नव शिवरात्रि की हुई शुरुआत, नौ दिनों तक भोलेनाथ की पूजा

 महाशिवरात्रि व्रत के 9 दिन पहले से होने वाले अनुष्ठान को शिव नवरात्रि कहते हैं. इन नौ दिनों में बाबा भोलेनाथ की श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा की जाती है. इसके साथ ही महादेव के अलग-अलग स्वरूपों को भी पूजा जाता है.  

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Mar 4, 2021, 05:22 PM IST
  • महाशिवरात्रि का पर्व महादेव के विवाह का विधान दिवस है
  • नवशिवरात्रि व्रत को साधु समाज पूरी श्रद्धा-भक्ति से मनाता है
नव शिवरात्रि की हुई शुरुआत, नौ दिनों तक भोलेनाथ की पूजा

नई दिल्लीः 11 मार्च को आने वाली महाशिवरात्रि पर्व से पहले शिव नवरात्रि की गुरुवार से शुरुआत हो गई है. बाबा भोलेनाथ को श्रद्धालुओं ने शिव नवरात्रि के पहले दिन हल्दी, कुमकुम और उबटन लगाया. इसके बाद जब उनका जलाभिषेक किया गया तो महादेव का अलग ही रूप निखर कर आया.

अब गुरुवार के बाद शुक्रवार से एक-एक अनुष्ठान किया जाएगा. इसी आधार पर महाशिवरात्रि तक बाबा भोले नाथ की पूजा की जाएगी. सबसे खास बात की 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल उज्जैन में महादेव के अलग-अलग रूप हर दिन नजर आएंगे.

क्या है शिव नवरात्रि

महाशिवरात्रि व्रत के 9 दिन पहले से होने वाले अनुष्ठान को शिव नवरात्रि कहते हैं. इन नौ दिनों में बाबा भोलेनाथ की श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा की जाती है. इसके साथ ही महादेव के अलग-अलग स्वरूपों को भी पूजा जाता है.

इनमें महादेव के शेष स्वरूप, घटाटोप स्वरूप, उमा महेश रूप, शिवतांडव स्वरूप, छबीना, होल्कर, मन महेश स्वरूप, चंद्रशेखर स्वरूप और सप्तमधान शृंगार यानी सेहरा के दर्शन और पूजन होते हैं.

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महाशिवरात्रि यानी महादेव का विवाह

दरअसल, महाशिवरात्रि का पर्व महादेव के विवाह का विधान दिवस है. देवी सती के साथ विवाह में तो वह सामान्य कैलाशी बनकर गए थे, लेकिन देवी पार्वती से विवाह करने भगवान महादेव दल-बल के साथ, नाचते-गाते और पूरे विधि-विधान से बारात लेकर गए थे.

इस दौरान विवाह के 10 दिन पहले से ही उन्हें तैयार करने और कैलाश पर कई तरह के आयोजनों के साथ विवाह की तैयारी हुई थी.परंपरा के अनुसार आज तक विवाह में जो भी विधि और पद्धति अपनाई जाती है वह शिव-पार्वती विवाह के ही अनुसार की जाती है.

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उज्जैन में होता है विशेष अनुष्ठान

नवशिवरात्रि व्रत को साधु समाज पूरे श्रद्धा-भक्ति से मनाता है. इसके अलावा गृहस्थ श्रद्धालु महाशिवरात्रि का एक दिन का व्रत रखते हैं. लेकिन उज्जैन में महाकाल के मंदिर में यह शिव नवरात्रि उत्सव बड़े ही धूमधाम से और उत्साह से मनाया जाता है. इस दौरान बाबा की छवि देखते बनती है और भक्त उनके स्वरूप को देखकर निहाल होते हैं.

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