Importance Of Tulsi: प्रेत बाधा से लेकर वास्तु दोष तक, घर में अगर है तुलसी तो दूर रहेंगे सारे कष्ट

Importance Of Tulsi: तुलसी का पौधा घर में हो और उसकी रोज पूूजा होती हो तो घर पर बुरी नजर, टोना टोटका आदि का साया नहीं पड़ता है. बुरी आत्माओं का डर भी नहीं रहता है.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jul 28, 2021, 08:53 AM IST
  • शास्त्रीय मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को तुलसी अत्याधिक प्रिय है
  • तुलसी के हर भाग को भिन्न-भिन्न बीमारियों के उपयोग में लाये जाते हैं
Importance Of Tulsi: प्रेत बाधा से लेकर वास्तु दोष तक, घर में अगर है तुलसी तो दूर रहेंगे सारे कष्ट

नई दिल्लीः Importance Of Tulsi: शास्त्रों और आयुर्वेद, दोनों में ही तुलसी के पौधे को घर में लगाने के कई लाभकारी फायदे बताए गए हैं. पौराणिक ग्रंथों में तुलसी के पौधे को पूजनीय, पवित्र और देवी का दर्जा दिया गया है. यही कारण है कि हिंदू धर्म में आमतौर पर तुलसी का पौधा लगभग हर घर में देखा जाता है.

तुलसी का पौधा हमारे लिए धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही महत्व रखता है. ऐसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का वास होता है, वहां तरक्की के साथ सुख-शांति और धन की संपन्नता अपने आप ही हो जाती है. तुलसी वातावारण को शुद्ध और प्रदूषण रहित करने के साथ-साथ घर परिवार में आरोग्य की जड़ें मज़बूत करती है और श्रद्धा भाव को भी जीवित रखती है.

तुलसी का धार्मिक महत्व
तुलसी का पौधा हमारे लिए धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व का पौधा है. जिस घर में इसका वास होता है वहा आध्यात्मिक उन्नति के साथ सुख-शांति एवं आर्थिक समृद्धि स्वतः आ जाती है. तुलसी को प्रत्यक्ष देव मानने और मंदिरों एवं घरों में उसे लगाने, पूजा करने के पीछे संभवतः यही कारण है कि यह सर्व दोष निवारक औषधि सर्व सुलभ तथा सर्वोपयोगी है.

शास्त्रीय मान्यता
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को तुलसी अत्याधिक प्रिय है. तुलसी के पत्तों के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है. क्योंकि भगवान विष्णु का प्रसाद बिना तुलसी दल के पूर्ण नहीं होता है. धार्मिक धारणा है कि तुलसी की सेवापूजा व आराधना से व्यक्ति स्वस्थ एवं सुखी रहता है.

पापनाशिनी और मोक्षदायिनी तुलसी 
ऐसा विश्वास है कि तुलसी की जड़ में सभी तीर्थ, मध्य में सभी देवि-देवियाँ और ऊपरी शाखाओं में सभी वेद स्थित हैं. तुलसी का प्रतिदिन दर्शन करना पापनाशक समझा जाता है तथा पूजन करना मोक्षदायक. देवपूजा और श्राद्धकर्म में तुलसी आवश्यक है. तुलसी पत्र से पूजा करने से व्रत, यज्ञ, जप, होम, हवन करने का पुण्य प्राप्त होता है.

जीवन से मृत्यु तक तुलसी का महत्व
ऐसा कहा जाता है, जिनके मृत शरीर का दहन तुलसी की लकड़ी की अग्नि से क्रिया जाता है, वे मोक्ष को प्राप्त होते हैं, उनका पुनर्जन्म नहीं होता. प्राणी के अंत समय में मृत शैया पर पड़े रोगी को तुलसी दलयुक्त जल सेवन कराये जाने के विधान में तुलसी की शुद्धता ही मानी जाती है और उस व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त हो, ऐसा माना जाता है.

सौभाग्यशाली होने के लिए करें तुलसी की पूजा
इस पौधे की पूजा विशेष कर स्त्रियाँ करती हैं. सद गृहस्थ महिलाएं सौभाग्य, वंश समृद्धि हेतु तुलसी के पौधे को जल सिंचन, रोली अक्षत से पूजकर दीप जलाती हुई अर्चना-प्रार्थना में कहती वैसे वर्ष भर तुलसी की पूजा होती है. परन्तु विशेष रूप से कार्तिक मास में इसे विशेष तौर पर हर सनातनी घरों  में  पूजा की जाती है. कार्तिक मास में विष्णु भगवान का तुलसीदल से पूजन करने का विशेष विधान है.

औषधियों की खान है तुलसी
तुलसी को अथर्ववेद में महाऔषधि की संज्ञा दी गई हैं. आयुर्वेद में तुलसी के पौधे के हर भाग को स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद बताया गया हैै. तुलसी की जड़, उसकी शाखाएं, पत्ती और बीज सभी का अपना-अपना महत्व है. तुलसी के हर भाग को भिन्न-भिन्न बीमारियों के उपयोग में लाये जाते हैं.

रोग पतिरोधक क्षमता बढ़ती है. तुलसी के पत्तों में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इससे हमारा शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम बनता है. प्रतिदिन सुबह तुलसी के एक या दो पत्ते खाने से बदलते मौसम में होने वाले रोगों की वजह से बार-बार बीमार नहीं पड़ते हैं.

सर्दी जुकाम में फायदेमंद है तुलसी
तुलसी सर्दी-जुकाम के साथ बुखार में भी फायदा पहुंचाती है. काली मिर्च और तुलसी को पानी में उबाल कर काढ़ा बनाएं, इसमें मिश्री डालें. इसको पीने से बुखार में राहत मिलती है. जुकाम होने पर तुलसी को पानी में उबाल कर भाप लेने से भी फायदा होता है.

मुंह से दुर्गंध को दूर करने के लिए
तुलसी के पत्ते मुंह की दुर्गंध से निजात दिलाते हैं. रोजाना तुलसी के कुछ पत्ते मुंह में रखकर चूसने से सांस में आने वाली दुर्गंध दूर होती है, लेकिन तुसली के पत्तों को दांतों से चबाकर नहीं खाना चाहिए.

पेट की समस्याओं को दूर करने के लिए तुलसी
तुलसी पेट संबंधित परेशानियों में भी लाभ पहुंचाती है. लूज मोशन होने पर तुलसी को जीरे के साथ पीस लें और दिन में तीन से चार बार इस मिश्रण को खाएं. इससे दस्त की समस्या से निजात मिलेगी.

चोट-मोच में लाभकारी
घर में काम करते समय थोड़ी बहुत चोट लग जाती है, तो तुलसी के पत्ते और फिटकरी को मिलाकर घाव पर लगाना चाहिए. इससे घाव जल्दी ठीक होने लगता है.

तुलसी की कण्ठ माला
अनेक भारतीय हर रोग में तुलसीदल-ग्रहण करते हुए इसे दैवीय गुणों से युक्त सौ रोगों की एक दवा मानते हैं. गले में तुलसी-कष्ठ की माला पहनते हैं. इससे उन्हें कई बीमारियों में लाभ मिलता है.

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पर्यावरण को शुद्ध करने में तुलसी का महत्व
वातावारण में स्वच्छता एवं शुद्धता, प्रदूषण का शमन, घर परिवार में आरोग्य की जड़ें मजबूत करने, श्रद्धा तत्व को जीवित करने जैसे अनेकों लाभ इसके हैं. तुलसी के नियमित सेवन से सौभाग्यशालिता के साथ ही सोच में पवित्रता, मन में एकाग्रता आती है और क्रोध पर पूर्ण नियंत्रण हो जाता है. आलस्य दूर होकर शरीर में दिनभर फूर्ती बनी रहती है. तुलसी की सूक्ष्म व कारण शक्ति अद्वितीय है.

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