Navratri 2021: आज साथ होगी मां चंद्रघंटा और कूष्मांडा की पूजा, बुद्धि-समृद्धि के लिए ये पूजन विधि अपनाएं

Navratri 2021: इस बार नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा और मां कूष्मांडा देवी की पूजा एक साथ होगी. इस प्रकार इस बार शारदीय नवरात्रि 8 दिन की होगी.   

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Oct 9, 2021, 07:30 AM IST
  • जानिए मां चंद्रघंटा और कूष्मांडा के बारे में
  • माता की पूजा करने से दूर होती हैं दिक्कतें
Navratri 2021: आज साथ होगी मां चंद्रघंटा और कूष्मांडा की पूजा, बुद्धि-समृद्धि के लिए ये पूजन विधि अपनाएं

नई दिल्लीः Navratri 2021: नवरात्रि सनातन धर्म का एक प्रमुख त्योहार है. हिंदू समुदाय के लोग इसे बड़ी ही श्रद्धा के साथ मनाते हैं. इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि शुरू हो चुकी है. आज नवरात्रि का तीसरा दिन है. इस दिन लोग मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं. हालांकि, इस बार नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा और मां कूष्मांडा देवी की पूजा एक साथ होगी. इस प्रकार इस बार शारदीय नवरात्रि 8 दिन की होगी. जानिए मां चंद्रघंटा और कूष्मांडा की पूजन विधि, ताकि आपके सारे कष्ट दूर हों और बुद्धि-समृद्धि में वृद्धि हो. 

शेर पर सवार रहती हैं मां चंद्रघंटा
मां चंद्रघंटा की सवारी शेर है. उन्हें माता पार्वती का विवाहित रूप भी माना जाता है. मान्यता है कि नवरात्रि का तीसरा दिन शांति, धैर्य, और पवित्रता का दिन होता है. जो लोग मां चंद्रघंटा की विधिवत और श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं, मां उन्हें हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से बचाती हैं. मां चंद्रघंटा के माथे पर आधा चंद्र है, जो मंदिर की घंटी तरह लगता है.

इस तरह करें मां चंद्रघंटा की पूजा
माता सभी नौ ग्रहों में शुक्र ग्रह को नियंत्रित करने के लिए जानी जाती हैं. उनकी पूजा के लिए सफेद फूल, सफेद कपड़ा, शहद, दूध या दही और लाल सेब चाहिए. मां की मूर्ति चौकी या टेबल पर रखकर केसर, गंगाजल और पुष्पजल से स्नान कराएं. फिर माता को वस्त्र धारण कराएं. इसके बाद उन्हें फूल अर्पित करें. पूजा के दौरान मिठाई, पंचामृत और मिश्री का प्रसाद जरूर माता को चढ़ाएं.

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ब्रह्मांड की रचयिता हैं मां कूष्मांडा
मां कूष्मांडा को संपूर्ण ब्रह्मांड का रचयिता माना जाता है. माता को दिव्य शक्ति का रूप माना जाता है. मान्यता है कि उन्होंने ही अंदकार को दूर कर तीन दिव्य देवियों और देवताओं की रचना की थी. माता की सवारी बाघ है. उनको दिव्य शक्ति, शाश्वत होने और ऊर्जा का स्रोत माना गया है. उनकी पूजा करने से भक्तों को शक्ति, बुद्धि और समृद्धि मिलती है. साथ ही सभी दुख-तकलीफें दूर होती हैं.

मां कूष्मांडा की पूजन विधि
माता की पूजा के लिए सिंदूर, गुलाब, गुलदाउदी का फूल, हरी इलायची, सौंफ के बीज, कद्दू, खुमार का पेठा, लाल आटा और मालपुआ की जरूरत होती है. कलश के पास मां की मूर्ति रखें. उन्हें लाल फूल, मिठाई और फल चढ़ाएं. इसके बाद 'ऊं देवी कुष्मांडा नमस्तसिः' 'या देवी सर्वभूतेषु मां कुष्मांडा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः' मंत्र का जाप करें. 

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