Daily Panchang 18th September 2021: जानिए आज का पंचांग और गुप्त उपाय

Daily Panchang 18th September 2021: आज शनिवार है और शनि प्रदोष व्रत भी है. इस दृष्टिकोण से आज का दिन बहुत ही शुभ है. हिन्दू धर्म मानने वालों को आज शनि प्रदोष व्रत का लाभ उठाना चाहिए. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Sep 18, 2021, 05:30 AM IST
  • राहु काल - सुबह 09.19 से 10.50 बजे तक
  • योग- सुकर्मा योग, 06.24 के उपरांत धृति योग
Daily Panchang 18th September 2021: जानिए आज का पंचांग और गुप्त उपाय

नई दिल्लीः Daily Panchang 18th September 2021: आज का पंचांग आपके लिए शुभ घड़ी और शुभ समय लेकर आया है. आज शनिवार है और शनि प्रदोष व्रत भी है. इस दृष्टिकोण से आज का दिन बहुत ही शुभ है. आज चंद्रमा का मकर राशि में 03.26 बजे तक इसके उपरांत कुंभ राशि में संचरण है. पंचांग में और क्या है खास, बता रहे हैं आचार्य विक्रमादित्य-

आज का पंचांग 
दिन - शनिवार 
भाद्रपद  शुक्ल पक्ष - द्वादशी सुबह 06.54 तक, उसके उपरांत त्रयोदशी प्रारंभ 
त्योहार- त्रयोदशी क्षय हो गई है, शनि प्रदोष व्रत, भुवनेश्वरी जयंती  

आज शनिवार है और शनि प्रदोष व्रत भी है. इस दृष्टिकोण से आज का दिन बहुत ही शुभ है. हिन्दू धर्म मानने वालों को आज शनि प्रदोष व्रत का लाभ उठाना चाहिए. ताकि उनके अनेक का निवारण सरलता से हो सके. 

आज का योग
महत्वपूर्ण योग- सुकर्मा योग, 06.24 के उपरांत धृति योग 
नक्षत्र- धनिष्ठा नक्षत्र  
आज चंद्रमा का मकर राशि में 03.26 बजे तक इसके उपरांत कुंभ राशि में संचरण ( दिन रात) 
 
आज शुभ मुहूर्त 
11.56-12.45 बजे तक 

आज का राहु काल - 
राहु काल - सुबह 09.19 से 10.50 बजे तक 
 
गुप्त मनोकामना पूर्ण के लिए - 
पीली सरसों, गुग्गल, लोबान व गौघृत इन सबको मिलाकर इनकी धूप बना लें व सूर्यास्त के बाद उपले पर रखकर इसे बटवृक्ष की जड़ के पास जलायें. जलाने के बाद मिट्टी के बर्तन (प्याली) से उपले के चारो तरफ तीन बार पानी को घुमाकर गिरा दें. इसके बाद लौटते समय पीछे मुड़कर नहीं देखें. 

शनि प्रदोष व्रत
प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी के व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं. सूर्यास्त के पश्चात रात्रि के आने से पूर्व का समय प्रदोष काल कहलाता है. इस व्रत में महादेव भोले शंकर की पूजा की जाती है. इस व्रत में व्रती को निर्जल रहकर व्रत रखना होता है.

प्रात: काल स्नान करके भगवान शिव की बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप सहित पूजा करें. संध्या काल में पुन: स्नान करके इसी प्रकार से शिव जी की पूजा करना चाहिए. इस प्रकार प्रदोष व्रत करने से व्रती को पुण्य मिलता है.

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