Zee जानकारी : डोनाल्ड ट्रम्प को गुस्सा क्यों आता है?

Zee जानकारी : डोनाल्ड ट्रम्प को गुस्सा क्यों आता है?

अमेरिका के नये राष्ट्रपति Donald Trump वहां की राजनीति के Angry Old Man हैं और उन्हें गुस्सा थोड़ा जल्दी आता है.. आमतौर पर वो अपना गुस्सा मीडिया पर उतारते हैं.. लेकिन इस बार डोनाल्ड ट्रंप के गुस्से का निशाना थे ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ' Malcolm TurnBull'  । डोनाल्ड ट्रंप और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री  'Malcolm TurnBull'  के बीच 28 जनवरी को फोन पर बातचीत हुई थी। ये बातचीत लगभग एक घंटे तक चलने वाली थी। लेकिन ट्रंप ने 25 मिनट बाद ही.. गुस्से में आकर फोन काट दिया। इतना ही नहीं फोन काटने से पहले ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि ये फोन पर उनकी अब तक की सबसे बुरी बातचीत है। 

ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री से कहा कि उन्होंने दुनिया के कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। लेकिन ये उनमें से सबसे बुरी Phone Call थी। Australian Media ने तो ये दावा भी किया है कि ट्रंप इस Phone Call के दौरान बुरी तरह चिल्ला रहे थे और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को डराने की कोशिश कर रहे थे। आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका बहुत अच्छे दोस्त रहे हैं। इसके बाद भी ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री का अपमान करते हुए Phone काट दिया। 

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने फोन पर हुई इस बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका उन मुस्लिम शरणार्थियों को अपने देश में शरण दें.. जिन्हें ऑस्ट्रेलिया ने Reject कर दिया है। आपको बता दें कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ऑस्ट्रेलिया के साथ एक समझौता किया था। और उस समझौते के तहत अमेरिका.. ऑस्ट्रेलिया द्वारा Reject किए गये 1250 शरणार्थियों को शरण देने के लिए तैयार हो गया था। लेकिन Trump ज़रा दूजी किस्म के राष्ट्रपति हैं... और वो बातचीत के दौरान इसका ज़िक्र होते ही नाराज़ हो गये।

ट्रंप ने इस Deal को अब तक की सबसे बुरी Deal बताया और Tweet करके कहा कि वो इस समझौते का अध्ययन करेंगे। ट्रंप ने हाल ही में एक आदेश जारी करके कहा था कि अमेरिका अगले 4 महीनों तक अपने देश में किसी भी शरणार्थी को Entry नहीं देगा। इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान, इराक, सीरिया, लीबिया, सूडान, सोमालिया और यमन के नागरिकों की Entry भी अमेरिका में Ban कर दी है। ट्रंप के इस फैसले की पूरी दुनिया में आलोचना हो रही है। लेकिन United Arab Emirates ने ट्रंप के फैसले को सही ठहराया है और कहा है कि अमेरिका को अपनी रक्षा के लिए किसी भी तरह का फैसला लेने का अधिकार है। वैसे Trump ने Travel ban की जो पंरपरा शुरू की है उसका असर पूरी दुनिया में दिखने लगा है। 

अमेरिका के नक्शे कदम पर चलते हुए कुवैत ने भी 5 देशों के नागरिकों को वीज़ा देने से इनकार कर दिया है। ये पांच देश हैं सीरिया, ईरान , इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान । कुवैत ने इन देशों के नागरिकों पर Travel Ban लगाते हुए तर्क दिया है कि इन देशों में सुरक्षा से जुड़े हालात अच्छे नहीं हैं। और जब तक इनमें सुधार नहीं आता..ये प्रतिबंध जारी रहेगा । हालांकि कुवैत के स्थानीय मीडिया का दावा है कि ये Ban वर्ष 2011 से ही लागू है।

कुल मिलाकर दुनिया की कूटनीति बहुत तेज़ी से बदल रही है। और डॉनल्ड ट्रंप इसके केंद्र में हैं। ट्रंप अमेरिका के ज्यादातर पुराने दुश्मनों से तो सुलह करना चाहते हैं। लेकिन वो पुराने दोस्तों का साथ देने के लिए तैयार नहीं है। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका के ज्यादातर दोस्तों ने सिर्फ फायदा उठाया है और इसके बदले में अमेरिका को कभी कुछ नहीं मिला। कुल मिलाकर दुनिया की कूटनीति की कहानी एक Soap Opera में बदल गई है। जिसमें हर दिन नए Twist आ रहे हैं। अगर आप टीवी सीरियल्स देखने के शौकीन हैं तो आपको अमेरिका की इस नई ड्रामा सीरीज़ को ज़रूर देखना चाहिए। इस सीरीज़ का नाम है कहानी कूटनीति की...

अभी तो Donald trump ने गुस्से में सिर्फ फोन काटा है.. लेकिन आगे गुस्सा आने पर वो क्या क्या कर सकते हैं.. इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है। ट्रंप का ये बर्ताव सिर्फ दुनिया के राजनेताओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मीडिया के लिए भी एक चुनौती बन गया है। अमेरिका समेत दुनिया भर के मीडिया संस्थान ये नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर ट्रंप को लेकर रिपोर्टिंग कैसे की जाए। ट्रंप राष्ट्रपति बनने से पहले भी मीडिया से नाराज़ रहा करते थे, और राष्ट्रपति बनने के बाद भी मीडिया के प्रति उनकी नारज़गी कम होने की बजाय.. और ज़्यादा बढ़ गई है। 

ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि मीडिया के लोग इस धरती  के सबसे बेईमान लोग हैं। ट्रंप साफ-साफ कह चुके हैं कि उनके और मीडिया के बीच एक युद्ध चल रहा है। पूरी दुनिया के पत्रकारों को लगता है कि ट्रंप देर सवेर मीडिया पर कई तरह की पाबंदियां लगा देंगे और एक तरह की Censorship लागू कर देंगे। ऐसे हालात में आपको ये भी देखना चाहिए कि डॉनल्ड ट्रंप पत्रकारों के साथ कैसा बर्ताव करते हैं? 
इसके लिए मैं आपको एक पुराना वीडियो दिखाना चाहता हूं.. जो उनके आक्रामक व्यक्तित्व के बारे में बताता है। वर्ष 2015 में जब डॉनल्ड ट्रंप चुनाव प्रचार कर रहे थे। तब एक पत्रकार ने उनसे एक सवाल पूछा..ये सवाल ट्रंप को पसंद नहीं आया..और ट्रंप के कहने पर  उस पत्रकार को धक्के मारकर प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर निकाल दिया गया। आप ये वीडियो देखिए..फिर हम इस बातचीत को आगे बढ़ाएंगे

अब धीरे धीरे दुनिया भर के मीडिया संस्थान अपनी रणनीति बदलकर ट्रंप की नीतियों पर रिपोर्टिंग करने की कोशिश कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी Reuters ने अपने पत्रकारों के लिए एक Dos And Don'ts की लिस्ट जारी की है। जिसमें पत्रकारों को बताया गया है कि उन्हें ट्रंप के बारे में रिपोर्टिंग करते हुए क्या करना है..और क्या नहीं। इसमें पहला Point है कि पत्रकारों को उन मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए..जो आम आदमी से जुड़े हैं। 

पहले से ज्यादा Resources का इस्तेमाल करना चाहिए..अगर एक दरवाज़े से जानकारी नहीं मिलती है..तो दूसरा दरवाज़ा यानी Door of information खोल लेना चाहिए। एक निर्देश ये भी है कि पत्रकारों को आधिकारिक सूचनाओं का इंतज़ार नहीं करना चाहिए। ये वैसे भी ज्यादा काम नहीं आती। इसकी जगह सूत्रों का इस्तेमाल करना चाहिए।   

Reuters ने अपने पत्रकारों से ये भी कहा है कि वो लोगों के बीच जाकर रिपोर्टिंग करें..और सरकार के जिन कदमों से आम लोग प्रभावित होते है..उनका जिक्र करें...उन मुद्दों पर फोकस ना करें जिनसे सिर्फ पत्रकार प्रभावित होते हैं। पत्रकारों से कहा गया है कि वो लड़ाई झगड़ों में ना फंसे निजी जिंदगी के Frustrations को रिपोर्टिंग का हिस्सा ना बनाएं..अमेरिका में रिपोर्टिंग करते हुए..निजी दुश्मनी ना निकालें।

इसके अलावा ये भी लिखा गया है कि पत्रकारिता के आसपास बने Negative माहौल को ध्यान में रखते हुए रिपोर्टिंग ना करें..बल्कि पत्रकारों पर पाबंदी को एक अवसर के रूप में लें।  और मुश्किलों के बावजूद, जानकारी से भरी और उपयोगी खबरों को ही रिपोर्ट करें। हमें लगता है कि ये दिशा निर्देश भारतीय मीडिया के लिए भी सबक हो सकते हैं..क्योंकि भारत में भी कई पत्रकार सिर्फ अपने एजेंडे को ध्यान में रखकर रिपोर्टिंग करते है। चर्चा में बने रहना चाहते हैं और पत्रकारिता करते हुए अपनी निजी दुश्मनी को प्राथमिकता देते हैं।

भारत में बहुत कम पत्रकार ऐसे हैं..जो लोगों को जागरूक करना चाहते हैं..उन्हें जानकारी देना चाहते हैं और लोगों के लिए उपयोगी विषयों पर पत्रकारिता करते हैं। भारत के डिजाइनर पत्रकार लोगों के बीच जाकर भी रिपोर्टिंग नहीं करते...वो सिर्फ उन मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं जो उन्हें प्रभावित करते हैं। आम लोगों के मुद्दों से इन पत्रकारों का कोई सरोकार नहीं होता है। हमें लगता है कि भारत के पत्रकारों को वक्त रहते आत्मविश्लेषण ज़रूर करना चाहिए..और पत्रकारिता के सड़े-गले तौर तरीकों को बदलना चाहिए।