉफ्टवेयर दिए थे. 

और इसकी मदद से किसी भी एनड्रोयड... एप्पल या ब्लैकबैरी किसी भी डिवाइस को हैक किया जा सकता था. NSO ग्रुप का पेगासस इतना ताकतवर है कि ये व्हाट्सऐप, VIBER, SKYPE, FACEBOOK MESSENGER और TELEGRAM एप पर भी नजर रख सकता है.

अगर आपको लगता है कि दुनिया में सिर्फ NSO ग्रुप ने ही ऐसे जासूसी सॉफ्टवेयरs बनाए हैं... तो आप अपना विचार बदल दीजिए .साइबर सर्विलांस की दुनिया में रोज नए अविष्कार हो रहे हैं. 60 लाख रुपए कीमत वाली इस मोबाइल जासूसी वैन को देखिए. आधे किलोमीटर के इलाके में ये किसी भी मोबाइल फोन को हैक कर सकती है और उसमें मौजूद मैसेज को भी पढ़ सकती है. और ऐसा करने के लिए उन्हें आपका फोन हैक करने में सिर्फ कुछ मिनटों का वक्त लगेगा.

अब आपको बताते हैं कि NSO ग्रुप के लिए इंग्लैंड से कौन सी बुरी खबर आई है?
NSO ग्रुप से जुड़ा एक मामला इंग्लैंड में भी दर्ज हुआ है. यहां सऊदी अरब के खिलाफ काम करने वाले कार्यकर्ता 'घानम अल-दोसारी' ने एक केस दायर किया है. वर्ष 2003 से 'दोसारी' इंग्लैंड में रह रहे हैं. आरोप है कि सऊदी अरब की सरकार ने इनका मोबाइल हैक करके नजर रखी. 'दोसारी' के मोबाइल फोन की जांच के बाद पता चला कि NSO ग्रुप के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस की मदद से ये हैकिंग की गई थी . और इसके पीछे सऊदी अरब की सरकार थी. इंग्लैंड में जासूसी सॉफ्टवेयरs की जांच करने वाली संस्था Citizen Lab ने इस हैंकिंग का खुलासा किया था .

NSO ग्रुप के खिलाफ एक और बुरी खबर उनके अपने देश इज़रायल से है. इज़रायल में 30 मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने केस दर्ज करके इस कंपनी का एक्सपोर्ट लाइसेंस कैंसल करने की अपील की थी. पहले इस केस की सुनवाई 7 नवंबर को होने वाली थी . लेकिन अब इस केस में कंपनी के अधिकारियों को 16 जनवरी 2020 को कोर्ट में जाकर जवाब देना होगा.

NSO ग्रुप मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दे रहा है... लेकिन उन्हें कोर्ट के सवालों का जवाब देना होगा. इस कंपनी के खिलाफ अमेरिका में California की एक जिला कोर्ट ने समन जारी किया है... व्हाट्सऐप ने NSO ग्रुप पर जासूसी मामला सामने आने के बाद केस किया है. और अब उन्हें 21 दिनों में कंपनी के अधिकारियों को कोर्ट में उपस्थित होकर अपना जवाब देना है.

कोर्ट में व्हाट्सऐप ने 140 पेज का आरोप पत्र पेश किया है जिसमें 1400 मोबाइल फोन को टारगेट करने का आरोप है . स्पाइवॉर या जासूसी सॉफ्टवेयर की मदद से Mobile Phones को निशाना बनाया गया. हालांकि व्हाट्सऐप का दावा है कि मई 2019 में जानकारी मिलने के बाद Update जारी करके उसने अपने App को और सुरक्षित बना दिया है. कहा ये भी गया है कि पेगासस स्पाइसवॉर हमले के बावजूद व्हाट्सऐप Users के मैसेज सुरक्षित रहे.

यानी पहले व्हाट्सऐप ने जासूसी होने की खबर को रोकने की कोशिश की... इसके बाद ये भी नहीं बताया कि कितना नुकसान हुआ है... और अब ये दावा कर रहे हैं कि जासूसी हुई ही नहीं है. यहां ध्यान देने की बात ये है कि व्हाट्सऐप ने बड़ी आसानी से सारी जिम्मेदारी NSO ग्रुप पर डाल दी है. सबसे बड़ी बात ये है कि व्हाट्सऐप ऐसा करके निश्चिंत नहीं हो सकता है. क्योंकि हरेक User की Private मैसेज और जानकारियों की रक्षा करना व्हाट्सऐप की जिम्मेदारी है.

व्हाट्सऐप के आरोप से कई हैरान करनेवाले खुलासे भी हुए हैं.
इसके मुताबिक NSO ग्रुप और अफ्रीका के देश घाना की एक कंपनी के बीच वर्ष 2015 में एक समझौता हुआ था. बताया गया कि इस कंपनी के पीछे घाना की सरकार मौजूद थी. इसमें 25 मोबाइल फोन को हैक करने के लिए 56 करोड़ का समझौता हुआ था. NSO ग्रुप ने इसके लिए अपने सभी जासूसी सॉफ्टवेयर दिए थे. 

और इसकी मदद से किसी भी ANDROID... APPLE या BLACKBERRY किसी भी Device को हैक किया जा सकता था. NSO ग्रुप का पेगासस इतना ताकतवर है कि ये व्हाट्सऐप, VIBER, SKYPE, FACEBOOK MESSENGER और TELEGRAM एप पर भी नजर रख सकता है.

अगर आपको लगता है कि दुनिया में सिर्फ NSO ग्रुप ने ही ऐसे जासूसी सॉफ्टवेयरs बनाए हैं... तो आप अपना विचार बदल दीजिए .साइबर Surveillance की दुनिया में रोज नए अविष्कार हो रहे हैं. 60 लाख रुपए कीमत वाली इस मोबाइल जासूसी वैन को देखिए. आधे किलोमीटर के इलाके में ये किसी भी मोबाइल फोन को हैक कर सकती है और उसमें मौजूद मैसेज को भी पढ़ सकती है. और ऐसा करने के लिए उन्हें आपका फोन हैक करने में सिर्फ कुछ मिनटों का वक्त लगेगा.

अब आपको बताते हैं कि NSO ग्रुप के लिए इंग्लैंड से कौन सी बुरी खबर आई है? NSO ग्रुप से जुड़ा एक मामला इंग्लैंड में भी दर्ज हुआ है. यहां सऊदी अरब के खिलाफ काम करने वाले कार्यकर्ता 'घानम अल-दोसारी' ने एक केस दायर किया है. वर्ष 2003 से 'दोसारी' इंग्लैंड में रह रहे हैं. आरोप है कि सऊदी अरब की सरकार ने इनका मोबाइल हैक करके नजर रखी. 'दोसारी' के मोबाइल फोन की जांच के बाद पता चला कि NSO ग्रुप के जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस की मदद से ये हैकिंग की गई थी . और इसके पीछे सऊदी अरब की सरकार थी. इंग्लैंड में जासूसी सॉफ्टवेयरs की जांच करने वाली संस्था सिटिजन ने इस हैंकिंग का खुलासा किया था .

NSO ग्रुप के खिलाफ एक और बुरी खबर उनके अपने देश इज़रायल से है. इज़रायल में 30 मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने केस दर्ज करके इस कंपनी का एक्सपोर्ट लाइसेंस कैंसल करने की अपील की थी. पहले इस केस की सुनवाई 7 नवंबर को होने वाली थी . लेकिन अब इस केस में कंपनी के अधिकारियों को 16 जनवरी 2020 को कोर्ट में जाकर जवाब देना होगा.