Chaitra Navratri 2021: जानिए कैसे जलाएं अखंड ज्योति और इसके उपाय

अखंड ज्योति को जमीन की जगह किसी लकड़ी की चौकी पर रखकर जलाना चाहिए. ज्योति को रखने से पहले इसके नीचे अष्टदल बना लें. अखंड ज्योति को कभी भी गंदे हाथों से छूना नहीं चाहिए. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Apr 11, 2021, 07:53 AM IST
  • चैत्र नवरात्रि के में अखंड दीपक मंदिर को अग्नि कोण दिशा में प्रज्जवलित करें.
  • शुद्ध घी में थोड़ा कपूर डालकर दीप जलाएं, इससे मिलेगा ऐश्नर्य, शुक्र होंगे खुश
Chaitra Navratri 2021: जानिए कैसे जलाएं अखंड ज्योति और इसके उपाय

नई दिल्लीः देवी पुराण के अनुसार प्रत्येक साल चार नवरात्रि आती है. इन चार नवरात्रि में से दो नवरात्रि गुप्त होती हैं और दो प्रत्यक्ष. इनमें से पहली नवरात्रि हिन्दू वर्ष के पहले महीने यानी कि चैत्र में पड़ता है. आवे वाली 13 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होने जा रहा है. दूसरी नवरात्रि हिन्दू वर्ष के चौथे महीने यानी कि आषाढ़ में होती है.

तीसरी आश्विन में और चौथी नवरात्रि हिन्दू वर्ष के ग्यारहवें यानी कि माघ महीने में होती है. इन चार नवरात्रों में चैत्र और आश्विन नवरात्री को प्रमुख माना जाता है और इन्हें प्रत्यक्ष नवरात्रि भी कहते हैं जबकि आषाढ़ और माघ में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहते हैं.

9 दिन जलता रहता है अखंड दीप
इन सभी नवरात्रि में देवी मां की आरती और दीप जलाने का विशेष महत्व है. देवी के सामने अखंड दीप जलाया जाता है जो किल पूजा के दौरान पूरे 9 दिन अनवरत जलता रहता है. अखंद दीप का जलना सौभाग्य का प्रतीक है साथ ही यह नकारत्मकता को दूर को चेतना को प्रवाहित करता है. 

ऐसे जलाएं अखंड दीप
अखंड ज्योति को जमीन की जगह किसी लकड़ी की चौकी पर रखकर जलाना चाहिए. ज्योति को रखने से पहले इसके नीचे अष्टदल बना लें. अखंड ज्योति को कभी भी गंदे हाथों से छूना नहीं चाहिए. 
अखंड ज्योति को कभी अकेले या पीठ दिखाकर नहीं जाना चाहिए. 
अखंड ज्योति जलाने के लिए शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर आप घर में अखंड ज्योति की देखभाल नहीं कर सकते हैं तो आप मंदिर में देसी घी अखंड ज्योति के लिए दान कर सकते हैं.

अगर आपके पास ज्योति जलाने के लिए देसी घी नहीं है तो तिल का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं. 
अखंड ज्योति के लिए रूई की जगह कलावे का इस्तेमाल करना चाहिए. इस बात का ध्यान रखें कि कलावे की लंबाई इतनी रखें कि ज्योति नौ दिनों तक जलती रहे. 

अखंड ज्योति को शुभ मुहूर्त देखकर ही प्रज्वलित करना चाहिए. इसे प्रज्वलित करने से पहले इसमें आप बहुत थोड़े से अक्षत भी डालें जो कि शुभता के प्रतीक हैं. 
अखंड ज्योति को देवी मां के दाईं ओर रखा जाना चाहिए . नवरात्रि समाप्त होने पर ही इसे स्वंय ही समाप्त होने देना चाहिए. 

यह भी पढ़िएः चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल से: जान लीजिए कलश स्थापना की जरूरी सामग्री, तरीका और पूजा विधि

अखंड ज्योति के उपाय
चैत्र नवरात्रि के दौरान अखंड दीपक मंदिर के अग्नि कोण दिशा में प्रज्जवलित करें. 
शुद्ध घी में थोड़ा कपूर डालकर दीप जलाएं. ऐसा करने से हमारे शुक्र ग्रह का शोधन होकर, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है.
अखंड दीपक न जला पाएं तो पूरे चैत्र नवरात्रि सुबह व शाम दीपक अवश्य जलाएं. 

किसी भी मंदिर में बल्ब का दान करें. इससे आपके राहु ग्रह शुद्ध होंगे और जीवन में आ रही विपरीत परिस्थितियों से विजय प्राप्त होगी, साथ ही दुर्घटना आदि से बचाव होगा. 
स्त्रियां हमेशा बाल बांधकर ही अखंड ज्योति जलाएं. नवरात्रि पूजन के समय मंदिरों में भी हमेशा बाल बांधकर जाएं. बिखरे बाल शनि ग्रह के दुष्प्रभाव को आमंत्रित करते हैं, जो जीवन को कष्टदायक बनाते हैं. 

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