Daily Panchang आज निर्जला एकादशी, जानिए व्रत का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Daily Panchang, Nirjala Ekadashi 2021: वर्षभर में चौबीस एकादशी आती हैं. इनमें निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jun 21, 2021, 06:14 AM IST
  • सुबह 11:46 से 12:18 तक काम करना शुभ
  • सुबह 8:19 से 9:45 तक शुभ काम से बचें

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Daily Panchang आज निर्जला एकादशी, जानिए व्रत का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

नई दिल्लीः Daily Panchang, Nirjala Ekadashi 2021: आज का पंचांग आपके लिए बड़ा ही शुभ दिन लेकर आया है. ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिसे निर्जला एकादशी कहते हैं. इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं. आज विश्व योग दिवस भी है. स्वाति नक्षत्र के साथ शिव योग है जो खास फल देने वाला है.

निर्जला एकादशी (Daily Panchang, Nirjala Ekadashi 2021) का व्रत बिना जल पिए रखा जाता है. इसके अलावा पंचांग में क्या है खास बता रहे हैं आचार्य विक्रमादित्य-

21 JUNE, Daily Panchang
पंचांग
दिन- सोमवार
तिथि- एकादशी
महीना- ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष
आज निर्जला एकादशी, भीमसेनी एकादशी और विश्व योग दिवस है. 

नक्षत्र
स्वाति नक्षत्र के साथ शिव योग है.

शुभ मुहूर्त
सुबह 11:46 से 12:18 तक काम करना शुभ. 

राहुकाल
सुबह 8:19 से 9:45 तक शुभ काम से बचें. 

सबसे श्रेष्ठ है निर्जला एकादशी
वर्षभर में चौबीस एकादशी आती हैं. इनमें निर्जला एकादशी (Daily Panchang, Nirjala Ekadashi 2021) को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं. क्योंकि महर्षि वेदव्यास के अनुसार पांडवों में से भीमने इस व्रत का अनुष्ठान किया था. मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से ही वर्ष सभी एकादशी के व्रत का फल प्राप्त होता है.

इस व्रत में सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक जल भी न पीने का विधान होने के कारण इसे निर्जला एकादशी कहते हैं. इस दिन निर्जल रहकर भगवान विष्णु की आराधना का विधान है. इस व्रत से दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

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निर्जला एकादशी व्रत पूजा विधि
जो श्रद्धालु वर्षभर की समस्त एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते हैं उन्हें निर्जला एकादशी का उपवास अवश्य करना चाहिए. क्योंकि इस व्रत को रखने से अन्य सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. इस व्रत की विधि इस प्रकार है:

व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है.
एकादशी के दिन प्रात:काल स्नान के बाद सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें. इसके पश्चात भगवान का ध्यान करते हुए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें.
भक्ति भाव से कथा सुनें और भगवान का कीर्तन करें.
जल से कलश भरे व सफ़ेद वस्त्र को उस पर ढककर रखें और उस पर चीनी या कोई मिष्ठान्न रखकर तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें.

इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है. धार्मिक महत्त्व की दृष्टि से इस व्रत का फल लंबी उम्र, स्वास्थ्य देने के साथ-साथ सभी पापों का नाश करने वाला माना गया है.

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