Kanya Sankranti 2021 Sun Transit in Leo: क्या है कन्या संक्रांति, जानिए इसका महत्व और महाउपाय

Kanya Sankranti 2021 Sun Transit in Leo: हिन्दू धर्म में संक्रांति का समय बहुत पुण्यकारी माना गया है संक्रांति के दिन पितृ तर्पण, दान, धर्म और स्नान आदि का काफी महत्व है इस वैदिक उत्सव को भारत के कई इलाकों में बहुत ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Sep 17, 2021, 09:14 AM IST
  • सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में गोचर करने को संक्रांति कहते हैं
  • कन्या संक्रांति के दिन बन रहा बुधादित्य योग से भी है इसका महत्व
Kanya Sankranti 2021 Sun Transit in Leo: क्या है कन्या संक्रांति, जानिए इसका महत्व और महाउपाय

नई दिल्लीः Kanya Sankranti 2021 Sun Transit in Leo: जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इसे संक्रांति कहते हैं. ऐसे में जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करने जा रहा है तो इसे कन्या संक्रांति या अश्विन संक्रांति के रूप में जाना जाएगा. कन्या संक्रांति के शुभ दिन पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है और इस दिन को उनकी जयंती के रूप में मनाया जाता है. 

कन्या संक्रांति पर बन रहा है बुधादित्य योग 
कन्या संक्रांति के दिन बन रहा बुधादित्य योग भी इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ाने वाला है. दरअसल बुध ग्रह पहले से ही अपनी राशि कन्या में मौजूद हैं इसके बाद अब 17 सितंबर को इसी राशि में सूर्य प्रवेश कर जायेंगे, जिसके चलते सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग का निर्माण होगा.

ज्योतिष के अनुसार बुधादित्य योग से व्यक्ति को धन संपदा के साथ साथ मान सम्मान की भी प्राप्ति होती है. 

कन्या संक्रांति के दिन भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद लेने के लिए इस मंत्र का पाठ करें:

1. ॐ विह्वकर्मय नम:

2. ॐ विश्वकर्मा नमः

कन्या संक्रांति का महत्व
- सूर्य के एक राशि से दूसरे राशि में गोचर करने को संक्रांति कहते हैं संक्रांति एक सौर घटना है हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पूरे वर्ष में प्रायः कुल 12 संक्रान्तियाँ होती हैं और प्रत्येक संक्रांति का अपना अलग महत्व होता है शास्त्रों में संक्रांति की तिथि एवं समय को बहुत महत्व दिया गया है.
-हिन्दू धर्म में संक्रांति का समय बहुत पुण्यकारी माना गया है संक्रांति के दिन पितृ तर्पण, दान, धर्म और स्नान आदि का काफी महत्व है इस वैदिक उत्सव को भारत के कई इलाकों में बहुत ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है.

-उपासक अपने स्नान के पानी में तिल अवश्य मिला लें इस दिन दान-धर्म की बहुत मान्यता है इसलिए स्नान के बाद ब्राह्मण को अनाज, फल आदि दान करना चाहिए इसके बाद उसे बिना तेल का भोजन करना चाहिए और अपनी यथाशक्ति दूसरों को भी भोजन देना चाहिए.
-कन्या संक्रांति, ग्रहण, पूर्णिमा और अमावस्या जैसे दिनों पर गंगा स्नान को महापुण्य दायक माना गया है माना जाता है कि ऐसा करने पर व्यक्ति को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है देवीपुराण में यह कहा गया है- जो व्यक्ति संक्रांति के पावन दिन पर भी स्नान नहीं करता वह सात जन्मों तक बीमार और निर्धन रहता है.


-संक्रांति के दिन पूजा-अर्चना करने के बाद गुड़ और तिल का प्रसाद बांटा जाता है जैसा कि हम सभी जानते हैं, संक्राति एक शुभ दिन होता है पूर्णिमा, एकादशी आदि जैसे शुभ दिनों की तरह ही संक्रांति के दिन की भी बहुत मान्यता है इसीलिए इस दिन कुछ लोग पूजा-पाठ आदि भी करते हैं मत्स्यपुराण में संक्रांति के व्रत का वर्णन किया गया है.

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आज करें उपाय
सूर्यदेव को नियमित जल चढ़ाएं.
बड़े-बुजुर्गो का सम्मान करें और उनका आशीर्वाद लें. 
अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा केसरिया रंग शामिल करें.
सूर्य मंत्र का नियमित रूप से जप करें.
आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ करें.

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